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मंगल ग्रह पर जीवन खोजने के एक कदम और करीब NASA, अति-प्राचीन नदी खोजने में मिली कामयाबी

मंगल पर जीवन के संकेत? मंगल ग्रह से आई तस्वीरों में अति-प्राचीन नदी, झील और पहाड़ों पर बड़ी जानकारियों का पता चला।

वॉशिंगटन, अक्टूबर 08: मंगल ग्रह पर जिंदगी बसाने के लिए वैज्ञानिक लगातार काम कर रहे हैं और नासा के वैज्ञानिकों ने एक बेहद महतवपूर्ण कामयाबी हासिल की है, जो मंगल ग्रह पर पानी को लेकर है। नासा का रोवर लगातार मंगल ग्रह पर खोज कर रहा है और अब नासा ने जानकारी देते हुए कहा है कि उसे मंगलग्रह पर पानी होने की संभावना को लेकर बेहद महत्वपूर्ण तथ्य हाथ लगे हैं। नासा के वैज्ञानिकों ने इसे एक उपलब्धि करार दिया है।

नासा को बड़ी कामयाबी

नासा को बड़ी कामयाबी

नासा की तरफ से गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि मंगलग्रह पर मौजूद उसके रोवर ने कुछ ऐसी तस्वीरें भएजी हैं, जिससे पता चलता है कि 3.7 अरब साल पहले मंगलग्रह के निर्माण में पानी ने भूमिका निभाई थी। नासा के रोवर ने जिन तस्वीरों को भेजा है, उसमें एक डेल्टा के होने का पता चला है। जिसका मतलब ये हुआ कि, रोवर द्वारा भेजी तस्वीर में एक सूखा पानी के झील के होने का पता चला है। तस्वीरों के आधार पर वैज्ञानिकों ने कहा कि, इन तस्वीरों के आधार पर मंगल ग्रह पर प्राचीन जीवन होने के सबूत खोजने काफी मदद मिलेगी।

तस्वीरों से क्या पता चला?

तस्वीरों से क्या पता चला?

नासा के रोवर ने मंगल ग्रह पर गायब हो चुके एक झील के होने का सबूत पृथ्वी पर भेजा है और उन तस्वीरों को लेकर नासा के वैज्ञानिकों ने काफी व्यापक मंथन किया है। इस रोवर को वैज्ञानिकों के द्वारा उस क्षेत्र में भेजा गया था, जहां पानी होने की उम्मीद सबसे ज्यादा थी। इन तस्वीरों के अध्ययन के आधार पर इस वक्त वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि मंगल ग्रह पर एक झील मौजूद थी, जिसमें अकसर बाढ़ आया करता था, जिससे पानी किनारे पर बह जाया करता था, लेकिन एक बार मंगल ग्रह पर भीषण बाढ़ आई थी और पानी की ऊंचाई 10 मील से भी ऊपर थी, जिसकी वजह से झील के आसपास मौजूद बड़े बड़े शिलाखंड झील के अंदर आ गये और वो शिलाखंड आज भी झील के अंदर मौजूद हैं। ये शिलाखंड विशालकाय चट्टन जैसे हैं।

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    धरती की नदियों से समानता?

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    वैज्ञानिकों के मुताबिक, झील के अंदर जो शिलाखंड आ गये थे, उनके नीचे नये परतों को निर्माण हुआ है, जिससे कई जानकारियां हासिल होती हैं। फ्लोरिडा में नासा के खगोलविज्ञानी एमी विलियम्स और उनकी टीम ने क्रेटर फ्लोर से देखी गई चट्टानों की विशेषताओं और पृथ्वी के नदी डेल्टा में पैटर्न के बीच समानताएं पाईं हैं। स्टडी में कहा गया है कि, नीचे की तीन परतों के आकार ने पानी की उपस्थिति और स्थिर प्रवाह को दिखाया है, जो दर्शाता है कि मंगल लगभग 3.7 अरब साल पहले पानी तो मौजूद था ही, इसके साथ साथ पर्याप्त गर्मी और आर्दता भी मौजूद था। वैज्ञानिकों ने कहा है कि, रोवर ने जो लेटेस्ट तस्वीरें भेजी हैं, उससे पता चलता है कि, झील में एक मीटर से ज्यादा व्यास वाले बोल्डर बिखरे पड़े हैं, जो उस प्रचंड बाढ़ में वहां लाए गये होंगे।

