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सौर मंडल में जीवन का पता लगाने के लिए सांप जैसा रोबोट क्यों बना रहा है NASA? देखिए Video

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा एक ऐसा रोबोट विकसित कर रहा है, जो सौर मंडल के उन क्षेत्रों में भी पहुंच सकता है, जहां अभी तक किसी मानवीय उपकरण का पहुंचना संभव नहीं हुआ है।

snake robot by NASA

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा सांप की तरह के एक खोजी रोबोट का परीक्षण कर रहा है। इसकी डिजाइन को लेकर नासा की ओर से कहा गया है कि इसे परंपरागत एस्कप्लोरर वाहन, जिसे रोवर्स कहते हैं, उससे अलग तरह से तैयार किया गया है। इस खोजी रोबोट की खास डिजाइन के पीछे नासा का विशेष मकसद है।

परंपरागत रोवर्स से अलग है स्नेक-रोबोट
नासा ने सांप की तरह के जिस रोबोट को डिजाइन किया है, उसे सौर मंडल में उन संकेतों को पकड़ने के लिए तैयार किया गया है, जहां जीवन की जरा भी संभावना है। इसलिए इस रोबोट को ऐसे डिजाइन किया गया है, जिससे कि यह उन मुश्किल जगहों तक भी पहुंच जाए जो परंपरागत रोवर्स के लिए नाममुकिन है।

खुद ही जीवन की तलाश में जुटेगा स्नेक-रोबोट
नासा के कैलिफोर्निया स्थित जेट प्रपल्शन लैबोरेटरी (जेपीएल ) के इंजीनियरों की अगुवाई में जो सांप के आकार का रोबोट बन रहा है, उसे एक्सोबायोलॉजी एक्टैंट लाइफ सर्वेयर या ईईएलएस नाम दिया गया है। ईईएलएस को इस तरह से बनाया गया है कि यह खुद से ही खोजी अभियान में जुट सकता है, इसमें रियल-टाइम मानवीय नियंत्रण की आवश्यकता नहीं होगी।

हर परिस्थिति में अपने अभियान में जुटा रहेगा यह रोबोट
नासा के वैज्ञानिकों का कहना है कि इसे इस तरह से डिजाइन किया गया कि यह जमीन पर, पानी में और यहां तक कि मुश्किल से मुश्किल जमा देने वाली परिस्थतियों में भी काम कर सकता है। अभी जो मॉडल बना है, उसे विभिन्न पर्यावरणीय माहौल में परीक्षण किया जा रहा है। भविष्य में किस तरह से यह रोबोट अंतिम रूप लेगा, यह मौजूदा मॉडल के प्रदर्शन पर निर्भर है।

शनि के चंद्रमा में जीवन की तलाश करेगा स्नेक-रोबोट
नासा वैज्ञानिकों ने कहा है कि सांप की तरह रोबोट बनाने का मकसद शनि के चंद्रमा एनसेलडस के महासागर में जीवन के संकतों की खोज करना है। इस बात की संभावना जताई जाती है कि उसके चंद्रमा की बर्फीली सतह के नीचे वह महासागर मौजूद है।

यह रोबोट किसी भी दिशा में मुड़ने में सक्षम
अभी जो ईईएलएस मॉडल बनाया गया है उसका भार करीब 100 किलो है और यह चार मीटर तक लंबा हो सकता है। यह एक जैसे 10 टुकडों में बंटा हुआ है, जिसे स्क्रू कहा जाता है, जो कि किसी भी दिशा में घूम सकता है। यह रोबोट जगह के मुताबिक लंबा या छोटा हो सकता है और मुड़ने भी सक्षम है।

हर माहौल में किया जा रहा है स्नेक-रोबोट का परीक्षण
स्क्रू को 3डी प्रिंटेड प्लास्टिक के साथ-साथ धातु से बनाया गया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि प्लास्टिक स्क्रू सामान्य सतह पर अच्छा काम करता है तो धातु बर्फीली जगह के लिए फिट है। अभी तक इस रोबोट का प्रयोग रेत और बर्फीली जगहों में किया जा चुका है।

'वहां जाना है, जहां कोई रोबोट नहीं जा सका है'
इस प्रोजेक्ट के लीड इंवेस्टिगेटर हीरो ओनो ने एक बयान में कहा है, 'ऐसी कोई किताब नहीं है, जो बताए कि स्वतंत्र स्नेक रोबोट को कैसे डिजाइन किया जाए, जो वहां तक बेधड़क जाए, जहां पहले कोई रोबोट नहीं जा सका है।' उन्होंने कहा, 'हमें खुद ही लिखना है। हम अभी वही कर रहे हैं।'

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