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पाकिस्तान में राजनीतिक तनाव बढ़ा! इमरान खान की पार्टी ने चौथे दौर की वार्ता का किया बहिष्कार

Pakistan Imran Khan News: पाकिस्तान में राजनीतिक तनाव कम करने के लिए सरकार और विपक्षी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के बीच चल रही वार्ता प्रक्रिया 28 जनवरी को रुक गई। इमरान खान की पार्टी ने चौथे दौर की वार्ता में शामिल होने से इनकार कर दिया, जिससे यह संकेत मिलता है कि दोनों पक्षों के बीच मतभेद गहराते जा रहे हैं।

नेशनल असेंबली के अध्यक्ष अयाज सादिक ने सरकारी वार्ताकारों के अनुरोध पर संसद भवन में बैठक आयोजित की थी। हालांकि, पीटीआई के नेता इस बैठक में नहीं पहुंचे। पीटीआई प्रमुख इमरान खान, जो वर्तमान में जेल में हैं, ने पहले ही अपनी पार्टी को निर्देश दिया था कि यदि सरकार उनकी मांगों को पूरा करने में विफल रहती है, तो किसी भी वार्ता में शामिल न हों।

Pakistan Imran Khan party

PTI ने 9 मई, 2023 और 26 नवंबर, 2024 के विरोध प्रदर्शनों की जांच के लिए दो न्यायिक आयोगों के गठन की मांग की थी। पार्टी ने 17 जनवरी को पिछली बैठक में यह मांगें रखी थीं और सात दिन की समयसीमा दी थी। हालांकि, सरकार ने इन मांगों पर संदेह जताया और चौथे दौर में अपनी प्रतिक्रिया देने की तैयारी की थी, लेकिन पीटीआई के बहिष्कार के कारण वार्ता आगे नहीं बढ़ सकी।

सरकार का पक्ष

सरकारी समिति के प्रवक्ता इरफान सिद्दीकी ने मीडिया को बताया कि पीटीआई ने वार्ता प्रक्रिया में भाग न लेकर इस प्रक्रिया को रोक दिया है। हालांकि, समिति 31 जनवरी तक बनी रहेगी। यदि इस बीच पीटीआई फिर से संपर्क करती है, तो वार्ता की संभावना बनी रहेगी।

सिद्दीकी ने कहा कि पीटीआई ने अपनी मांगें पेश करने में 42 दिन लगाए, जबकि हमने केवल सात कार्य दिवस मांगे। इस दौरान हमने व्यापक काम किया, लेकिन पीटीआई की अनुपस्थिति ने प्रक्रिया को ठप कर दिया।

स्पीकर अयाज सादिक का बयान

अयाज सादिक ने बताया कि सरकार ने विपक्षी नेताओं का 45 मिनट तक इंतजार किया, लेकिन कोई नहीं आया। उन्होंने कहा, "बातचीत ही एकमात्र रास्ता है जिसके जरिए समाधान निकाला जा सकता है।" सादिक ने यह भी कहा कि वह अब भी दोनों पक्षों को वार्ता के जरिए समस्याओं का समाधान खोजने में मदद करने के लिए तैयार हैं।

पीटीआई का रुख

पीटीआई के अध्यक्ष गौहर खान ने स्पष्ट किया कि इमरान खान के निर्देश के मुताबिक, पार्टी किसी अन्य वार्ता में शामिल नहीं होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जांच आयोगों के गठन को लेकर गंभीर नहीं है।

वार्ता प्रक्रिया पर असर

इस वार्ता प्रक्रिया का उद्देश्य देश में बढ़ते राजनीतिक तनाव को कम करना था। तीन दौर की वार्ता पहले ही हो चुकी है, लेकिन चौथे दौर के ठप हो जाने से समाधान की संभावना कमजोर हो गई है।

क्या आगे बढ़ेगी वार्ता?

सरकारी प्रवक्ता ने संकेत दिया कि 31 जनवरी तक वार्ता की संभावनाएं खुली रहेंगी। लेकिन पीटीआई के सख्त रुख को देखते हुए यह कहना मुश्किल है कि वार्ता फिर से शुरू हो पाएगी या नहीं।

पाकिस्तान में सरकार और विपक्ष के बीच वार्ता प्रक्रिया के ठप होने से राजनीतिक संकट और गहरा गया है। इमरान खान की पार्टी के बहिष्कार से समाधान की उम्मीदों को झटका लगा है। अब यह देखना होगा कि दोनों पक्ष कैसे इस गतिरोध को खत्म कर सकते हैं।

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