Nepal: रामचंद्र पौड्याल का राष्ट्रपति बनना लगभग तय, वामपंथी पार्टियों के विवाद में कांग्रेस ने किया खेल
पार्टी सूत्रों के मुताबिक रामचंद्र पौडेल को आठ राजनीतिक दलों ने समर्थन देने का फैसला किया है। नेपाली कांग्रेस के नेता कृष्ण प्रसाद सितौला ने कहा है कि राम चंद्र पौडेल की जीत लगभग तय है।

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नेपाल में नेपाली कांग्रेस ने राष्ट्रपति चुनाव में वरिष्ठ नेता राम चंद्र पौडेल को मैदान में उतारने का फैसला किया है। रामचंद्र पौडेल पार्टी के बेहद वरिष्ठ नेता है। उन्हें 8 दलों के नए गठबंधन का समर्थन प्राप्त है। नेपाली कांग्रेस के नेता कृष्ण प्रसाद सितौला ने कहा है कि अध्यक्ष पद पर पार्टी के वरिष्ठ नेता राम चंद्र पौडेल की जीत सुनिश्चित है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने सर्वसम्मति से नए राष्ट्रपति पद के लिए पौडेल की उम्मीदवारी का समर्थन किया है।
8 दलों का मिला समर्थन
पार्टी सूत्रों के मुताबिक रामचंद्र पौडेल को आठ राजनीतिक दलों- नेपाली कांग्रेस, सीपीएन- माओवादी केंद्र, सीपीएन-यूनिफाइड सोशलिस्ट, राष्ट्रीय जनता पार्टी, लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनमोर्चा, नागरिक उन्मुक्ति पार्टी और जनमत पार्टी ने एक संयुक्त बैठक में नेपाली कांग्रेस के उम्मीदवार को राष्ट्रपति पद के लिए वोट देने का फैसला किया है।
9 मार्च को होगा मतदान
सभी दलों ने शुक्रवार को संयुक्त बैठक में नेपाली कांग्रेस के उम्मीदवार को राष्ट्रपति पद के लिए वोट देने का फैसला किया। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो 78 वर्षीय पौड्याल का अगला राष्ट्रपति बनना लगभग तय है। वह बिद्या देवी भंडारी की जगह लेंगे। राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवारों को 25 फरवरी को अपना नामांकन दाखिल करना होगा और मतदान नौ मार्च को होगा।
राष्ट्रपति पद देने से मुकरे पीएम दहल
आपको बता दें कि नेपाल में नई सरकार बनने के बाद से ही राष्ट्रपति के नाम पर प्रधानमंत्री दहल की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) और पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) के बीच मतभेद लगातार बने हुए थे। दहल अगले राष्ट्रपति को लेकर नए सिरे से आम सहमति तैयार करने पर जोर दे रहे थे, जबकि यूएमएल उनसे पिछले 25 दिसंबर को बनी सहमति पर कायम रहने को कह रही थी। 25 दिसंबर को नया सत्ताधारी गठबंधन बना था। तब तय हुआ था कि राष्ट्रपति का पद यूएमएल को मिलेगा। हालांकि प्रधानमंत्री दहल अपना हित साधने के बाद इस करार से मुकर गए। इसका फायदा विपक्षी पार्टी नेपाली कांग्रेस ने उठाया और वह 8 दलों के गठबंधन से अपने उम्मीदवार को उतारने में सफल हो गई है।












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