पाकिस्तान में एक बार फिर खिचड़ी सरकार.. नवाज-बिलावल में समझौते के आसार, क्या हारकर भी जीत गई सेना?
Pakistan Election 2024 Result: पाकिस्तान में मतदान के बाद काउंटिंग में हुई भारी धांधली के बाद भी इमरान खान की पार्टी से जुड़े निर्दलीय उम्मीदवारों के शानदार प्रदर्शन ने सेना को हरा दिया है। पाकिस्तान में इमरान खान के लोगों का चुनाव जीतना, पाकिस्तान की ताकतवर आर्मी के मुंह पर करारा तमाचा है।
लेकिन, पाकिस्तान में अब सरकार का जो स्वरूप ले रहा है, वो एक खिचड़ी और काफी कमजोर सरकार की तरफ संकेत दे रहा है, जिसका मतलब ये हुआ, कि जिस गठबंधन सरकार के गठन होने की संभावना है, वो काफी कमजोर होगी, जिसपर पूरी तरह से आर्मी का कंट्रोल होगा।

जब मैं ये खबर लिख रहा हूं उस वक्त इमरान खान के 99 निर्दलीय उम्मीदवार जीते हैं, नवाज शरीफ की पीएमएल-एन के 70 उम्मीदवार जीते हैं, बिलावल भुट्टो की पीपीपी के 53 सांसद जीते हैं, एमक्यूएम पार्टी के 15 सांसद जीते हैं, जेयूआई-एफ के 2 उम्मीदवार और कुछ सीटें अन्य के खाते में गई हैं।
हैरानी की बात ये है, कि परसों शाम पांच बजे से पाकिस्तान में वोटों की गिनती चल रही है, जो अभी तक खत्म नहीं हुई है और अभी भी 265 सीटों में से 244 सीटों के ही नतीजे सामने आए हैं।
इमरान खान की पीटीआई के कई उम्मीदवारों ने आरोप लगाया है, कि वो जीतते-जीतते अचानक हार गये हैं। पीटीआई का दावा है, कि पार्टी ने 150 से ज्यादा सीटें जीती हैं, लेकिन कई घंटों तक काउंटिंग रोककर उनकी पार्टी के ज्यादातर उम्मीदवारों को हरा दिया गया है।
कुल मिलाकर, फिलहाल की हकीकत ये है, कि नवाज शरीफ की पीएमएल-एन, बिलावल भुट्टो की पीपीपी और एमक्यूएम ने मिलकर एक गठबंधन सरकार बनाने जितना बहुमत हासिल कर लिया है।
गठबंधन सरकार बनाने की कोशिशें
पूर्व प्रधान मंत्री नवाज शरीफ, जो पीएमएलएन के प्रमुख हैं, उन्होंने कहा है, कि उनकी पार्टी इमरान खान की पार्टी से जुड़े स्वतंत्र उम्मीदवारों से पिछड़ने के बाद गठबंधन सरकार बनाने की कोशिश करेंगे।
इससे पहले, नवाज शरीफ ने चुनाव में जीत का दावा किया था, जबकि वोटों की गिनती अभी भी चल रही है।
लेकिन बाद में वह यह कहते हुए पीछे हट गए, "हमारे पास दूसरों के समर्थन के बिना सरकार बनाने के लिए पर्याप्त बहुमत नहीं है और हम सहयोगियों को गठबंधन में शामिल होने के लिए आमंत्रित करते हैं, ताकि हम पाकिस्तान को उसकी समस्याओं से बाहर निकालने के लिए संयुक्त प्रयास कर सकें।"
शरीफ ने कहा, कि वह गठबंधन सहयोगी के रूप में पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो के बेटे बिलावल भुट्टो-जरदारी की पीपीपी से संपर्क करेंगे। उन्होंने गठबंधन सरकार बनाने के लिए बातचीत की जिम्मेदारी अपने भाई शहबाज शरीफ को दी है।
उन्होंने यह भी कहा, कि वह पाकिस्तान को "बदलने" के लिए अन्य दलों के साथ मिलकर बैठना चाहते हैं।

इमरान खान ने किया इतिहास रचने का दावा
अपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस संबोधन में, इमरान खान ने पीएमएलएन नेता नवाज शरीफ को "क्षुद्र आदमी" कहकर निंदा की, और कहा, "कोई भी पाकिस्तानी उन्हें स्वीकार नहीं करेगा" या उनकी जीत का दावा नहीं कर रहा है।
मतदाताओं से बात करते हुए उन्होंने कहा, ''मेरे साथी पाकिस्तानियों, आपने इतिहास बना दिया है। मुझे आप पर गर्व है और मैं देश को एकजुट करने के लिए ईश्वर को धन्यवाद देता हूं।"
पिछले साल अगस्त से जेल में बंद इमरान खान को कई मामलों में एक के बाद एक सजा का सामना करना पड़ रहा है और उन्हें चुनाव से ठीक एक हफ्ते पहले 31 सालों की सजा सुनाई गई है। हालांकि, उन्होंने इसे राजनीति से प्रेरित बताया है।
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के ब्लावाटनिक स्कूल ऑफ गवर्नमेंट में एसोसिएट प्रोफेसर माया ट्यूडर ने अल जजीरा को बताया, कि चुनाव में पीटीआई समर्थित उम्मीदवारों की जीत उल्लेखनीय होगी, लेकिन आगे की राह पथरीली है।
एक्सपर्ट्स का कहना है, कि "पाकिस्तान में जिस गठबंधन सरकार का गठन होने की संभावना है, वो काफी कमजोर होगी, उसपर सेना का पूर्ण नियंत्रण होगा, देश की अर्थव्यवस्था संकट में है, देश की हर सीमा संघर्ष में है, देश में महंगाई रिकॉर्ड स्तर पर है, जिसकी ताप हर पाकिस्तानी महसूस कर रहे हैं, ऐसे स्थिति में जनमत का सम्मान नहीं करना, देश को अस्थिरता की तरफ धकेल देगा।"

राजनीतिक इंजीनियरिंग
शुक्रवार को चुनाव नतीजों में देरी पर भी सवाल उठे हैं, और पीटीआई के प्रवक्ता रऊफ हसन ने अधिकारियों पर नतीजों के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया और कहा, कि वोट "चोरी" किए गए हैं।
अलजजीरा की एक रिपोर्ट में लाहौर में लोगों ने कहा है, कि वोटों में खुलेआम धांधली की गई है। लोगों का कहना है, कि उनके मत का सम्मान नहीं किया गया है। लिहाजा, लोगों में सैन्य प्रतिष्ठान को लेकर निराशा और गुस्सा भड़क रही है और अगर एक कमजोर सरकार का निर्माण किया गया, जिसमें सबसे ज्यादा सीटें जीतने वाली पीटीआई की कोई भागीदारी नहीं होगी, तो फिर सड़कों पर संघर्ष भड़क सकता है।
दूसरी तरफ, सेना के लिए गठबंधन सरकार पर नियंत्रण रखना काफी आसान होगा और जैसा की पाकिस्तान में हमेशा होता है, अगर सरकार और सेना में कभी तनाव भड़केगा, तो सेना के लिए सरकार को गिराना काफी आसान होगा।
इसमें कोई शक नहीं, कि इमरान खान को वोट देकर पाकिस्तानी अवाम ने सेना को औकात दिखा दी है, सेना निश्चित तौर पर चुनाव में हार गई है, लेकिन बनने वाली सरकार का नियंत्रण सेना की जीत ही है। पर्दे के पीछे से पाकिस्तानी सेना ही सरकार चलाएगी।












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