प्रधानमंत्री की कुर्सी से जेल यात्रा और अब घर वापसी... पुरानी गलतियों को सुधारकर किंग बन पाएंगे नवाज शरीफ?
Nawaz Sharif News: पाकिस्तान लौटने पर नवाज़ शरीफ का अच्छा स्वागत किया गया, जैसा उम्मीद खुद नवाज़ शरीफ ने और उनकी पार्टी पीएमएल-एन ने लगा रखी थी। शनिवार शाम लाहौर के ग्रेटर इकबाल पार्क में नवाज शरीफ के लिए समर्थकों की भारी भीड़ जमा थी, जिसे नवाज़ शरीफ ने काफी ऊर्जा के साथ संबोधित किया और कार्यकर्ताओं में जोश भरने की कोशिश की।
मंच पर शुरूआत में नवाज़ शरीफ का चेहरा भावहीन लग रहा था, लेकिन फिर बेटी मरियम नवाज जब पहुंची, तो उन्होंने अपनी बेटी को गले लगाया और फिर दोनों बाप-बेटी की भावनाएं छलक पड़ीं। इसके बाद नवाज़ शरीफ के चेहरे का भाव बदल गया था और बार-बार ऐसा लग रहा था, कि नवाज शरीफ वतन वापसी के बाद अपनी भावनाओं को काबू में रख नहीं पा रहे हैं और बड़ी मुश्किल से अपने आंसुओं को समेट पा रहे हैं।

उन्होंने एक कविता पढ़ी, जिसका भाव यही था, कि उन्हें जितना कष्ट दिया गया, जितनी परीक्षाएं उनकी ली गईं, अगर वो लोगों को बताना शुरू करें, तो दुनिया भर में उनके आंसुओं की बाढ़ आ जाएगी। तो क्या नवाज शरीफ उन 'गलतियों' दोहराने से बचेंगे, जिनके लिए उन्हें 'सजा' दी गई? आइये समझते हैं नवाज शरीफ के कैरियर की बड़ी 'गलतियां' क्या रही हैं?
नवाज़ शरीफ के कैरियर की गलतियां
पीएमएल-एन सुप्रीमो नवाज़ शरीफ को 2013 के आम चुनाव में विजयी वापसी के साथ तीसरी बार चुना गया था।
हालांकि, प्रधान मंत्री के रूप में उनका अंतिम कार्यकाल उथल-पुथल से भरा हुआ था, जो तत्कालीन विपक्ष के नेतृत्व में इस्लामाबाद की महीनों तक चली नाकेबंदी से शुरू हुआ और 2017 में अपने बेटे की कंपनी से 'लावारिस वेतन' हासिल के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा अयोग्य ठहराए जाने के साथ समाप्त हुआ।
इसके तुरंत बाद नवाज़ शरीफ को अपना इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा।
ये वो वजह थी, जो लोगों को कहा गया, मगर अंदर की बात ये थी, कि तत्कालीन आर्मी चीफ क़मर जावेद बाजवा नवाज शरीफ को नापसंद कर रहे। लिहाजा, नवाज शरीप को अगर आगे अपनी राजनीति को कायम रखना है, तो उन्हें भविष्य में पाकिस्तान के सेना प्रमुखों से तकरार से बचना होगा।

6 जुलाई 2018 को नवाज शरीफ को एवेनफील्ड मामले में दोषी ठहराया गया था और उनपर 1.3 अरब रुपये के साथ 10 साल जेल की सजा सुनाई गईथी। पूर्व प्रधान मंत्री को उनकी गैर-मौजूदगी में दोषी ठहराया गया था क्योंकि वह उस समय अपनी बीमार पत्नी की देखभाल के लिए लंदन में थे।
13 जुलाई 2018: नवाज़ शरीफ और उनकी बेटी, जो अब पीएमएल-एन की उपाध्यक्ष और मुख्य आयोजक मरियम नवाज हैं, उन्हें भी लंदन से लाहौर पहुंचने पर गिरफ्तार कर लिया गया।
नवाज़ शरीफ शनिवार शाम लाहौर में जमा भीड़ को यह याद दिलाने की कोशिश की, कि उन्हें एक बड़ी व्यक्तिगत कीमत चुकानी पड़ी है। उन्होंने कहा, "कुछ घाव ऐसे होते हैं जो कभी नहीं भरते।" जेल में रहते हुए उन्होंने अपनी पत्नी को खो दिया था और वो अपनी पत्नी के अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हो पाए।
उन्हें अपनी मां को दफनान से रोक दिया गया। उन्होंने उस वक्त को याद करते हुए कहा, "जब भी मैं विदेश से घर लौटता था, तो वो दोनों मेरे दरवाजे पर मेरा स्वागत करते थे।" लेकिन, "मैंने उन्हें राजनीति के कारण खो दिया।"

नवाज़ शरीफ ने एक बार फिर भीड़ से यह पूछने की कोशिश की, कि उन्हें क्यों निकाला गया? लेकिन, इस बार उन्होंने जानबूझकर राजनीतिक क्षेत्र में न्यायपालिका और सेना के खिलाफ कुछ भी बोलने से परहेज किया। और उन्होंने अपने समर्थकों से अतीत भूलकर आगे बढ़ने का आह्वान किया।
यानि, यह साफ है, कि नवाज़ शरीफ़ एक नई कहानी चाह रहे हैं। उनका भाषण 2017 की पुरानी यादों से भरा था, जिसमें पाकिस्तान की करीबी, पाकिस्तान की आर्थिक दुर्दशा, पाकिस्तानी रुपये का गर्त में मिल जाना, रोटी की कीमत, पेट्रोल और बिजली की कीमत, गरीबी और बेरोजगारी शामिल था।
लेकिन अपनी खुद की खराब नीतियों, जिनमें से कुछ ने पाकिस्तान के वर्तमान संकट को काफी हद तक बढ़ा दिया है, उसे स्वीकार करने के बजाय, वह अभी भी लोकलुभावन सपने बेचने के लिए उत्सुक दिख रहे हैं।












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