अमेरिका को सेंट मार्टिन, चीन को बंदरगाह, भारत को Payra Port, बांग्लादेश में किस देश को क्या चाहिए?
India-Bangladesh: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे के बाद भी बांग्लादेश में हिंसा कम नहीं हुई है और निशाना बनाए जाने के बाद अब हिंदुओं ने हल्ला बोल दिया है। बांग्लादेश में अभी भी हिंसक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सत्ता का खेल सामने आ रहा है।
शेख हसीना 2009 से रणनीतिक रूप से स्थित दक्षिण एशियाई राष्ट्र पर शासन कर रही हैं और जनवरी में एकतरफा चुनाव में उन्होंने पांचवीं बार जीत हासिल की, जिसका मुख्य विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने बहिष्कार किया था।

चीन ने बांग्लादेश में बुनियादी ढांचे और सैन्य हार्डवेयर में भारी निवेश किया है। तो अमेरिका, बांग्लादेश में एक सैन्य अड्डा बनाने की कोशिश कर रहा है, जिसका जिक्र खुद शेख हसीना ने एक बार फिर से किया है, जब वो भारत में बांग्लादेश से भागकर रह रही हैं। उन्होंने अमरिका पर अपनी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन को भड़काने का आरोप लगाया है।
भारत की बांग्लादेश के साथ सबसे लंबी भूमि सीमा (4,096 किलोमीटर) साझा करता है, जो इसके तीन तरफ से होकर गुजरती है, चौथी तरफ बंगाल की खाड़ी (बीओबी) है।
अमेरिका ने सत्ता परिवर्तन का समर्थन किया?
लंबे समय से अमेरिकी प्रशासन, बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के लिए समर्थन जताता रहा है। वे शेख हसीना के भारत समर्थक होने या फिर चीन से समर्थन लेने से बहुत खुश नहीं थे। उन्हें सत्ता से बाहर करने के लिए कई तरह की रणनीतियां आजमाई गईं। विद्रोह करने के लिए विपक्षी कार्यकर्ताओं का समर्थन किया गया। अमेरिकी राजदूत विपक्षी पार्टी बीएनपी से मिलते रहे। चुनावों के दौरान शेख हसीना को अमेरिका की ओर से लगातार आलोचना का सामना करना पड़ा।
The US 2023 NDAA Burma Act
शेख हसीना ने इसी साल मई महीने में भी एक तीसरे देश (कथित तौर पर अमेरिका) की तरफ से किए जा रहे एक साजिश के बारे में इशारा किया था, जिसके कारण धार्मिक आधार पर बांग्लादेश का विभाजन हो सकता है और पूर्वी तिमोर जैसे गैर-मुस्लिम बहुल देश का निर्माण हो सकता है, जहां कुकी-चिन विद्रोही ईसाई विद्रोहियों की मदद करने और उन्हें बढ़ावा देने के लिए म्यांमार सेना के साथ लड़ रहे हैं।
बर्मा अधिनियम को अमेरिका के 2023 NDAA में शामिल किए जाने से म्यांमार में लोगों की राय मजबूत हुई है, कि म्यांमार में प्रतिरोध आंदोलन को अमेरिका का भरपूर समर्थन हासिल है। म्यांमार का कुकी चिन प्रांत, बांग्लादेश का चटगांव पहाड़ी इलाका और भारत का मिजोरम सीमा रेखा एक साथ आते हैं, जिसके बारे में शेखथ हसीन का कहना है, कि इन क्षेत्रों को मिलाकर ईसाई देश बनाने की साजिश है, ताकि अमेरिका हमेशा के लिए यहां स्थापित हो सके।
म्यांमार में दस लाख से ज्यादा चिन रहते हैं, मिजोरम में दस लाख मिजो रहते हैं, मणिपुर में पांच लाख कुकी रहते हैं और बांग्लादेश में हजोंरों कुकी रहते हैं। इसके अलावा, म्यांमार की सेना और चिन लोगों के बीच चल रही लड़ाई के कारण, हजारों चिन विदेश भाग गए हैं, जिनमें 80,000 संयुक्त राज्य अमेरिका में रह रहे हैं।
और शेख हसीना ने महसूस किया, इस पूरे क्षेत्र के लिए ये एक चेतावनी भरी बात है।
सेंट मार्टिन द्वीप पर नौसेना और एयरबेस
3 वर्ग किलोमीटर का सेंट मार्टिन द्वीप बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पूर्वी भाग में है, जो बांग्लादेश के कॉक्स बाजार-टेकनाफ प्रायद्वीप के सिरे से लगभग 9 किमी दक्षिण में है, और देश का सबसे दक्षिणी भाग है।
अमेरिका ने कथित तौर पर बांग्लादेश को क्वाड गठबंधन में शामिल होने का सुझाव दिया था, और ऐसी रिपोर्टें थीं, कि उन्होंने हवाई और नौसैनिक अड्डे के निर्माण के लिए सेंट मार्टिन द्वीप को पट्टे पर देने का प्रस्ताव रखा था।
