वैज्ञानिकों को मिला 'जादुई मेंढक', खुद को बना ले रहा पारदर्शी, क्या बचाएगा इंसानों की जान?
Glass Frogs को लेकर एक नई स्टडी हुई। जिसमें पता चला कि कैसे ये मेंढक अपने ब्लड को कंट्रोल करके खुद को शिकारियों से बचा रहा।

भारत के ज्यादातर इलाकों में आपको मेंढक देखने को मिल जाएंगे। ये उभयचर जीव हैं, जो पानी और जमीन दोनों जगहों पर मिलते हैं। ये अपनी स्किन और आवाज की वजह से आपकी नजर में तुरंत आ जाएंगे, लेकिन एक मेंढक ऐसा भी है, जो बड़ा ही जादुई टाइप का है। वो आपके सामने बैठा रहेगा तब भी आप उसे नहीं देख पाएंगे। (फोटो- यूट्यूब वीडियो का स्क्रीनशॉट)

कहां पाया जाता है ये?
इस मेंढक का नाम ग्लास फ्रॉग है, इसे ट्रांसपैरेंट फ्रॉग और सी-थ्रू फ्रॉग भी कहते हैं। कोस्टो रिका के वर्षावनों में पाए जाने वाले ये मेंढक इन दिनों चर्चा का विषय बने हुए हैं। इसकी वजह है इनका पारदर्शी शरीर। ये शिकारियों से खुद को बचाने के लिए अपने शरीर को ऐसे बदलते हैं कि हर कोई धोखा खा जाए।

शिकारियों से बचने का जुगाड़
वैज्ञानिक के मुताबिक ग्लास फ्रॉग का शरीर हरे रंगा का होता है। जिस पर सिल्वर कलर के चकत्ते होते हैं, लेकिन ये वक्त-वक्त पर अपने शरीर को पारदर्शी बना देते हैं। ऐसे में अगर गर्भवती मादा मेंढक आपको दिखेगी, तो उसे अंदर मौजूद अंडे भी नजर आ जाएंगे। आमतौर पर ये सोते वक्त शरीर को पारदर्शी बनाते हैं, ताकि शिकारी उन पर हमला ना कर सकें।

खून को लीवर में कर लेते हैं जमा
वैज्ञानिकों ने जब इस मेंढक की विस्तार से जांच की तो पता चला कि जब ये सोता है, तो अपने शरीर का सारा खून लिवर में जमा कर लेता है। जिस वजह से ये ट्रांसपैरेंट हो जाता है। जगने पर ये फिर से खून को पूरे शरीर में भेज देता है। वैसे तो शरीर में ऑक्सीजन की सप्लाई में खून की भूमिका अहम होती है, ऐसे में ये बड़ा सवाल है कि खून को एक जगह इकट्ठा करके ये कैसे जिंदा रह लेते हैं?

लीवर में करता है फिल्टर
इस पर अमेरिकन म्यूजियम ऑफ नेचुर हिस्ट्री की जेसी डेलिया और ड्यूक यूनिवर्सिटी के डॉ. कार्लोस ताबोआडा ने काफी रिसर्च की है। उन्होंने कई ग्लास फ्रॉग को लिया। उसमें से कुछ को एनीथिसिया दिया, जबकि कुछ को होश में रखा। इसके बाद उनकी हाईटेक कैमरों से तस्वीरें ली गईं। उन्होंने पाया कि ये मेंढक 89 प्रतिशत खून को लीवर में जमा करके उसे फिल्टर करता है।

कैसे बचाएगा इंसानों की जान?
डॉ. कार्लोस के मुताबिक इंसान या अन्य जीवों में जब खून एक जगह इकट्ठा होता है, तो ब्लड क्लाटिंग शुरू हो जाती है, जिससे जीव की जान जा सकती है, लेकिन ग्लास मेंढक के अंदर ब्लड क्लाटिंग नहीं हो रही। ऐसा लगता है कि ये किसी खास अंग से ऑक्सीजन को मैनेज कर रहा, इसके अलावा कोई खास केमिकल ब्लड क्लाटिंग को रोक रहा। अगर इस केमिकल का पता चल गया तो हर साल लाखों लोगों की जान बचाई जा सकती है। एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर में हर साल एक लाख लोग क्लाटिंग की वजह से मौत के मुंह में जा रहे हैं। इससे बचने के लिए दवाएं तो हैं, लेकिन ये केमिकल ज्यादा करगर होगा।












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