पाक में आतंकी संगठनों के बीच शुरु वर्चस्व की लड़ाई, मारे जा रहे निर्दोष

कराची। पाकिस्तान में एक बार फिर से बड़ा आतंकी हमला हुआ है जिसमें 47 लोगों के बस में गोलियों से भून दिया गया। वहीं इस हमले के तुरंत बाद इसकी जिम्मेदारी तहरीक-ए-तालिबान ने ली है। लेकिन आईएसआईएस ने भी इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए पर्चे बांटे हैं।

pak-terror

वहीं इस घटना के बाद यह साफ हो गया है कि पाकिस्ता में दो गुटों के बीच लड़ाई की बात सामने आ गयी है। वहीं शुरुआती जांच से इस बात के संकेत मिलते हैं कि इस हमले के पीछे तहरीक-ए-तालिबान का हाथ है क्योंकि इस संगठन की पाकिस्तान में कहीं ज्यादा पैठ है।

झूठे प्रचार की लड़ाई

एक तरफ जहां तहरीक-ए-तालिबान अपनी पैठ को और मजबूत करना चाहत है वहीं दुनिया के सबसे बड़े आतंकी संगठन आईएस और अल कायदा के बराबर अपना कद बढ़ाना चाहता है। लेकिन तहरीक-ए-तालिबान के दावे के बाद पाकिस्तान सरकार की मुश्किलें बढ़ती दिखायी दे रही हैं। पाकिस्तान में स्कूल में हुए हमले के बाद पाक सरकार तहरीक-ए-तालिबान के ठिकानों पर बड़ा हमला बोलते हुए इसके खिलाफ सख्त कार्यवाही कर रही है।

वहीं खुफिया विभाग का कहना है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान में हर हमले की जिम्मेदारी लेने के लिए आगे आयेगा। इसके पीछ की सबसे बड़ी वजह यह है कि तहरीक-ए-तालिबान खुद की उपस्थिति को पाक में हर हाल में दर्ज कराना चाहता है।

क्या है बड़ा डर

तहरीक-ए-तालिबान और अन्य संगठनों के बीच चल रही लड़ाई का सबसे बड़ा नुकसान पाकिस्तान को हो रहा है। तहरीक-ए-तालिबान ने इससे पहले पाक एयरपोर्ट पर हुए हमले की भी जिम्मेदारी ली थी। वहीं हाल ही में इस बात की भी बात सामने आयी है कि इस संगठन ने मिसाइल उमर-1 का भी प्रक्षेपण किया है। यही नहीं अपने दावे को पुख्ता करने के लिए संगठन ने एक वीडियो भी जारी किया है।

तहरीक-ए-तालिबान की इन घटनाओं से इस बात की पुष्टि होती है कि यह संगठन पाक में धीरे-धीरे अपने पैर मजबूत कर रहा है। वहीं पाक सरकार का कहना है कि तहरीक-ए-तालिबान तालिबान के सारे दावे बेबुनियाद है। पाक सरकार का मानना है कि सिर्फ पेशावर स्कूल में हुए हमले के पीछे इस संगठन का हाथ है।

मुश्किल होने वाले हैं पाक के लिए आने वाले दिन

पाकिस्तान सरकार और सेना के लिए इन संगठनों से भिड़ना सबसे बड़ी चुनौती है। टीटीपी (तहरीक-ए-तालिबान-पाकिस्तान) पूरी तरह से काबू से बाहर हो गया है। यही नहीं इस संगठन ने अब पाकिस्तान की सरकार और सेना का सरे आम मखौल उड़ाना शुरु कर दिया है।

पाकिस्तान सरकार ने इस संगठन को तोड़ने की कई कोशिशें भी की है लेकिन इन सभी हमलों से टीटीपी को बच निकलने में सफलता मिली है। वहीं भारत के अधिकारियों का कहना है कि तहरीक-ए-तालिबान में दरार पैदा करने की नीति पाक की गलत रणनीति है। इस संगठन से टूट रहे लोग या तो आईएस से जुड़ रहे हैं या मध्य एशिया के आतंकी संगठनों में शामिल हो रहे हैं।

पाकिस्तान के लिए छद्म लड़ाई लड़ने वाले कहां हैं

वहीं भारतीय अधिकारियों ने जकीउर रहमान लखवी जैसे लोग अब कहां हैं और क्यों नहीं इन संगठनों को रोकते हैं जो पाक के लिए छद्म लड़ाई लड़ते हैं। माना जा रहा था कि पाक ने लखवी की मदद से इस संगठन के खिलाफ कार्यवाही करने की बात कही थी।

हालांकि लखवी की रिहाई के बाद पाक के उपर अतंर्राष्ट्रीय दबाव है जिसके चलते उसे पाक में दीवारों के पीछे रहने को मजबूर होना पड़ रहा है। ऐसे में हाफिज सईद जैसे लोग पाक के लिए मददगार साबित हो सकते हैं जिन्हें पाक में काफी लोकप्रियता प्राप्त है।

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