'पूरा हुआ हमले का उद्देश्य, ईरान को हुआ ज्यादा नुकसान', इजरायल PM नेतन्याहू का दावा, ईरान ने किया खंडन
Israel Iran War: इजरायल-ईरान के बीच काफी लंबे वक्त से तनाव बना हुआ है, जो अब युद्ध का रूप लेता दिखाई दे रहा है। इजराइल ने शनिवार 26 अक्टूबर को ईरान के हमलों का जवाब दिया और मिलिट्री ठिकानों को निशाना बनाकर हवाई हमला किया। इस हमले में ईरान सेना के चार जवान भी मारे गए थे। वहीं, अब इस हमले के बाद इजरायल पीएम बेंजामिन नेतन्याहू का बयान सामने आया है।
इजरायल पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान पर किए गए हवाई हमले को सफल बताया है। उन्होंने कहा कि इस हमले का जो भी उद्देश्य था वो पूरे हो गए हैं। हालांकि, ईरान ने इस हमले पर कहा कि उसे कुछ ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है, जिसके कारण नेतन्याहू ने उनके दावों का खंडन किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस ऑपरेशन ने इजरायल की सुरक्षा और भविष्य की रणनीति को मजबूत किया है।

नेतन्याहू ने कहा कि हमला ईरान के उन ठिकानों पर केंद्रित थ जो इजरायल की सुरक्षा के लिए सीधा खतरा बन रहे थे। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस हमले से मध्य पूर्व में अस्थिरता बढ़ सकती है। इन चिंताओं के बावजूद, नेतन्याहू ने जोर देकर कहा कि यह ऑपरेशन पूरी तरह से रक्षात्मक था।
उन्होंने विदेशी सहयोगियों को आश्वासन दिया कि इजरायल अपनी सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक उपाय करेगा। ईरान ने इस हमले की निंदा करते हुए इसे क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा बताया और इजरायल पर इस तरह की कार्रवाइयों के जरिए अस्थिरता को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।
ईरानी सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने स्थिति पर टिप्पणी करते हुए इजरायली हमले के प्रभाव का आकलन करने में सावधानी बरतने का आग्रह किया। ईरानी मीडिया के अनुसार, उन्होंने कहा,'इस दुष्ट कृत्य को बढ़ा-चढ़ाकर बताना गलत है, लेकिन ध्यान दें, इसे वास्तविकता से छोटा करके दिखाना भी गलत है, यह कहना कि 'यह कुछ खास नहीं था, यह बस हुआ'।'
यह ईरान के इस रुख को दर्शाता है कि घटना को कम करके नहीं आंका जाना चाहिए या बढ़ा-चढ़ाकर नहीं बताया जाना चाहिए। विशेषज्ञों की मानें तो यह हालिया घटनाक्रम को इजरायल और ईरान के बीच चल रहे रणनीतिक संघर्ष का हिस्सा मानते हैं। दोनों देशों के बीच कई बार टकराव के बाद तनाव की स्थिति बनी रही है।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने हमलों को "अंतर्राष्ट्रीय कानून का घोर उल्लंघन" करार दिया और क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए अपनी जिम्मेदारी को स्वीकार करते हुए बाहरी खतरों से खुद की रक्षा करने के अपने अधिकार और दायित्व पर जोर दिया।












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