अफगानिस्तान पर पाकिस्तान का नया पैंतरा, शरणार्थियों के मुद्दे पर मुसीबत बढ़ाने की चाल

वॉशिंगटन डीसी, 1 अगस्त: अफगानिस्तान में तालिबान के आतंकियों में अपने जिहादियों को शामिल कराने के आरोपों के बीच पाकिस्तान ने एक नया पैंतरा दिखाया है। उसे पता है कि अफगानिस्तान में इस से महीने हालात और खराब होने की आशंका है। क्योंकि, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने अपने सैनिकों के अफगानिस्तान खाली करने की मियाद 31 अगस्त तय कर रखी है। ऐसे समय में पाकिस्तान ने इस बात पर जोर देना शुरू कर दिया है कि वह अब और अधिक अफगानिस्तान शरणार्थियों का बोझ नहीं उठा सकता। गौरतलब है कि अफगानिस्तान में तालिबान के आतंकियों के कहर को देखते हुए बड़ी तादाद में अफगानी नागरिक पड़ोसी मुल्कों में शरण लेकर अपनी जान बचाना चाहते हैं। ऐसे ज्यादातर शरणार्थियों के लिए तालिबान आतंकियों से अपनी जान बचाने का सबसे नजदीकी विकल्प पाकिस्तान हो सकता है, क्योंकि पाकिस्तान के साथ लगने वाली अफगानिस्तानी सीमा सबसे लंबी है।

और अफगान शरणार्थियों को शरण देने से पाकिस्तान का इनकार

और अफगान शरणार्थियों को शरण देने से पाकिस्तान का इनकार

जियो न्यूज के मुताबिक अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में मीडिया से बातचीत करते हुए पाकिस्तान के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर डॉक्टर मोईद यूसुफ ने कहा है कि शरणार्थियों के लिए अफगानिस्तान के अंदर ही सेफ जोन स्थापित किया जानी चाहिए। पाकिस्तान को पता है कि अब ज्यादा से ज्यादा तादाद में अफगान शरणार्थी पड़ोसी मुल्कों में शरण लेने की कोशिश करेंगे। ऐसे में उसने चेतावनी देते हुए कहा है कि वह अब और ज्यादा अफगान शरणार्थियों का बोझ नहीं उठा सकता। मोईद यूसुफ ने कहा है कि 'दुर्भाग्य से इतिहास में अफगान की जमीन पाकिस्तान विरोधी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल हो चुकी है।' उन्होंने आरोप लगाया कि अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल आज भी पाकिस्तान के विनाश की गतिविधियों के लिए किया जा रहा है।

तालिबान के कहर के चलते संकट में अफगानी नागरिक

तालिबान के कहर के चलते संकट में अफगानी नागरिक

पाकिस्तान ने कहा है कि कई वर्षों में पाकिस्तान में 30 लाख से ज्यादा अफगान शरणार्थी आ चुके हैं, जिनमें से आधे रजिस्टर्ड भी नहीं हैं। बता दें कि पाकिस्तान को पूरा इल्म है कि अफगानिस्तान में हिंसा बढ़ने के साथ ही और ज्यादा तादाद में वहां के नागरिक अपना घर छोड़कर पाकिस्तान की ओर भागेंगे। पिछले महीने भी ऐसी जानकारी आई थी कि पाकिस्तान सरकार ने कहा था कि अब बहुत ज्यादा हो चुका है और अब वह इससे ज्यादा अफगानिस्तानी शरणार्थियों को नहीं घुसने देगा। इस समय अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच दो मुख्य बॉर्डर क्रॉसिंग हैं- बलूचिस्तान में चमन और खैबर पख्तूनख्वा में तोरखम। इसके अलावा कई छोटे-छोटे व्यापारिक रास्ते हैं।

शरणार्थियों और आतंकियों पर पाकिस्तान की दोहरी चाल

शरणार्थियों और आतंकियों पर पाकिस्तान की दोहरी चाल

अफगानिस्तान और पाकिस्तान की सीमा 2,640 किलो मीटर लंबी है। अफगानिस्तान की सबसे लंबी सीमा पाकिस्तान से ही लगी है। पाकिस्तान लगभग 90 फीसदी सीमा की फेंसिंग कर चुका है और इसकी निगरानी के लिए पाकिस्तानी सेना और फेडरल इंटिरियर मिनिस्ट्री के तहत फ्रंटियर पुलिस को तैनात किया गया है। पाकिस्तान की तालिबान से साठगांठ के आरोप खुद अफगानिस्तान सरकार ही लगाती रही है। इसलिए शायद उसे पूरा इल्म है कि जैसे-जैसे तालिबान नागरिकों और सुरक्षा बलों पर हमले करेगा, पहले ही साल में कम से कम 7,00,000 लाख नए शरणार्थी जान बचाकर पाकिस्तान की ओर भागेंगे। पिछले जून में खुद पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने न्यू यॉर्क टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि अगर अफगानिस्तान में हालात बिगड़ते हैं तो वह अपनी सीमाओं को शरणार्थियों के लिए नहीं खोलेंगे। लेकिन, रिपोर्ट है कि तालिबान के आतंकियों के लिए पाकिस्तानी सीमाएं खुली हुई हैं। (शरणार्थियों की तस्वीर प्रतीकात्मक)

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