Otzi Iceman: हिमममानव का तुर्की के किसानों से कनेक्शन! रहस्यमयी DNA से खुला राज
ओट्जी द आइसमैन के अवशेष पहली बार वर्ष 1991 पाए गए थे। इसकी खोज हाइकर्स द्वारा टायरोलियन आल्प्स में की गई थी। जहां पर्वत के गहरे दर्रे में ये अवशेष मिले। तब से आर्कियोलॉजिकल साइंस के क्षेत्र में ये बड़ा रहस्य बने हुए हैं।
Otzi Iceman: हिममानव बर्फीले पहाड़ों पर कैसे रहते थे, ये रहस्य आज तक नहीं सुलझा है। पिछले तीन दशकों इस पर साइंटिस्ट्स रिसर्च कर रहे हैं। हाल ही में किए गए एक डीएनए एनालिसिस में इसको लेकर बड़ा दावा किया गया है। ताजा अध्ययन ओट्जी को लेकर किया गया, जिससे पता चला है कि हिममानव को लेकर कई अहम रहस्य हैं।
हिममानव के आनुवंशिक संरचना के विश्लेषण से पता चला है कि 5,300 साल पुरानी ममी की त्वचा काली और आंखें काली थीं। इनके सिर पर बाल नहीं थे। जबकि अब तक ये दावा किया गया कि इनकी स्किन पीली होती थी, सिर पर बाल और दाढ़ी थी। डीएनए एनालिसिस में आगे ये भी बताया गया कि हिममानव का अंत कैसे हुआ और वो पहाड़ी दर्रों के बीच कैसे जीवन बिताते थे।

दरअसल, 5,000 से अधिक वर्ष पहले हिम मानव ओत्जी जीवित था। पीठ पर एक तीर से मारे जाने के बाद वो बर्फ में जम गया। ओत्जी को लेकर अब तक कई शोधकर्ताओं रिसर्च किया। सेल जीनोमिक्स जर्नल में बुधवार को प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, ओत्जी वर्तमान तुर्की के किसानों के वंशज थे और उनका सिर गंजा था और त्वचा का रंग शुरू में गहरा हरा था।
हिमामानव को रहस्य को नजदीकी से देखने हर साल हजारों लोग इटली के बोल्जानों पहुंचते हैं। जहां साउथ टायरॉल पुरातत्व संग्रहालय में एक विशेष कक्ष में हिममानव की ममी रखी गई है।
साइंस जर्नल सेल जीनोमिक्स में इस हफ्ते बुधवार को प्रकाशित शोध के सह-लेखक जिंक ने कहा, "ऐसा लगता है कि ममी की त्वचा का गहरा रंग आइसमैन के जीवनकाल के दौरान रीयल त्वाचा के रंग के लगभग समान है। यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि क्योंकि कई यूरोपीय लोगों की त्वचा का रंग आज के कई यूरोपीय लोगों की तुलना में अधिक गहरा पाया गया है।
बोलजानो के निजी रिसर्च सेंटर यूरैक रिसर्च में इंस्टीट्यूट फॉर ममी स्टडीज के प्रमुख अल्बर्ट जिंक ने कहा कि पहले यह माना जाता था कि ममीकरण प्रक्रिया के दौरान उनकी त्वचा का रंग काला पड़ गया है। लेकिन यूरोपीय किसानों की भी पहले त्वचा काली होती थी, जो समय के साथ जलवायु और किसानों के आहार में बदलाव के कारण थी। इसका कारणे था किॉ शिकारियों की तुलना में किसान अपने आहार में बहुत कम विटामिन डी का सेवन करते हैं।
अल्बर्ट जिंक ने कहा कि ऐसा लगता है कि हिममानव ने अभी भी काफी मात्रा में मांस खाया है। इस बात कि पुष्टि उसके पेट के विश्लेषण से भी हुई है, जिसमें आइबेक्स और हिरण के मांस की मौजूदगी पाई गई।












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