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पृथ्वी को बचाने के लिए NASA ने भेजा स्पेसक्राफ्ट, क्या आप भी सुन सकेंगे एस्टेरॉयड से टक्कर की 'आवाज'?

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वाशिंगटन, 24 नवंबर। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा अंतरिक्ष में एक बड़ी मिशन को अंजाम देने जा रहा है, जो भविष्य में मानव सभ्यता के लिए खतरा बनने वाले ऐस्टेरॉयड से इंसानों को बचा सकता है। जी हां, नासा ने डबल ऐस्टेरॉयड रीडायरेक्शन टेस्ट (डीएआरटी) मिशन के तहत बुधवार को एक अंतरिक्ष यान स्पेस की ओर रवाना किया जो ऐस्टेरॉयड डायमोर्फोस से टकराएगा। अगर यह मिशन सफल रहा तो अंतरिक्ष में बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी।

दुनिया का पहला ऐसा टेस्ट

दुनिया का पहला ऐसा टेस्ट

डबल ऐस्टेरॉयड रीडायरेक्शन टेस्ट (डीएआरटी) अपने आप में दुनिया का पहला मिशन है, इसका मकसद भविष्य में पृथ्वी की तरफ आने वाले ऐस्टेरॉयड का रास्ता बदलना है। इस मिशन के तहत नासा अपने अंतरिक्ष यान की टक्कर चांद की तरफ बढ़ रहे ऐस्टेरॉयड डायमोर्फोस से कराएगा, अगर इस भिड़ंत से ऐस्टेरॉयड का रास्ता बदल जाता है तो मिशन सफल माना जाएगा।

क्या है मिशन का उद्देश्य?

क्या है मिशन का उद्देश्य?

इस तरह पृथ्वी के लिए भी खतरा बनने वाले ऐस्टेरॉयड से निपटा जा सकेगा। गौरतलब है कि ब्रह्मांड में ऐसे लाखों छोटे-बड़े ऐस्टेरॉयड हैं जो कभी भी पृथ्वी से टकरा सकते हैं। हालांकि अगले 100 वर्षों तक ऐसी घटना की आशंका बहुत कम है लेकिन यह 100 फीसदी पक्का नहीं है। स्पेस में लावारिस तैर रहे अक्सर ऐस्टेरॉयड अपना रास्ता बदलते रहते हैं जो कभी भी पृथ्वी की तरफ भी आ सकते हैं।

उल्कापिंड की टक्कर हुआ था डायनासोर का अंत

उल्कापिंड की टक्कर हुआ था डायनासोर का अंत

माना जाता है कि पृथ्वी पर करोड़ों साल पहले डायनासोर का भी अंत उल्कापिंड की टक्कर से हुआ था, आज भी कई छोटे ऐस्टेरॉयड धरती के वायुमंडल में प्रवेश कर राख बन जाते हैं। रात के समय आसमान में टूटते हुए तारे उन्हीं में से एक हैं। अगर किसी दिन बड़ा उल्का पिंड धरती से टकराता है तो इंसानों का भी खात्मा हो सकता है। इस खतरे से निपटने के लिए नासा ने डबल ऐस्टेरॉयड रीडायरेक्शन टेस्ट (डीएआरटी) की शुरुआत की।

टक्कर से निकलेगी जोरदार आवाज

टक्कर से निकलेगी जोरदार आवाज

आपको जानकर हैरानी होगी कि अंतरिक्ष यान और उल्कापिंड के टक्कर से निकली आवाज धरती पर भी सुनाई देगी, लेकिन उसके लिए बेहद संवेदनशील उपकरण की आवश्यता पड़ेगी। इस टक्कर की आवाज सबसे पहले यूरोप में सुनी जाएगी। बता दें कि उल्कापिंट से टकराने वाला अंतरिक्ष यान 19 मीटर लंबा और 620 किलोग्राम का है। एक्टेरॉयड तक पहुंचने के लिए स्पेसक्राफ्ट का सफर तय करना होगा।

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    एक साल की यात्रा करेगा स्पेसक्राफ्ट

    एक साल की यात्रा करेगा स्पेसक्राफ्ट

    स्पेसक्राफ्ट और एक्टेरॉयड की अगले साल अक्टूबर 2022 में टक्कर होने की संभावना है। इससे निकले वाली आवाज से सामान्य कानों से नहीं सुना जा सकता, इसके साउंड को पड़ने के लिए यूरोप में स्पेशल उपकरण की मदद ली जाएगी। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी एस्ट्राक नेटवर्क इस स्पेसक्राफ्ट को ट्रैक कर रहा है। मिशन लॉन्च करते हुए नासा ने ट्वीट किया, 'ऐस्टेरॉयड डायमोर्फोस,...तुम्हारे पास आ रहे हैं!'

    कितना बड़ा है डायमोर्फोस?

    कितना बड़ा है डायमोर्फोस?

    बता दें कि जिस उल्कापिंड (डायमोर्फोस) से स्पेसक्राफ्ट की टक्कर होने वाली है वो लगभग 525 फीट (160 मीटर, या दो स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी) चौड़ा है। डायमोर्फोस, डिडिमोस (2,500 फीट या 780 मीटर व्यास) नामक एक बहुत बड़े क्षुद्रग्रह का चक्कर लगाता है। दोनों एक साथ अपने सूर्य की परिक्रमा करते हैं। डार्ट मिशन को कैलिफोर्निया के वैंडेनबर्ग वायु सेना बेस से स्पेसएक्स फाल्कन 9 रॉकेट द्वारा लॉन्च किया गया।

    यह भी पढ़ें: नासा ने पहली बार जारी की 'Hand Of God' की अद्भुत फोटो, इस वजह से अब हो रहे गायब

    English summary
    NASA launching the worlds first mission to test asteroid-deflecting technology
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