डोनाल्ड ट्रंप के तेवर देख घबराया पाकिस्तान, बुलाईं दो इमरजेंसी मीटिंग
इस्लामाबाद। नए साल पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की फटकार और करोड़ों डॉलर की सहायता राशि रोके जाने के बाद से पाकिस्तान में खलबली मची हुई है। पाकिस्तान को समझ नहीं आ रहा है कि आखिर करे तो क्या करे? आनन-फानन में पाकिस्तान को जो समझ आ रहा है, वह वैसा कदम उठा रहा है। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप की धमकी के बाद पाकिस्तान ने सबसे पहले जो कदम उठाया है, उसके तहत उसने इस्लामाबाद में मौजूद अमेरिकी राजदूत डेविड हाले को समन भेजा। यह समन पाकिस्तानी विदेश सचिव तहनीमा जांजुआ ने भेजा है। ट्रंप के ट्वीट बम के बाद पाकिस्तान की बौखलाहट यहीं पर नहीं रुकी बल्कि उसने मौजूदा स्थिति से निपटने के लिए इमरजेंसी मीटिंग भी बुलाई है।

पाकिस्तान में जोर पकड़ रही नई अमेरिकी नीति की मांग
पाकिस्तान की बेचैनी का अंदाजा आपको इसी बात से लगाया जा सकता है कि अमेरिका के साथ विवाद बढ़ता देख उसने मंगलवार को एक के बाद दो मीटिंग बुलाई हैं। पाक के विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ ने बताया कि पीएम शाहिद खाकन अब्बासी एक बैठक में कैबिनेट के साथियों के साथ चर्चा करेंगे, जबकि दूसरी मीटिंग नेशनल सिक्योरिटी कमेटी के साथ रखी गई है। इस बीच पाकिस्तान में अमेरिका के साथ संबंधों पर पूरी तरह से नई नीति लाने की मांग भी जोर पकड़ रही है।

ट्रंप ने बताया पाकिस्तान को धोखेबाज और कपटी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ट्वीट कर पाकिस्तान को जमकर खरी-खोटी सुनाई। उन्होंने लिखा, 'अमेरिका मूर्खों की तरह पाकिस्तान को 15 सालों से सैन्य सहायता देता आ रहा है, लेकिन इसके जवाब में उसे वापस धोखा और झूठ मिला है। 15 साल से अब तक अमेरिका ने पाकिस्तान को 33 बिलियन डॉलर की सहायता राशि प्रदान की है लेकिन हर बार हमें मूर्ख बनाया गया है। पाकिस्तान हमेशा से आतंकवादियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बना हुआ है।

पाकिस्तान को अमेरिकी मदद का पूरा हिसाब-किताब
आतंकवाद के खिलाफ लड़ने के लिए अमेरिका पिछले 15 सालों से पाकिस्तान की सैन्य मदद कर रहा है। हालांकि, अमेरिकी ने इस बार कड़ा रुख अख्तियार करते हुए पाकिस्तान को इस साल दी जाने वाले 255 मिलियन डॉलर की सैन्य मदद पर रोक लगा दी है। अमेरिका के एक रिसर्च थिंक टैंक सेंटर फॉर ग्लोबल डेवलवमेंट (CGD) के रिपोर्ट की मानें तो 1951 से लेकर 2011 तक अलग-अलग मदों में अमेरिका ने पाकिस्तान को 67 बिलियन यूएस डॉलर की मदद दी है। बराक ओबामा के शासनकाल में 2009 में पाकिस्तान की मदद के लिए कैरी लुगर विधेयक (एनहेन्स्ड पार्टनरशिप विद पाकिस्तान एक्ट ऑफ 2009) पास किया गया।












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