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यमन में क्यों टल गई निमिषा प्रिया की फांसी? मृतक के परिवार ने नहीं दी माफी, ब्लड मनी पर भी असहमति

Nimisha Priya Execution Postponed Reason: केरल की नर्स निमिषा प्रिया (38 वर्षीय) की यमन में फांसी की सजा को आखिरी क्षणों में स्थगित कर दिया गया है। यह जानकारी मंगलवार, 15 जुलाई 2025 को 'सेव निमिषा प्रिया इंटरनेशनल एक्शन काउंसिल' के सदस्य सैमुअल जेरोम भास्करन ने दी, जो 1999 से यमन में रह रहे हैं। हालांकि, मृतक तलाल अब्दो महदी के परिवार ने अब तक निमिषा को माफी देने या ब्लड मनी (दियाह) स्वीकार करने से इनकार कर दिया है, जिससे उनकी जान बचाने की उम्मीदें अब भी अधर में हैं।

क्यों टली फांसी?

निमिषा को 16 जुलाई 2025 को सना सेंट्रल जेल में फांसी दी जानी थी, लेकिन आखिरी समय में वकालत समूहों, धार्मिक नेताओं और अनौपचारिक मध्यस्थों के हस्तक्षेप के कारण फांसी टाल दी गई। भारत के प्रमुख धार्मिक नेता और केरल के कंथापुरम एपी के ग्रैंड मुफ्ती अबूबकर मुसलियार ने इस मामले में सीधा हस्तक्षेप किया। उनके प्रतिनिधि मृतक तलाल के परिवार, विशेष रूप से उनके भाई, से बातचीत कर रहे हैं। यह पहली बार है जब तलाल का कोई करीबी रिश्तेदार माफी या ब्लड मनी पर चर्चा के लिए सामने आया है।

Nimisha Priya Hanging Postponed Reason

शरिया कानून के तहत, पीड़ित का परिवार दोषी को बिना शर्त माफ कर सकता है या ब्लड मनी के बदले सजा माफ कर सकता है। निमिषा के परिवार और समर्थकों ने तलाल के परिवार को 10 लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग 8.5 करोड़ रुपये) की पेशकश की है, लेकिन अभी तक कोई सहमति नहीं बनी है।

Nimisha Priya Case: निमिषा प्रिया का मामला: क्या हुआ था?

केरल के पलक्कड़ जिले की रहने वाली निमिषा प्रिया 2008 में नर्सिंग के लिए यमन गई थीं। 2011 में उसकी शादी टॉमी थॉमस से हुई, और उनकी एक बेटी भी है। 2014 में यमन में कलह शुरू होने पर टॉमी और उनकी बेटी भारत लौट आए, लेकिन निमिषा यमन में रहीं। 2015 में, उन्होंने यमनी नागरिक तलाल अब्दो महदी के साथ मिलकर सना में एक क्लिनिक शुरू किया। यमनी कानून के अनुसार, विदेशियों को व्यवसाय शुरू करने के लिए स्थानीय साझेदार की जरूरत होती है।

निमिषा ने आरोप लगाया कि तलाल ने उनके पासपोर्ट को जब्त कर लिया, उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया, और क्लिनिक की कमाई हड़प ली। 2017 में, अपने दस्तावेज वापस पाने के लिए निमिषा ने तलाल को बेहोशी का इंजेक्शन दिया, लेकिन ओवरडोज के कारण उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद, निमिषा और उनकी सहयोगी हनन ने शव को टुकड़ों में काटकर पानी की टंकी में छिपा दिया। निमिषा को यमन-सऊदी सीमा पर गिरफ्तार किया गया, और 2018 में यमनी कोर्ट ने उन्हें फांसी की सजा सुनाई। 2023 में उनकी अपील यमन सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी, और हाल ही में यमन के राष्ट्रपति रशद अल-अलीमी ने सजा को मंजूरी दी थी।

Blood Money (ब्लड मनी): आखिरी उम्मीद

यमन में शरिया कानून के तहत 'दियाह' या ब्लड मनी का प्रावधान है, जिसके जरिए पीड़ित का परिवार दोषी को माफ कर सकता है। निमिषा के परिवार और समर्थकों ने तलाल के परिवार से बातचीत शुरू करने के लिए भारतीय दूतावास के जरिए 40,000 डॉलर का भुगतान किया है, और 10 लाख डॉलर की पेशकश की है। हालांकि, तलाल का परिवार अभी तक इस राशि को स्वीकार करने या माफी देने को तैयार नहीं है।

भारत सरकार की क्या भूमिका और चुनौतियां?

भारत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि यमन में हूती विद्रोहियों के नियंत्रण और भारत के साथ औपचारिक राजनयिक संबंधों की कमी के कारण हस्तक्षेप करना मुश्किल है। यमन 2014 से गृहयुद्ध की स्थिति में है, और हूती प्रशासन को भारत मान्यता नहीं देता। इसके बावजूद, भारत सरकार ईरान के जरिए हूती नेताओं से संपर्क करने की कोशिश कर रही है, क्योंकि ईरान हूतियों का समर्थन करता है। ईरानी अधिकारियों ने मानवीय आधार पर मदद का भरोसा दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने 14 जुलाई 2025 को निमिषा की याचिका पर सुनवाई की, जिसमें केंद्र सरकार से राजनयिक हस्तक्षेप की मांग की गई थी। हालांकि, केंद्र ने कोर्ट में कहा कि सभी संभव प्रयास किए जा चुके हैं, लेकिन यमन की स्थिति और आरोपों की गंभीरता के कारण सफलता नहीं मिली।

निमिषा की मां प्रेमा यमन में? ब्लड मनी के लिए जुटाया गया फंड?

निमिषा की मां प्रेमा कुमारी पिछले साल से यमन में हैं और तलाल के परिवार से माफी मांगने की कोशिश कर रही हैं। उनके पति टॉमी थॉमस और 12 वर्षीय बेटी आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं, क्योंकि परिवार पर क्लिनिक शुरू करने के लिए लिया गया 60 लाख रुपये का कर्ज है। 'सेव निमिषा प्रिया इंटरनेशनल एक्शन काउंसिल' ब्लड मनी के लिए फंड जुटाने और बातचीत में सक्रिय है। केरल के मुख्यमंत्री पी. विजयन ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की अपील की है।

क्या है आगे का रास्ता?

यमन की जनजातीय संरचना और हूती प्रशासन की जटिल राजनीतिक स्थिति इस मामले को और मुश्किल बना रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि ब्लड मनी के जरिए माफी ही निमिषा को बचाने का आखिरी रास्ता है। अगर तलाल का परिवार माफी देने को तैयार होता है, तो फांसी के आखिरी क्षणों में भी सजा टाली जा सकती है।

निमिषा के परिवार और समर्थकों का कहना है कि उन्होंने आत्मरक्षा में कदम उठाया था, और उनका इरादा हत्या का नहीं था। उनके गांववाले भी हैरान हैं कि निमिषा जैसी शांत स्वभाव की महिला ऐसा अपराध कर सकती है। फिलहाल, सभी की निगाहें तलाल के परिवार की प्रतिक्रिया और भारत सरकार के राजनयिक प्रयासों पर टिकी हैं।

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