अमेरिका और बांग्लादेश के बीच सैन्य संबंध रहे हैं और दोनों सेनाओं ने कई बार संयुक्त सैन्य अभ्यास भी किए हैं। चूंकि चीन भी बांग्लादेश के करीब आने की कोशिश कर रहा है, इसलिए चीन को रोकने के लिए बनाया गया ऐसा अमेरिकी बेस, शेख हसीना को स्वीकार्य नहीं था। कुछ अन्य लोगों ने सुझाव दिया है, कि अमेरिका वास्तव में बांग्लादेश को भारत पर "प्रभुत्व" जताने के लिए एक खेल का मैदान बनाना चाहता है।
कई एक्सपर्ट्स का कहना है, कि अमेरिका भारत के ठीक बगल में एक एयरबेस बनाकर हमेशा के लिए भारत को दबाव में लाना चाहता है।
हालांकि, एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने जोर देकर कहा था, कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने सेंट मार्टिन द्वीप पर नियंत्रण लेने के संबंध में कभी कोई चर्चा नहीं की है, या उसका ऐसा करने का कोई इरादा नहीं है।

चीन-बांग्लादेश रक्षा सहयोग
चीन की राजनीतिक विस्तार रणनीति में बांग्लादेश एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में उभरा है। पिछले कुछ वर्षों में हथियारों की आपूर्ति और सैन्य बुनियादी ढांचे के निर्माण के रूप में दोनों के बीच सैन्य सहयोग बढ़ा है। 1971 में बांग्लादेश की मुक्ति के दौरान, चीन ने पाकिस्तान का समर्थन किया था। लेकिन आज बांग्लादेश, चीन को एक भरोसेमंद सहयोगी मानता है।
2002 में चीन और बांग्लादेश ने एक "रक्षा सहयोग समझौते" पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें सैन्य प्रशिक्षण और रक्षा उत्पादन शामिल है। 2006 तक, ढाका चीनी निर्मित हथियारों का एक प्रमुख खरीदार बन गया था। चीन ने विदेशी सैन्य अड्डे के लिए इजाजत नहीं देने को लेकर शेख हसीना की एक बार प्रशंसा भी की थी। लिहाजा ढाका के साथ कोई भी रणनीतिक साझेदारी बीजिंग को, भारतीय प्रभाव को कम करने और भारत के आसपास अपनी सेना की तैनाती के रास्ते को खोलती है।
इसके अलावा, चीन बांग्लादेश का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बनकर भी उभरा है, जिसने विभिन्न परियोजनाओं में 25 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश किया है। पाकिस्तान के बाद, बांग्लादेश दक्षिण एशियाई क्षेत्र में दूसरा सबसे बड़ा चीनी निवेश हासिल करने वाला देश। चीन ने बांग्लादेश में पुल, सड़कें, रेलवे ट्रैक, हवाई अड्डे और बिजली संयंत्रों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पद्मा ब्रिज रेल लिंक परियोजना चीन द्वारा शुरू की गई प्रमुख परियोजनाओं में से एक है, जो पद्मा ब्रिज के माध्यम से ढाका को जेसोर से जोड़ती है। महत्वपूर्ण बात यह है कि बांग्लादेश के कई उत्पादों पर चीन में कोई टैरिफ नहीं है।
चीन को चाहिए बांग्लादेशी डीप सी पोर्ट
सोनादिया द्वीप, बांग्लादेश के चटगांव डिवीजन में कॉक्स बाजार तट से दूर, 9 वर्ग किलोमीटर में फैला एक छोटा द्वीप है। यह कॉक्स बाजार जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में है। चीन, बांग्लादेश में एक नौसैनिक अड्डे पर नजर गड़ाए हुए है और उसने बांग्लादेश के लिए सोनादिया द्वीप को गहरे समुद्री बंदरगाह के रूप में विकसित करने की पेशकश की थी, जो बाद में के लिए ग्वादर जैसा सिरदर्द बन सकता था। यह द्वीप 'मोतियों की माला' के लिए एक नया मोती प्रदान कर सकता था, और बांग्लादेश में भारत के स्पष्ट रणनीतिक लाभ को प्रभावित कर सकता था। लेकिन 2020 में शेख हसीना ने इस प्रोजेक्ट को दफना दिया।
और अब भारत यही मनाएगा, कि देश में बनने वाली नई सरकार इस प्रोजेक्ट को फिर से जन्म ना दे दे।
चीनी सरकार अभी भी बांग्लादेश में गहरे समुद्री बंदरगाह के डिजाइन, निर्माण और संचालन के लिए बिल्ड-ओन-ऑपरेट-ट्रांसफर के आधार पर धन देना चाहती है। चटगांव या सोनादिया, चीन को बांग्लादेश और विस्तार में हिंद महासागर तक सीधी पहुंच प्रदान कर सकते हैं।
पेरा पोर्ट (Payra Port)
