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पाकिस्तान अफगानिस्तान में यमन जैसे हालात बनाने की कर रहा साजिश

नई दिल्ली। यह कहना बिल्कुल भी गलत नहीं होगा कि अमेरिका और सउदी अरब की वायु सेना यमन में अल कायदा की की एयर फोर्स हैं। अल कायदा को अमेरिका और सउदी अरब के हवाई हमलों का पूरा समर्थन मिलता दिखा रहा है। दोनों ही देशों की हवाई सेना पर चुनिंदा जगहों पर हमले करने का आरोप है।

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पिछले हफ्ते तालिबान ने एक बयान जारी करके कहा था कि अल कायदा ने अफगानिस्तान को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है। लेकिन सवाल यह है कि क्या अल कायदा को अफगानिस्तान में पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया है।

लेकिन रिसर्च एंड एनालिसिस विंग की रिपोर्ट के अनुसार अल कायदा की चुनौती अभी भी पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है। वहीं पाकिस्तान की खुफिया आईएसआई अभी भी इस कोशिश में है कि अल कायदा का अस्तित्व बना रहे।

क्या अल कायदा अमेरिकी हमलों पर निर्भर है

अमेरिकी सेना अभी भी पूरी तरह से अफगानिस्तान से पूरी तरह से नहीं हटी है। वहीं दोनों देशों के बीच हाल की बातचीत पर नजर डालें तो अमेरिका ने कहा है कि अमेरिकी सेना अभी भी अफगानिस्तान में मदद के लिए मौजूद रहेगी।

ऐसे में इन हमलों में यह देखना काफी दिलचस्प होगा कि अल कायदा और तालिबान के बेस कैंप को निशाना बनाया जाता है या नहीं। अमेरिका और पाकिस्तान के लिए दुश्मन साफ है। दोनों ही सेनायें आईएसआईएस और तहरीक ए तालिबान के ठिकानों पर निशाना साधेंगी।

वहीं भारत की खुफिया एजेंसी का कहना है कि अमेरिका और पाकिस्तान की सेना तालिबान और अल खुरसान पर हमला कर सकती हैं। इसकी वजह साफ है कि ये संगठन आईएसआई के समर्थन में नहीं है और ना ही उसके पक्ष में काम करते हैं। वहीं गुड तालिबान और अल कायदा से पाकिस्तान को कोई दिक्कत नहीं होगी क्योंकि ये पाकिस्तान के लिए जासूसी का काम करती हैं।

लेकिन अगर अल खोरसान और तहरीक ए तालिबान के बेस कैंपों पर हमला किया जाता है तो इसका असर अल कायदा और तालिबान पर भी पड़ेगा। ऐसे में तहरीक ए तालिबान और आईएसआई के ठिकानों पर हमला करना अल कायदा और तालिबान के पक्ष में जा सकता है। ऐसे में अफगनिस्तान में भी यमन जैसी स्थिति पैदा होने की संभावना साफ नजर आ रही है।

फलाह ए इंसानियत के जरिए हो रही फंडिंग

फलह ए इंसानियत जमात उद दावा का दूसरा नाम है। यह संस्था आतंकी गतिविधियों के लिए बड़ी मात्रा में चंदा मुहैया कराती है। रिसर्च और अनालिसिस विंग के अनुसार इस संस्था द्वारा बड़ा चंदा अल कायदा की मदद के लिए भेजा जाता है।

लश्कर ए तैयबा का एक और संगठन फेल मुस्लिम देशों में बॉक्सेस के माध्यम से चंदा इकट्ठा कर रहा है। यह चंदा इंसानियत के नाम पर इकट्ठा किया जा रहा है जिसका इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

लखवी की भी आती है अहम भूमिका
ऐसे में जकीउर रहमान लखवी की भूमिका भी काफी अहम हो जाती है। हालांकि इसे लश्कर ए तैयबा का सद्स्य माना जाता है लेकिन यह हकीकत में आतंकी के कपड़ों में आईएसआई का एजेंट है।

आईएसआई के साथ हुई अपनी आखिरी मीटिंग में लखवी ने अफगानिस्तान के हालात का भी जायजा लिया था। वहीं लखवी का कहना है कि अफगानिस्तान को एक और सीरिया और इराक नहीं बनने देना है। ऐसे में अल कायदा और तालिबान का हौसला बढ़ाने की हमें जरूरत है।

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