Pak Donkey Controversy: गधों के चक्कर में फंसे शहबाज, चीन ने लगाई फटकार तो हुए नतमस्तक, तत्काल दी मंजूरी
Pak Donkey Controversy: हमारा पड़ोसी पाकिस्तान, ऐसी क्यूट-क्यूट मुसीबतें अपने गले बांधता है जो समय के साथ उसकी बेइज्जती करा देती हैं। बावजूद इसके वह सुधरने का नाम नहीं लेता। ताजा मामले में पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार को चीन ने गधों को चक्कर में फटकार लगाई है। साथ ही कहा है कि बात नहीं मानी तो तुम्हारा हुक्का-पानी बंद यानी फैक्ट्री बंद कर देंगे। क्या पूरा मामला जानिए इस खबर में।
गधों के शौकीन हैं चीनी
पाकिस्तान के Gwadar में काम कर रही Hangeng Trade Company पिछले कई महीनों से बड़ी दिक्कतों का सामना कर रही थी। यह कंपनी चीन के एक प्रोजेक्ट्स का अहम हिस्सा है, लेकिन इसे एक्सपोर्ट अप्रूवल में लगातार देरी झेलनी पड़ी। जिससे चीन भड़क गया है और पाकिस्तान को फटकार लगाई है। दरअसल Hangeng Trade Company एक बूचड़खाना (b) चलाती है, जहां गधों का मांस और खाल तैयार कर चीन भेजी जाती है। चीन में इनका इस्तेमाल एक पारंपरिक दवा बनाने में होता है, जिसे खून बढ़ाने (blood tonic) और स्किन से जुड़ी समस्याओं के इलाज के लिए बेचा जाता है।

हर साल करोड़ों डॉलर का बिजनेस
पाकिस्तान हर साल करीब 2.16 लाख गधों का निर्यात करता है, जिनका इस्तेमाल मांस और खाल दोनों के लिए होता है। सरकारी अनुमान के मुताबिक, इससे लगभग 300 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 2500 करोड़ रुपये से ज्यादा) का रिवेन्यु मिल सकता है। यानी यह सिर्फ एक छोटा व्यापार नहीं, बल्कि फॉरेन करेंसी का एक बड़ा जरिया है।
कंपनी ने दी ऑपरेशन बंद करने की चेतावनी
1 मई को कंपनी ने एक सार्वजनिक बयान जारी किया, जिसमें कहा गया कि गैर-बाजार कारणों और ऑपरेशनल समस्याओं के कारण उसे पाकिस्तान में अपना काम बंद करना पड़ सकता है। कंपनी ने साफ कहा कि उसे फैक्ट्री बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है और उसने अपने कर्मचारियों को भी इस संभावित बंदी की जानकारी दे दी थी।
निवेशकों के छूटे पसीने
कंपनी ने सिर्फ अपनी परेशानी नहीं बताई, बल्कि अन्य निवेशकों को भी चेताया। उसने कहा कि पाकिस्तान में निवेश करने से पहले नीति लागू होने में देरी और संस्थागत अनिश्चितता को ध्यान से समझना जरूरी है। कंपनी के मुताबिक, उसने सभी एक्सपोर्ट स्टैंडर्ड पूरे किए थे, फिर भी उसकी खेप तीन महीने से अटकी हुई थी और अधिकारियों से लगातार संपर्क के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला।
कहां फंसी थी फाइल?
यह पूरा मामला पाकिस्तान के Ministry of National Food Security और Animal Quarantine Department के पास लंबित अप्रूवल से जुड़ा था। यही विभाग पशुओं के एक्सपोर्ट को कंट्रोल करते हैं। अधिकारियों ने भी माना कि ये मंजूरियां कई महीनों से अटकी हुई थीं।
PMO के हस्तक्षेप के बाद बदला खेल
कंपनी के बयान के बाद Tauqir Shah ने मामले में हस्तक्षेप किया और इसे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक पहुंचाया। इसके बाद अचानक प्रक्रिया तेज हुई। अधिकारियों के मुताबिक, शुक्रवार को PMO के दखल के बाद तेजी से अप्रूवल प्रोसेस शुरू किया गया और शहबाज शरीफ ने अपने चीनी आकाओं को खुश करने के लिए मात्र 24 घंटे में वक्त बदल दिया- जज्बात बदल दिए और अप्रूवल दे दिया।
कंपनी सवालों के घेरे में और पाकिस्तान कर्ज के
हालांकि, सरकारी अधिकारियों ने यह भी कहा कि कंपनी ने सभी शर्तें पूरी तरह से नहीं मानी थीं। खासतौर पर अंतरराष्ट्रीय स्तर के एक्सपोर्ट के लिए जरूरी प्रजनन (breeding) मानकों को लेकर कुछ कमियां बताई गईं। बावजूद इसके पाक के अधिकारियों को चीन को मंजूरी देना पड़ी।
सिस्टम vs निवेश
यह पूरा मामला दिखाता है कि पाकिस्तान में विदेशी निवेश करने वाले कितनी भी लापरवाही करें लेकिन जब सरकार ही सरकार ही साथ हो तो अधिकारी और विभाग क्या कर लेंगे। चीन भी ये बात जानता है और उसे अपनी बात अच्छे से मनवानी आती है। लिहाजा अब पाकिस्तान गधे का गोश्त और चमड़ी दोनों एक्सपोर्ट करता रहा रहेगा।
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