बांग्लादेश का तीसरा सबसे बड़ा बंदरगाह, पेरा पोर्ट, जो अब देश का सबसे गहरा बंदरगाह है, वो मूल रूप से चीन की स्ट्रिंग ऑफ़ पर्ल्स रणनीति में एक और गहरे बंदरगाह के लिए योजनाबद्ध था। बंदरगाह का निर्माण, जिसे सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP मॉडल) मंच पर वित्तपोषित किया जा रहा था, उसे शुरू में एक चीनी कंपनी को दे दिया गया था। भारत, जापान और संयुक्त राज्य अमेरिका ने इस योजना का विरोध किया। पेरा पोर्ट अथॉरिटी (पीपीए) ने निर्माणाधीन पेरा बंदरगाह के 75 किलोमीटर लंबे मुख्य चैनल की पूंजी और रखरखाव ड्रेजिंग के लिए बेल्जियम स्थित ड्रेजिंग कंपनी जान डे नुल (जेडीएन) के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। मार्च 2023 में, जेडीएन ने पूंजी ड्रेजिंग पूरी कर ली।
बांग्लादेश में अडानी का पोर्ट प्रोजेक्ट
इसके अलावा, अडानी समूह निजी भागीदारी के माध्यम से बांग्लादेश में बंदरगाह क्षेत्र में प्रवेश करने का इरादा रखता है। कंपनी, चटगांव बंदरगाह के नियोजित बे टर्मिनल में निवेश करने पर विचार कर रही है, जो बंदरगाह के पास बनने वाला एक गहरा टर्मिनल है। चीन और भारत, दोनों बांग्लादेश के मोंगला बंदरगाह के विकास और आधुनिकीकरण में निवेश करने की रेस में हैं। मोंगला बंदरगाल का अधिकार भारत को पिछले महीने ही मिला है, जो चीन के लिए बड़ा झटका है। वहीं, 2017 से, अडानी पावर ने झारखंड संयंत्र से बांग्लादेश ग्रिड से जुड़ी 400 केवी समर्पित ट्रांसमिशन लाइन के माध्यम से 25 साल के अनुबंध के तहत 1,496 मेगावाट की शुद्ध क्षमता की आपूर्ति की है।
बांग्लादेश में भारत के लिए आगे का रास्ता क्या है?
चीन की दक्षिण एशियाई नीति में रणनीतिक डिजाइन है, जो इस क्षेत्र में भारत के हितों को नुकसान पहुंचा सकता है। खुद को बांग्लादेशी संप्रभुता के रक्षक के रूप में स्थापित करके, चीन का लक्ष्य अमेरिकी प्रभाव को कम करना है और जैसे-जैसे चीन, बांग्लादेश और उसकी सेना के करीब आता है, यह भारत की चिंता का कारण बन जाता है।
बांग्लादेश में चुनाव और अमेरिका के साथ तनातनी के बीच, चीन के समर्थन का समय एक सोची-समझी रणनीति है, जिसकी अपनी गतिशीलता है। भारत के लिए सबसे अच्छा यही है, कि शेख हसीना के बाद की अराजकता शांत हो जाए। भारत अपना उदार नजरिया बनाए रखें। विकास सहायता और बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए नये प्रशासन से बात करता रहे। साथ ही, भारत में हसीना की लगातार मौजूदगी एक परेशानी बनी रह सकती है। जिसे भी डिप्लोमेसी के स्तर पर हल किए जाने की जरूरत है।
इसके अलावा, बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था और उसकी सैन्य रणनीति को भारत की भारत माला और सागर माला परियोजनाओं में एकीकृत करने के लिए कोशिशें जारी रखने होंगे। दोनों को IORA (हिंद महासागर रिम एसोसिएशन) और BIMSTEC (बहु-क्षेत्रीय तकनीकी तथा आर्थिक सहयोग के लिए बंगाल की खाड़ी पहल) की व्यापक रूपरेखा के अंतर्गत लुक ईस्ट एक्ट ईस्ट परियोजनाओं पर ज्यादा सक्रियता से काम करना चाहिए। भारत को चीन पर अत्यधिक निर्भरता से बचने के लिए म्यांमार की विदेश नीति में आए बदलाव का लाभ उठाना चाहिए। भारत को बंगाल की खाड़ी के दूसरे खिलाड़ी थाईलैंड के साथ भी अच्छे संबंध बनाए रखने चाहिए।
शेख हसीना का बांग्लादेश भारतीय संवेदनाओं को ध्यान में रखते हुए चीन के साथ बातचीत कर रहा था। लेकिन अब ऐसा नहीं हो सकता। भारत को मालदीव जैसी स्थिति से परिपक्वता के साथ निपटना होगा। भारत को यह याद रखना चाहिए, कि बांग्लादेश को भारत की उतनी ही आवश्यकता है, जितनी कि दूसरे देशों को। रणनीतिक रूप से बंगाल की खाड़ी भारत की दूसरी आक्रमण क्षमता के लिए महत्वपूर्ण है। भारत को इसे सुरक्षित रखना होगा और इस पर अपना प्रभुत्व बनाए रखना होगा।












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