    बेहद महत्वपूर्ण है नासा का ये खोज

    बेहद महत्वपूर्ण है नासा का ये खोज

    नासा का ये शोध काफी महत्वपूर्ण है और इस आधार पर ये पता लगाने में मदद मिलेगी कि रोवर को मिट्टी और चट्टानों के नये नमूने लाने के लिए कहां भेजा जाए। वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर उस जगह से मिट्टी और चट्टानों के नमूने पृथ्वी पर लाने में कामयाबी मिलती है, तो उसके टेस्ट में इंसनों के जीवन होने के सबूत मिल सकते हैं। नासा के वैज्ञानिक विलियम्स ने एक प्रेस रिलीज में कहा है कि, ''झील के अंदर से आई इन तस्वीरों से हम ये अंदाजा लगा सकते हैं कि डेल्टा बनाने वाला पानी होना चाहिए।'' उन्होंने कहा कि, ''ये तस्वीरें पूरी की पूरी किताब पढ़ने जैसा है, ना कि सिर्फ किसी किताब का कवर देखने जैसा''। आपको बता दें कि, मंगल पर जीवन का पता लगाने के लिए नासा कई मिशनों पर काम कर रहा है और अभी तक अरबों रुपये खर्च किए जा सके हैं।

    नासा का दुर्लभ मिशन

    नासा का दुर्लभ मिशन

    नासा के ये मिशन अगले कई सालों तक चलने वाला है और अगले कुछ सालों में नासा का मल्टी टास्किंग रोवर सीलबंद ट्यूबों में 30 पत्थर और मिट्टी के नमूनों को एकत्र करेगा, जिसे 2030 तक प्रयोगशाला में रिसर्च के लिए मंगल ग्रह से धरती पर भेज दिया जाएगा। पिछले महीने मिशन से जुड़े वैज्ञानिकों ने बताया था कि, उन्हें जेजेरो में दो पत्थरों के नमूनें इकट्ठा करने में कामयाबी मिली है, जिसके बारे में संभावना है कि वो लंबे वक्त तक पानी के संपर्क में रहे होंगे।

    नासा को बड़ी कामयाबी

    नासा को बड़ी कामयाबी

    एमआईटी में ग्रह विज्ञान के प्रोफेसर बेंजामिन वीस ने कहा कि, 'यदि आप इन तस्वीरों को देखते हैं, तो आपको पता चलता है कि, कि आप मूल रूप से मंगलग्रह का महाकाव्य पढ़ रहे हैं और एक बेहद सुनसान जगह पर जाने का मौका आपको कभी भी मिल सकता है। उन्होंने कहा कि, 'कहीं भी पानी की एक बूंद नहीं है, और फिर भी, यहां हमारे पास एक बहुत ही अलग अतीत के प्रमाण हैं। मंगल ग्रह के इतिहास में कुछ बहुत राज छिपे हुए हैं।' जब नासा के रोवर ने झील के होने की पुष्टि कर दी है, तो अब वैज्ञानिकों का मानना ​​​​है कि इसके तलछट में प्राचीन जलीय जीवन के निशान हो सकते हैं।

    जीवाश्म मिलने की संभावना

    जीवाश्म मिलने की संभावना

    एमआईटी में जियोबायोलॉजी के एसोसिएट प्रोफेसर और मिशन मंगल टीम के सदस्य तंजा बोसाक ने कहा कि, 'अब हमारे पास जीवाश्मों की तलाश करने का अवसर है।'' उन्होंने कहा कि, ''चट्टानों से जुड़ी जानकारी तक पहुंचने में कुछ समय लगेगा, लेकिन हम वास्तव में जीवन के संकेतों के नमूने मौजूद होने की की उम्मीद करते हैं और इसमें अभी काफी वक्त लगने वाला है।' प्रो वीस ने कहा कि, 'इन छवियों से जो सबसे आश्चर्यजनक बात सामने आई है, वह उस समय को जानने का संभावित अवसर है, जब यह गड्ढा पृथ्वी जैसे रहने योग्य वातावरण से घिरा होगा और अब पूरी तरह से उजाड़ हो चुका है।

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