नेपाल की संसद ने पारित किया पहला नागरिकता संशोधन विधेयक, भारत के लोग क्यों हुए निराश?
काठमांडू, 14 जुलाईः नेपाल की संसद ने बुधवार को देश का पहला नागरिकता संशोधन विधेयक पारित कर दिया। हालांकि राज्यसभा में इस पर चर्चा होनी बाकी है। इस पर दो साल से अधिक समय से चर्चा चल रही थी क्योंकि राजनीतिक दल इस पर आम सहमति बनाने में विफल रहे थे। हालांकि राजनीतिक गतिरोध के बावजूद नेपाल की संसद में यह बिल पारित कर दिया गया। इस बिल पर 2020 से ही प्रतिनिधि सभा में चर्चा में चर्चा चल रही थी, लेकिन कई राजनीतिक दल इसका समर्थन करने से बच रहे थे।

नागरिकता हासिल करने में लगेंगे 7 साल
इसका सबसे बड़ा कारण यह था कि नेपाल के पुरुषों से शादी करने वाली विदेशी महिलाओं को अब नेपाल की नागरिकता हासिल करने के लिए 7 सालों का इंतजार करना होगा। नेपाल के सीमावर्ती इलाके से लगे यूपी-बिहार के भारतीय लोगों पर इस बिल का काफी प्रभाव पड़ेगा। दरअसल नेपाल और भारत के बीच बेटी-रोटी का रिश्ता है। दोनों ही देशों के लोगों का आपस में वैवाहिक संबंधों का सदियों पुराना इतिहास है। ऐसे में भारतीय बेटियों को नेपाल में शादी करने के बाद वहां की नागरिकता हासिल करने के लिए 7 सालों का इंतजार करना पड़ेगा।

गृहमंत्री बाल कृष्ण खंड ने पेश किया बिल
बुधवार को संसद के निचले सदन या प्रतिनिधि सभा की बैठक में गृहमंत्री बाल कृष्ण खंड ने सांसदों के सामने नेपाल का पहला नागरिकता संशोधन विधेयक 2022 पेश किया और कहा कि नेपाल नागरिकता अधिनियम 2006 में संशोधन के लिए विधेयक संसद में पेश किया गया है। उन्होंने कहा, "ऐसे हजारों लोग हैं जो नागरिकता प्रमाण पत्र से वंचित हैं, हालांकि उनके माता-पिता नेपाल के नागरिक हैं। नागरिकता प्रमाण पत्र की कमी उन्हें शिक्षा और अन्य सुविधाओं से वंचित कर रही थी। इन सब चीजों को देखते हुए मैं नए बिल का समर्थन करने और आगे बढ़ने के लिए एक वातावरण बनाने में मदद करने की अपील करता हूं।"

अगले सप्ताह राज्यसभा में पेश होगा बिल
खंड ने विश्वास जताया कि नया विधेयक गुरुवार को संसद के उच्च सदन या नेशनल असेंबली में पेश किया जाएगा। इस दौरान खंडवार विचार-विमर्श भी होगा। बीते सप्ताह, मुख्य विपक्षी सीपीएन-यूएमएल सांसदों द्वारा इसके प्रस्तावों का विरोध करने के बाद, नेपाल सरकार ने प्रतिनिधि सभा से नागरिकता विधेयक वापस ले लिया था। 2018 में तत्कालीन केपी शर्मा ओली सरकार ने संसद सचिवालय में बिल दर्ज कराया था।

प्रतिनिधि सभा से बिल हुआ था वापस
गौरतलब है कि बीते सप्ताह मुख्य विपक्षी पार्टी सीपीएन-यूएमएल के सांसदों के विरोध के बाद नेपाल की सरकार ने प्रतिनिध सभा से नागरिकता कानून संशोधन बिल वापस ले लिया था। भारत से आकर नेपाल में बसे मधेशी समुदाय के लोग शुरुआत से ही इस संशोधन विधेयक का विरोध कर रहे थे। एक समय इसके खिलाफ नेपाल में जोरदार आंदोलन हुआ था, जिसके बाद सरकार ने विधेयक को ठंडे बस्ते में डाल दिया था। लेकिन अचानक इस बिल के पास होने से मधेशी समुदाय में घोर निराशा का माहौल है। इस बिल के पारित होने पर नेपाल से लगे भारतीय क्षेत्रों में वैवाहिक रिश्ता बनाने वाले मधेसी नेपाली परिवारों को भारी दिक्कत होती।
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