कोरोना में एक गलत दवा के इस्तेमाल से 17 हजार लोगों की मौत, ट्रम्प ने चमत्कारी बताकर दी थी खाने की सलाह
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने COVID-19 को ठीक करने के लिए एक दवा का प्रचार किया था। अब उस दवा को 17,000 लोगों की मौत से जोड़ा जा रहा है। एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि इस दवा के सेवन से 6 देशों में हजारों लोग मारे गए।
यह रिपोर्ट फ्रेंच रिसर्चर्स की स्टडी के हवाले से सामने आई है। कोविड महामारी के दौर में डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकियों से हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन (HCQ) लेने की अपील की थी। ये एक मलेरियारोधी दवा है। इस दवा का उपयोग अक्सर गठिया और ल्यूपस को ठीक करने के लिए भी किया जाता है।

21 मार्च 2020 को डोनाल्ड ट्रंप ने ट्वीट कर HCQ को चमत्कारी बताते हुए कहा था कि ये एक चमत्कारी दवा है और वह कोरोना से बचने के लिए इसका सेवन कर रहे हैं। उन्होंने लोगों से भी इसका सेवन करने की सलाह दी थी और दावा किया था कि इससे किसी की जान नहीं जाएगी।
कोरोना वायरस फैलने के बाद वैज्ञानिकों ने भी सुझाव दिया कि HCQ घातक वायरस के इलाज में प्रभावी हो सकता है। 28 मार्च, 2020 को, खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने आपातकालीन उपयोग प्राधिकरण के लिए दवा को मंजूरी दे दी और नैदानिक परीक्षण शुरू कर दिया।
एक वैज्ञानिक ने भी HCQ को 'जादुई गोली' बताते हुए इसका इस्तेमाल करने की सलाह दी थी। इसके बाद ट्रंप ने कहा कि एक संक्रमित महिला ने इसका सेवन किया था और इससे उसे बहुत फायदा पहुंचा। ट्रंप ने FDA को इमरजेंसी में इस दवा के इस्तेमाल को मंजूरी देने के लिए तारीफ भी की थी।
हालांकि, जून 2020 में, FDA ने दवा के आपातकालीन इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। FDA ने इसके लिए न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन सहित कई अन्य अध्ययनों का हवाला दिया था। स्टडी में पाया गया था कि HCQ का कोविड पर कोई लाभ नहीं होता है। उल्टे इसके सेवन से मौत का जोखिम काफी बढ़ जाता है। इसके बाद FDA ने 15 जून को अपना पुरानी सलाह को रद्द कर दिया।
उस वक्त कोरोना की कोई दवा न होने की वजह से अधिकांश देशों में डॉक्टर मरीजों को HCQ इस्तेमाल करने के लिए कह रहे थे। अब फ्रांसीसी शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक नए अध्ययन में पाया गया है कि COVID की पहली लहर के दौरान मार्च से जुलाई 2020 तक हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन का इस्तेमाल करने वाले मरीज और बीमार हो गए। इन मरीजों का दिल और मसल्स कमजोर हो गया था।
बायोमेडिसिन एंड फार्माकोथेरेपी के फरवरी अंक में प्रकाशित शोध से पता चलता है कि मौतों की संख्या में वृद्धि हृदय और मांसपेशियों की कमजोरी जैसे दुष्प्रभावों के कारण हुई। जिन देशों का अध्ययन किया गया उनमें अमेरिका, तुर्की, बेल्जियम, फ्रांस, स्पेन और इटली शामिल थे।
रिपोर्ट में बताया गया है कि सबसे ज्यादा 12,739 मौतें अमेरिका में हुई। इसके बाद 1,895 मौतें स्पेन में, इटली में 1,822 मौतें, बेल्जियम में 240 मौतें, फ्रांस में 199 मौतें और तुर्की में 95 लोगों की मौत हुई।












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