Pak Indus River: 12 लाख लोग हुए बेघर, 80% पानी खत्म, पाकिस्तान के सिंधु डेल्टा में हालात बिगड़े

Pak Indus River: पाकिस्तान में सिंधु नदी का डेल्टा क्षेत्र अब अरब सागर के खारे पानी की चपेट में है, जिससे यहां पीने के पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। कभी हरा-भरा रहा ये क्षेत्र अब पूरी तरह से खत्म होने की कगार पर है। इसकी मुख्य वजह सिंधु नदी के पानी को ऊपरी इलाकों में नहरों और बांधों में रोक देना है, जिसके चलते सिंध प्रांत और डेल्टा क्षेत्र में पानी की आपूर्ति लगभग बंद हो गई है।

कैसा हो गया हाल?

पहले इस डेल्टा में 17 छोटी नदियां, दलदली ज़मीन, मैंग्रोव जंगल और मछलियों से भरे दलदली मैदान थे। आज, यहां की मिट्टी नमकीन, पानी ज़हरीला और ज़मीन रहने लायक नहीं बची है। सिंध सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, 80% पानी अब पीने योग्य नहीं रहा। एक रिपोर्ट बताती है कि 1960 के दशक से अब तक मैंग्रोव का 86% हिस्सा खत्म हो गया है, जिससे मछली की आबादी में 80% की गिरावट आई है।

Pak Indus River

12 लाख लोगों ने छोड़ा इलाका

पाकिस्तानी सरकार द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, पिछले दो दशकों में लगभग 12 लाख से अधिक लोग डेल्टा क्षेत्र छोड़कर कराची जैसे बड़े शहरों में पलायन कर चुके हैं। पाकिस्तान फिशरफोक फोरम ने बताया कि हजारों मछुआरे परिवार तटीय इलाकों से विस्थापित हो गए हैं। पूरे इलाके में अब सिर्फ चार घर बचे हैं।

44 साल में 55% पलायन

खारो चान इलाके में कभी 40 गांव थे, लेकिन अब ज़्यादातर गांव समुद्र में समा चुके हैं। 1981 में इस इलाके की आबादी 26,000 थी, जो 2023 में घटकर सिर्फ 11,000 रह गई है।
सिंध प्रांत में फरवरी से ही 'सेव द इंडस रिवर मूवमेंट' गठबंधन ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। इसमें पर्यावरण कार्यकर्ता, स्थानीय समुदाय, गैर-सरकारी संगठन और नीति-निर्माता शामिल हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ये नई नहरें सिंधु नदी का पानी ऊपरी इलाकों में रोक देंगी, जिससे सिंध और खासकर इंडस डेल्टा में खेती पर गंभीर संकट आ जाएगा।
महिला संगठन सिंधियानी तहरीक की कार्यकर्ता मरियम गोपांग ने कहा, "हम अपनी सिंधु नदी के बिना कुछ भी नहीं हैं। अगर यह नदी नहीं होगी तो हम मर जाएंगे।"

समुद्री जीवों की गिरी आबादी

आंकड़ों की मानें तो 1950 के दशक से सिंधु डेल्टा में बहने वाले पानी में 80% की कमी आई है। इसके परिणामस्वरूप, अरब सागर का खारा पानी इस क्षेत्र में घुस गया है, जिससे ज़मीन अनुपजाऊ हो गई है। खेती लगभग बंद हो चुकी है और समुद्री जीवों, जैसे मछलियों, झींगा और केकड़ों की आबादी में भारी गिरावट आई है।

क्या कर रही शहबाज सरकार?

पाकिस्तान की सबसे बड़ी नदी सिंधु से पानी खींचकर चार प्रांतों में छह नहरें बनाई जा रही हैं। यह प्रोजेक्ट 'ग्रीन पाकिस्तान इनिशिएटिव' के तहत चल रहा है, जिसकी लागत लगभग 28,000 करोड़ रुपये है। इन नहरों से मिलने वाले पानी का उपयोग रेगिस्तानी ज़मीन को खेती योग्य बनाने में किया जाएगा। यह पानी सिंधु नदी या उसके बैराजों से लिया जाएगा, जिसमें सबसे बड़ी नहर पंजाब के चोलिस्तान रेगिस्तान में बनाई जाएगी।

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