Pahalgam Terror Attack: कौन हैं जनरल असीम मलिक? पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान ने दिया NSA की कमान

Pahalgam Terror Attack: भारत पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान ने अपनी खुफिया एजेंसी ISI के चीफ लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद असीम मलिक को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंप दी है। लेफ्टिनेंट जनरल मलिक की यह भूमिका ऐसे समय में आई है जब पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद दोनों देशों के रिश्तों में काफी तनाव देखने को मिल रहा है। ऐसे में आइए जानते हैं कि मोहम्मद असीम मलिक कौन हैं और इनको ये बड़ी जिम्मेदारी देने के पिछे का मकसद क्या है?

लेफ्टिनेंट जनरल मलिक का सैन्य अनुभव काफी अच्छा रहा है। उन्होंने बलूचिस्तान और दक्षिण वजीरिस्तान जैसे अशांत इलाकों में डिवीजनों की कमान संभाली है, जहाँ आतंकवाद और विद्रोह जैसी चुनौतियों से रोज़ सामना होता है। ISI के निदेशक बनने से पहले वे सेना के जनरल मुख्यालय में एडजुटेंट जनरल के रूप में कार्यरत थे, जहाँ उन्होंने इमरान खान की गिरफ्तारी जैसे संवेदनशील मामलों की निगरानी की थी।

Pahalgam Terror Attack

नियुक्ति को पाकिस्तान की रणनीतिक तैयारी का संकेत माना जा रहा है

इस नियुक्ति को पाकिस्तान की रणनीतिक तैयारी का संकेत माना जा रहा है, खासकर उस वक्त जब नियंत्रण रेखा पर लगातार सीजफायर का उल्लंघन हो रहा है और भारत ने अपने सशस्त्र बलों को "पूर्ण परिचालन स्वतंत्रता" देने की घोषणा कर दी है। वहीं पाकिस्तान भी गीदड़ धमकी से बाज नहीं आ रहा है। इस घटनाक्रम के बीच असीम मलिक की नई भूमिका आने वाले दिनों में भारत-पाकिस्तान संबंधों की दिशा और पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा नीति को किस तरह प्रभावित करेगी, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

कौन है आईएसआई प्रमुख मोहम्मद असीम मलिक?

लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद असीम मलिक इस समय पाकिस्तान के सबसे प्रभावशाली सैन्य अधिकारियों में गिने जाते हैं। वे इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) के मौजूदा प्रमुख हैं और हाल ही में उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। उन्होंने 30 सितंबर 2024 को ISI के 31वें महानिदेशक के रूप में कार्यभार संभाला, और 30 अप्रैल 2025 को NSA के रूप में अपनी नई भूमिका ग्रहण की।

मलिक का सैन्य करियर तीन दशकों से भी अधिक समय का रहा है। 1989 में उन्होंने 12वीं बलूच रेजिमेंट में कमीशन प्राप्त किया। अपनी सेवा के दौरान उन्होंने पाकिस्तान के सबसे संवेदनशील और अशांत माने जाने वाले क्षेत्रों - बलूचिस्तान और दक्षिण वज़ीरिस्तान - में इन्फैंट्री ब्रिगेड और डिवीजनों की कमान संभाली। इसके अलावा, उन्होंने पाकिस्तान की दो प्रतिष्ठित सैन्य शैक्षणिक संस्थाओं - नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी और कमांड एंड स्टाफ कॉलेज, क्वेटा - में प्रशिक्षक की भूमिका भी निभाई।

अक्टूबर 2021 में उन्हें लेफ्टिनेंट जनरल के पद की जिम्मेदारी दी गई और रावलपिंडी स्थित जनरल मुख्यालय (GHQ) में एडजुटेंट जनरल नियुक्त किया गया। इस पद पर रहते हुए उन्होंने सैन्य अनुशासन, प्रशासनिक मामलों, और प्रमुख संवेदनशील मामलों की निगरानी की। उन्होंने मई 2023 में हुए दंगों की जांच की निगरानी की और पूर्व ISI प्रमुख फैज़ हमीद के खिलाफ कोर्ट मार्शल की प्रक्रिया का नेतृत्व किया।

30 अप्रैल 2025 को, भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच, विशेष रूप से पहलगाम हमले के बाद, उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया। यह नियुक्ति पाकिस्तान की सुरक्षा रणनीति में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

पीएम मोदी का संदेश

वहीं मंगलवार को देश के शीर्ष रक्षा नेतृत्व के साथ हुई अहम बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया कि अब जवाब देने के लिए न तो समय तय किया जाएगा, न ही तरीका सीमित होगा। सशस्त्र बलों को "पूर्ण परिचालन स्वतंत्रता" दी गई है - यानी कार्रवाई कब, कहां और कैसे करनी है, इसका निर्णय अब पूरी तरह सैन्य कमान के विवेक पर छोड़ दिया गया है। यह बयान केवल एक कूटनीतिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि एक रणनीतिक चेतावनी भी है - भारत अब केवल प्रतिक्रिया नहीं देगा, बल्कि पहल करने से भी पीछे नहीं हटेगा। भारत ने साफ कर दिया है कि वो आतंकवाद का कमर तोड़ कर रहेगा।

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