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कश्‍मीर पर अपनी रिपोर्ट का OHCHR ने किया बचाव, कश्‍मीर में मानवाधिकार हनन पर आधारित है रिपोर्ट

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    न्‍यूयॉर्क। यूनाइटेड नेशंस (यूएन) के मानवाधिकार उच्‍चायुक्‍त कार्यालय यानी ओएचसीएचआर ने जम्‍मू कश्‍मीर पर आई मानवाधिकार हनन की रिपोर्ट पर अपना बचाव किया है। बुधवार को इसकी ओर से बयान जारी किया गया। ओएचसीएचआर ने अपने बयान में कहा है, 'रिपोर्ट राजनीति से प्रेरित नहीं है' और इस रिपोर्ट को तैयार करने के पीछे दोनों देशों की मदद करना एकमात्र मकसद था। आपको बता दें कि जून में कश्‍मीर पर ओएचसीएचआर की एक रिपोर्ट में जम्‍मू कश्‍मीर और पीओके में जारी मानवाधिकार हनन की बात कही गई थी। भारत ने इस रिपोर्ट पर कड़ा ऐतराज जताया था और कहा था कि यह रिपोर्ट पूरी तरह से राजनीति की भावना से प्रेरित होकर तैयार की गई है।

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    निगरानी के बाद तैयार की है रिपोर्ट

    ओएचसीएचआर की ओर से कहा गया, 'यह रिपोर्ट निगरानी के बाद तैयार की गई है और वह भी तब जब भारत और पाकिस्‍तान की अथॉरिटीज की ओर से उन्‍हें कश्‍मीर पहुंचने से मना कर दिया गया था।' ऑफिस की ओर से कहा गया है कि जब से रिपोर्ट पब्लिश हुई है उसके बाद से भारत की तरफ से जो प्रतिक्रिया आई है उससे उन्‍हें काफी निराशा हुई है। भारत ने कहा था कि रिपोर्ट को तथ्‍यों की जांच किए बिना तैयार किया गया है और यह पूरी तरह से झूठी है। ओएचसीएचआर ने कहा है कि दोनों देशों की तरफ से एलओसी के दोनों तरफ हो रहे मानवाधिकार हनन से दुनिया का ध्‍यान हटाने की कोशिश की गई है। ओएचसीएचआर ने आगे कहा है कि यूएन ह्यूमन राइट्स ऑफिस को दुनिया में समर्थन हासिल है और स्‍वतंत्रता से काम करती है और इसके काम करने का अपना एक तरीका है।

    लश्‍कर और जैश को नहीं माना गया आतंकी संगठन

    19 जून को यूएनएचआरसी के कमिश्‍नर जैद राद अल हुसैन ने देशों से अपील की थी कि वे मानवाधिकार और इसके कानून की रक्षा करने के लिए काम करें। हुसैन ने यह बात उस समय कही थी जब वह स‍ीरिया, म्‍यांमार, बुरुंदी, निकारागुआ और भारत-पाकिस्‍तान में हो रहे मानवाधिकार पर बोल रहे थे। 13 जुलाई को यूएन के सेक्रेटरी जनरल एंटोनियो गुटारेशे ने भी इस बात का इशारा किया था कि वह रिपोर्ट में कश्‍मीर में जारी मानवाधिकार हनन की जो बात कही गई है, उसकी जांच कराएंगे। यूनाइटेड नेशंस (यूएन) की ओर से लश्‍कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्‍मद को आतंकी संगठन माना गया है जबकि ओएचसीएचआर की रिपोर्ट में 38 बार इन संगठनों के लिए 'आर्म्‍ड ग्रुप' यानी 'हथियारों से लैस संगठन' इस शब्‍द का प्रयोग किया गया है। वहीं पीओके को रिपोर्ट में 26 बार 'आजाद जम्‍मू कश्‍मीर' के तौर पर बताया गया है। वहीं लश्‍कर और जैश के आतंकी सरगनाओं को रिपोर्ट में सिर्फ 'लीडर' कहकर संबोधित किया गया है।

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    English summary
    The Office of the High Commissioner for Human Rights (OHCHR) has said that UN Human Rights report of Kashmir is not about the politics.

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