फिर बेनकाब हुआ पाकिस्तान, हाफिज के संगठन पर नहीं लगाया बैन
नई दिल्ली। पाकिस्तान ने आतंकी संगठन जमात-उद-दावा (JuD) और फतह-ए-इन्सानियत (FiF) और जैश ए मोहम्मद पर 21 फरवरी, 2019 को सरकार द्वारा की गई आधिकारिक घोषणा के बावजूद प्रतिबंध नहीं लगाया है। पाकिस्तान के आंतरिक मंत्रालय द्वारा 4 मार्च, 2019 को जारी अधिसूचना के आधार पर राष्ट्रीय काउंटर टेररिज्म प्राधिकरण ने संगठनों की नवीनतम सूची इन दोनों आतंकवादी संगठनों पर बैन नहीं लगाया है। हालांकि, पाकिस्तान की सरकार ने कई आतंकी संगठनों पर कार्रवाई की है।

पाक ने कही लगाया बैन
रिपोर्ट्स के मुताबिक आतंकवाद-रोधी अधिनियम (एटीए) 1997 की अनुसूची -1 में पेशेवरों की श्रेणी में 68 संगठन हैं। जबकि हाफिज सईद के संगठन JuD और FiF उस अधिनियम की अनुसूची- II पर हैं। जिसमें वे आंतरिक मंत्रालय द्वारा केवल 'अंडर वॉच' हैं। इसके अलावा, वॉच लिस्ट पर लिखी गई तारीख फ़रवरी 21, 2019 है। जबकि उसी दिन इन संगठनों को प्रतिबंधित करने की आधिकारिक घोषणा की गई थी। पाकिस्तान जो दुनियाभर के सामने कह रहा था कि वह आतंकियों के खिलाफ कड़े एक्शन ले रहा है और शांति चाहता है उसका झूठ दुनिया के सामने आ चुका है।

पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट का दर्जा मिला
पाकिस्तान पर इन आतंकी नेटवर्कों के खिलाफ कार्रवाई करने का भारी दबाव रहा है। यही वजह है कि पेरिस में एफएटीएफ प्लेनरी आयोजित होने से ठीक एक दिन पहले प्रतिबंध की घोषणा की गई थी। जहां समीक्षा के दौरान पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट का दर्जा मिला था। इन के बावजूद FATF पाकिस्तान पर भारी पड़ा और क्योंकि वह पाक की चालों से आश्वस्त नहीं था। JuD और FiF दोनों को वास्तव में जनवरी 2017 में वॉच लिस्ट में रखा गया था और यह 8 फरवरी 2018 को अपडेट होने पर सूची में बना रहा।

पाक की आतंकी समूहों के साथ मिलीभगत का हुआ खुलासा
लेकिन पाकिस्तान द्वारा की गई घोषणा में कहा गया कि, दोनों संगठनों का दर्जा बदल दिया गया है, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। दोनों संगठनों को अंडर वॉच से बदलकर प्रॉसीड किया जाना चाहिए था। जो आधिकारिक रूप से नहीं किया गया है। एक सूत्र ने कहा, यह पाकिस्तान के नियंत्रण वाले क्षेत्रों में सक्रिय आतंकवादियों और आतंकवादी समूहों के खिलाफ विश्वसनीय और सत्यापन योग्य कार्रवाई करने में गंभीरता की कमी को दर्शाता है। यह आतंकी समूहों के साथ मिलीभगत को साबित करता है। एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने कहा, 'इसका मतलब है कि पाकिस्तान ने जेयूडी और एफआईएफ को प्रतिबंधित करने को लेकर झूठ बोला है। असल में, इसने दुनिया को मूर्ख बनाने के लिए सिर्फ निगरानी सूची की तारीख में बदलाव कर दिया।'












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