अगले महीने चीन की यात्रा पर जाएंगे नेपाल के पीएम 'प्रचंड', जून में पहले विदेश दौरे पर आ चुके हैं भारत
नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' अगले महीने के आखिर में चीन की यात्रा पर जा रहे हैं। नेपाल के विदेश मंत्री नारायण प्रसाद सऊद ने रविवार को काठमांडू में यह जानकारी दी है। उनके मुताबिक प्रचंड की इस यात्रा का मकसद उसके दोनों पड़ोसियों- चीन और नेपाल के बीच संतुलन बनाए रखना है।
प्रचंड ने पिछले साल दिसंबर में तीसरी बा नेपाल की सत्ता संभाली थी, उसके बाद उनकी यह दूसरी विदेश यात्रा है। 68 वर्षीय प्रचंड नेपाल के कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल-माओइस्ट सेंटर (सीपीएन-एमसी) के नेता हैं। इस बार नेपाल के प्रधानमंत्री बनने के बाद वह जून में भारत यात्रा पर आए थे, जो कि उनके इस मौजूदा कार्यकाल की पहली विदेश यात्रा थी।

सितंबर के तीसरे या चौथे हफ्ते में चीन जाएंगे 'प्रचंड'
नेपाली विदेश मंत्री सऊद ने कहा है कि उनके प्रधानमंत्री सितंबर के तीसरे या चौथ हफ्ते में उत्तरी पड़ोसी मुल्क की आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे। उन्होंने कहा कि 'प्रधानमंत्री की आने वाली चीन यात्रा के लिए सारी तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं।'
'विदेशी रिश्ते विचारधारा और मनोवैज्ञानिक आधार पर नहीं होने चाहिए'
नेपाली विदेश मंत्री के मुताबिक उनकी मौजूदा 'सरकार मित्र देशों, खासकर पड़ोसियों के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है.....।' उन्होंने कहा कि 'हमारे उत्तरी पड़ोसी से भी अच्छे संबंध हैं।' उन्होंने एक महत्वपूर्ण बात ये कही है कि विदेशी रिश्ते विचारधारा और मनोवैज्ञानिक आधार पर नहीं होने चाहिए।
हमारी सरकार की विदेश नीति स्पष्ट- नेपाली विदेश मंत्री
उनका कहना है कि विदेशी संबंध राष्ट्रीय गरिमा को बढ़ाने, राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने और राष्ट्र हित और आपसी फायदे को ध्यान में रखते हुए होना चाहिए। उन्होंने कहा है कि उनकी सरकार विदेश नीति को लेकर स्पष्ट है।
प्रचंड की भारत यात्रा सफल और फलदायी थी-नेपाल
नेपाली पीएम की भारत यात्रा की याद दिलाते हुए वे बोले कि वह सफल और फलदायी यात्रा थी। उन्होंने कहा, 'अगर अतीत में तनाव रहा है, तो हम मित्र देशों के साथ अपने रिश्तों में संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।' नेपाल के वरिष्ठ माओवादी नेता की उनकी चीन यात्रा को भारत और चीन के साथ उसके रिश्तों में तालमेल बिठाए रखने की कोशिश मानी जा रही है।
भारत यात्रा के दौरान प्रचंड ने दोनों देशों के साथ सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रिश्ते को उभारने की कोशिश की थी तो उसके लिए चीन की अहमियत इसलिए है, क्योंकि वह वहां पर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है। (इनपुट-पीटीआई)
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