हवा के रास्ते में बहुत तेजी से फैलता है ओमिक्रॉन, फेफड़े में बहुत धीमा- नई स्टडी बढ़ा रही है चिंता
हॉन्ग कॉन्ग, 16 दिसंबर: ओमिक्रॉन वेरिएंट को कम खतरनाक मानकर कोताही बरतना कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ाई को कमजोर कर सकता है। एक नई स्टडी सामने आई है, जिसमें इस वेरिएंट के संबंध में कई नई बातें कही जा रही हैं, जो पहले के वेरिएंट या वुहान से आए कोरोना वायरस से बिल्कुल ही अलग है। इस स्टडी के मुताबिक कोविड-19 का यह वेरिएंट मूल कोरोना के मुकाबले लंग्स में 10 गुना धीमा बढ़ता है और अभी तक कम गंभीर बीमारी की जो बाते कही जा रही है, वह इसी के चलते हो सकता है। लेकिन, हवा के रास्ते में यह पिछले वेरिएंट के मुकाबले 70 गुना ज्यादा तेजी से वृद्धि करता है।

हवा के रास्ते में बहुत तेजी से फैलता है ओमिक्रॉन-स्टडी
ओमिक्रॉन वेरिएंट हवा के रास्ते में तेजी से फैलता है और फेफेड़ में बहुत ही धीमा। एक नई स्टडी में यह दावा किया गया है। हालांकि, शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन को और पुख्ता करने के लिए आगे भी शोध पर जोर दिया है और इस रिसर्च की पुष्टि होनी अभी बाकी है। लेकिन, यह बताया गया है कि ओमिक्रॉन हवा के रास्ते में बहुत ही तेजी से फैलता है, जबकि फेफड़े में इसकी वृद्धि की रफ्तार बहुत ही कम होती है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक ओमिक्रॉन वेरिएंट और कोरोना के बाकी वेरिएंट किस तरह से मल्टीप्लाई करते हैं, उसको समझकर ओमिक्रॉन वेरिएंट के प्रभाव का आकलन किया जा सकता है।
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डेल्टा के मुकाबले 70 गुना तेजी से बढ़ता है-स्टडी
शोधकर्ताओं का कहना है कि पहले के डेल्टा वेरिएंट के मुकाबले ओमिक्रॉन हवा के रास्ते में पड़ने वाले उत्तकों में खुद से 70 गुना ज्यादा तेजी से वृद्धि कर लेता है। हालांकि, उनका कहना है कि इसमें भी लोगों के हिसाब से अंतर हो सकता है। लेकिन, फेफड़े के उत्तकों में ओमिक्रॉन वेरिएंट कोरोना वायरस के मूल रूप से 10 गुना धीमा वृद्धि करता है। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि इसी की वजह से बीमारी कम गंभीर हो सकती है। हालांकि, इस शोध की अभी आधिकारिक तौर पर पब्लिकेशन के लिए पुष्टि नहीं की गई है और रिसर्च टीम की ओर से इसे जारी भी नहीं किया गया है।

'ओमिक्रॉन वेरिएंट से काफी खतरा होने की आशंका है'
हॉन्ग कॉन्ग यूनिवर्सिटी की ओर से जारी एक न्यूज रिलीज में इस स्टडी के लीडर डॉक्टर मिशैल चान ची-वाई ने कहा है, 'यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि इंसान में रोग की गंभीरता केवल वायरस के रेप्लिकेशन से निर्धारित नहीं होती है।' बल्कि प्रत्येक व्यक्ति में संक्रमण के प्रति उसके इम्यून रेस्पॉन्स से भी होती है, जो कि कई बार जान के लिए गंभीर खतरा साबित हो जाती है। उनके मुताबिक, 'कई और लोगों को संक्रमित करके, एक बहुत ही संक्रामक वायरस ज्यादा गंभीर बीमारी और मौत का कारण बन सकता है, भले ही वायरस खुद कम पैथोजेनिक हो। इसलिए, हमारे हालिया शोध को साथ जोड़कर देखें तो ओमिक्रॉन वेरिएंट वैक्सीन और पिछले संक्रमण से प्राप्त इम्यूनिटी से आंशिक रूप से बच सकता है, कुल मिलाकर ओमिक्रॉन वेरिएंट से काफी खतरा होने की आशंका है। '

बूस्टर डोज से कुछ लोगों को मिल सकती है मदद-वैज्ञानिक
शोधकर्ताओं ने कंप्यूटर मॉडल से ओमिक्रॉन वेरिएंट की स्पाइक प्रोटीन का जो विश्लेषण किया है, उसके अनुसार यह कोशिकाओं को बहुत ही कसकर जकड़ लेता है। रुटगर्स यूनिवर्सिटी, न्यू जर्सी के जोसेफ लुबिन करते हैं, ' ऐसा लगता है जैसे कोई जोड़ा अपनी उंगलियों को आपस में गूंथकर हाथ पकड़े हुए है।' लुबिन कहते हैं कि बूस्टर डोज से एंटीबॉडी का स्तर बढ़ता है, जिससे कमजोर इम्यूनिटी वालों को कुछ हद तक ज्यादा सुरक्षा मिल सकती है।












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