उत्तर कोरिया ने जारी की इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल तस्वीरें, अमेरिका की नींद उड़ी

उत्तर कोरिया का नया मिसाइल पहले के ह्वासोंग-14 ICBM से बड़ा दिख रहा है।

नई दिल्ली। उत्तर कोरिया ने अपने नए अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल ह्वासोंग-15 की तस्वीरें को जारी की है। दावा किया गया है कि यह बलिस्टिक मिसाइल अमेरिका में किसी भी टारगेट तक पहुंचने में सक्षम है। मिसाइल की तस्वीरें उत्तर कोरिया की सत्ताधारी पार्टी के अखबार में प्रकाशित हुई हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक उत्तर कोरिया का नया मिसाइल पहले से बड़ा और तकनीक के मामले में आधुनिक है। इसके लिए उत्तर कोरिया ने अपने ही यहां बनाए गए मोबाइल लॉन्चर का इस्तेमाल किया है।

उत्तर कोरिया ने जारी की आईसीबीएम मिसाइल की तस्वीरें

उत्तर कोरिया ने जारी की आईसीबीएम मिसाइल की तस्वीरें

आईसीबीएम मिसाइल का निर्माण प्रमुख तौर पर परमाणु हथियारों को ध्यान में रखकर किया जाता है लेकिन यह अपने साथ रासायनिक और जैविक हथियारों को भी ले जा सकती है। उत्तर कोरिया का नया मिसाइल पहले के ह्वासोंग-14 ICBM से बड़ा दिख रहा है। उत्तर कोरिया ने ह्वासोंग-14 का इस साल जुलाई में 2 बार परीक्षण किया था। मिसाइल की तस्वीरों के ऑनलाइन पब्लिश होने के ठीक बाद कैलिफॉर्निया के सेंटर फॉर नॉनप्रोलिफरेशन स्टडीज के रिसर्चर माइकल डट्समैन ने ट्वीट किया, 'यह बहुत बड़ा मिसाइल है...और मेरा मतलब यह नहीं है कि यह सिर्फ नॉर्थ कोरिया के लिहाज से बड़ा है। सिर्फ कुछ देश ही इस आकार का मिसाइल बना सकते हैं और उत्तर कोरिया इस क्लब में शामिल हो चुका है।'

अमेरिका को भेदने में सक्षम होने का दावा

अमेरिका को भेदने में सक्षम होने का दावा

उत्तर कोरिया दावा करता है कि ह्वासोंग-15 'सुपर हैवी' न्यूक्लियर पेलोड को अमेरिका के भीतर किसी भी लक्ष्य तक पहुंचाने में सक्षम है। तस्वीर को देखकर भी लग रहा है कि मिसाइल काफी बड़ा है। लेकिन यहां यह बात खासा महत्वपूर्ण है कि लोड जितना ज्यादा होगा, मिसाइल का रेंज उतना ही छोटा होगा। जाने-माने मिसाइल विशेषज्ञ माइकल एलमैन ने कहा कि उत्तर कोरिया के मिसाइल को अमेरिका तक मार करने के लिए जरूरी है कि उसपर लगा न्यूक्लियर बम 350 किलोग्राम से ज्यादा वजन का न हो। हालांकि विशेषज्ञों ने मिसाइल की क्षमता को लेकर संदेह जताया है कि यह पश्चिमी तट तक शायद ही पहुंच सके।

आईसीबीएम का निर्माण पहली बार द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान किया गया

आईसीबीएम का निर्माण पहली बार द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान किया गया

आईसीबीएम का निर्माण पहली बार द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान किया गया।आईसीबीएम एक साथ कई अलग-अलग न्यूक्लियर वारहेड्स ले जा सकती है, इसका मतलब है कि आईसीबीएम एक साथ कई लक्ष्यों को भेद सकती है। आईसीबीएम मिसाइल की खासियत है कि यह लगातार अपनी रफ्तार एवं ऊंचाई बदलती रहती है और इसकी सर्वाधिक रफ्तार एक सेकेंड में 6-7 किलोमीटर तक होती है।न्यूयार्क से मॉस्को की दूरी 7500 किलोमीटर है और एक आईसीबीएम यदि 6.5 किलोमीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार से उड़ान भरे तो उसे यह दूरी पूरी करने में 20 मिनट का समय लगेगा।

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