UN में कश्मीर पर भारत ने फिर से पाकिस्तान को दिया करारा जवाब
जिनेवा। भारत ने पाकिस्तान पर छोटी सोच की रणनीति को आगे बढ़ाने का आरोप लगाया है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग (यूएनएचआरसी) को जानकारी दी है कि उसने सीमा पार से उसके पड़ोसी की ओर से आतंकवाद को मिल रहे समर्थन से जुड़े सारे सुबूत दिए हैं। भारत ने यूएनएचआरसी को यह जानकारी भी दी कि पाकिस्तान कश्मीर में विरोध प्रदर्शन को बढ़ावा दे रहा है और उसने इसके सुबूत भी मुहैया कराए हैं।

कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा देता पाक
भारत ने अपने जवाब देने के अधिकार का प्रयोग करते हुए यूएनएचआरसी के 35वें अधिवेशन में पाकिस्तान को फटकार लगाई है। भारत ने पाकिस्तान पर आरोप लगाया है कि पाकिस्तान अपने राजनीतिक मकसद से यूएन के मंच का दुरुपयोग कर रहा है। भारत की ओर से पाकिस्तान को जवाब देते हुए कहा गया, 'भारत के राज्य जम्मू कश्मीर पर पाकिस्तान की टिप्पणियां अवांछित और अकारण हैं। जम्मू कश्मीर भारत का आंतरिक हिस्सा है और पाकिस्तान की टिप्पणियां पूरी तरह से गलत हैं और वास्तविकता से उनका कोई संबंध नहीं है।' भारत की ओर से जोर देकर इस बात को कहा गया कि पाकिस्तान, कश्मीर को अस्थिर करने के लिए आतंकवाद का प्रयोग कर रहा है। भारत ने कहा है, 'कश्मीर की स्थिरता के लिए यहां पर आतंकवाद को मिल रहा सबसे बड़ी चुनौती बन गया है और इसे पाकिस्तान के नियंत्रण वाली सीमाओं की ओर से समर्थन मिल रहा है।' भारत ने कहा है कि पाकिस्तान के दावों से अलग और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा संघ प्रस्ताव 1267 से अलग, आतंकी संगठन पाकिस्तान के अखबारों, टेलीविजन और सोशल मीडिया पर खुलेआम अपनी गतिविधियां जारी रखे हैं।
पाकिस्तान ने हमेशा तोड़ा अपना वादा
भारत ने एक बार फिर यूएन में कहा है कि उसके पास सीमा पार से जारी आतंकवाद और कश्मीर के विरोध प्रदर्शन को मिल रही पाकिस्तानी मदद के पूरे सुबूत हैं। इन सुबूतों को पाकिस्तान को भी सौंपा जा चुका है। लेकिन इस मुद्दे पर काम करने के बजाय पाकिस्तान अपनी छोटी सोच की रणनीति को आगे बढ़ा रहा है ताकि वह इस मुद्दे से दुनिया का ध्यान हटा सके। पाकिस्तान ने यूएन में कहा था कि वर्तमान समय में कश्मीर में जो हालात हैं वे भारत के लिए राष्ट्रीय शर्म की तरह हैं। पाकिस्तान ने कहा था कि कश्मीर में नफरत का जो सिलसिला चल रहा है वह सिर्फ राजनीतिक वार्ता के जरिए ही रोका जा सकता है। भारत ने पाकिस्तान को दो टूक जवाब दिया है और कहा है कि चाहे 1972 का शिमला समझौता हो या फिर वर्ष 2004 को संयुक्त घोषणापत्र या फिर रूस के उफा में दो प्रधानमंत्रियों के बीच मुलाकात हो, पाकिस्तान ने हमेशा आतंकवाद पर किया गया वादा तोड़ा है।












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