राफेल फाइटर जेट्स, स्कॉर्पीन पनडुब्बी; फ्रांस से भारतीय सेनाओं के लिए क्या-क्या खरीदकर लाएंगे PM मोदी?
Narendra Modi France Visit: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अगले महीने फ्रांस का दौरा करने की उम्मीद है, जो अब भारत का स्ट्रैटजिक पार्टनर बन चुका है। द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, पीएम मोदी के दौरे से पहले भारत और फ्रांस के बीच दो बड़े रक्षा सौदों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi France Visit) फरवरी में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की मेजबानी में आयोजित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक्शन समिट के लिए पेरिस का दौरा करेंगे।

फ्रांस के साथ भारत क्या बड़े डिफेंस समझौते होंगे? (India-France Defence Deal)
द हिंदू के मुताबिक, इन सौदों की कुल कीमत 10 बिलियन डॉलर से ज्यादा है, जिसमें भारतीय नौसेना के एयरक्राफ्ट कैरियर्स (Aircraft Careers) के लिए 26 राफेल-एम लड़ाकू जेट और तीन अतिरिक्त स्कॉर्पीन क्लास की पारंपरिक पनडुब्बियां शामिल हैं। सूत्रों ने बताया है, कि अगले कुछ हफ्तों में इन दोनों सौदों को मंजूरी के लिए सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) के सामने रखे जाने की उम्मीद है।
एक जानकार सूत्र ने द हिंदू से कहा है, कि "उम्मीद है कि प्रधानमंत्री मोदी एआई शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए पेरिस जाएंगे और इसमें द्विपक्षीय घटक भी शामिल होगा। इसलिए दोनों पक्ष दो सौदों को अंतिम रूप देने के लिए काम कर रहे हैं, जो अंतिम चरण में हैं।" वहीं, अन्य स्रोतों से भी स्वतंत्र रूप से इसकी पुष्टि की गई है।
फ्रांस के राष्ट्रपति कार्यालय ने पहले ही घोषणा कर दी है, कि प्रधानमंत्री मोदी को 10 और 11 फरवरी को होने वाले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शिखर सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया गया है। फ्रांस ने कहा है, कि यह सम्मेलन ठोस कार्यों पर ध्यान केंद्रित करेगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके, कि वैश्विक एआई क्षेत्र सार्वजनिक हित में लाभकारी सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय परिणाम हासिल कर सके।
डिफेंस डील को लेकर आखिरी स्टेज में बातचीत
द हिंदू के मुताबिक, पिछले महीने अपनी वार्षिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक सवाल के जवाब में नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने कहा था, कि दोनों सौदे अंतिम चरण में हैं और अगले महीने पूरे हो सकते हैं। उन्होंने कहा था, कि "यह अधिग्रहण प्रक्रिया की औपचारिकताओं को पूरा करने का मामला है और हमें उम्मीद है कि अगर इस महीने नहीं तो अगले महीने, उम्मीद है कि इस (स्कॉर्पीन पनडुब्बी) और राफेल-एम सौदे पर हस्ताक्षर हो जाने चाहिए।"
वहीं, राफेल-मरीन सौदे पर नौसेना प्रमुख ने कहा था, कि इसे मंजूरी के लिए सीसीएस (सुरक्षा पर कैबिनेट समिति) के पास ले जाने से एक स्तर कम है, जिसके बाद अनुबंध पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। चूंकि यह सरकार से सरकार के बीच का सौदा है, इसलिए इसके जल्दी लागू होने की उम्मीद है।
13 जुलाई 2023 को, जब प्रधानमंत्री मोदी पेरिस जा रहे थे, उस वक्त रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने 26 राफेल-एम लड़ाकू विमानों और तीन अतिरिक्त स्कॉर्पीन श्रेणी की डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों की खरीद के लिए 'आवश्यकता की स्वीकृति' प्रदान की थी।
भारतीय नौसेना के लिए कितनी अहम है ये डील?
राफेल फाइटर जेट की खरीद में 22 सिंगल सीटर राफेल-एम जेट और चार ट्विन-सीटर राफेल ट्रेनर शामिल हैं, जो फिलहाल एयरक्राफ्ट कैरियर के अनुकूल नहीं हैं। लेकिन, 26 फाइटर जेट तब तक के लिए खरीदे जाएंगे, जब तक कि स्वदेशी ट्विन इंजन डेक-आधारित फाइटर, जिसका अभी भी डेवलपमेंट किया जा रहा है, वो सेवा में शामिल होने के लिए तैयार नहीं हो जाता।
भारतीय नौसेना वर्तमान में दो एयरक्राफ्ट कैरियर ऑपरेट करती है, जिनमें रूस से खरीदा गया INS विक्रमादित्य, और स्वदेश निर्मित INS विक्रांत है, जिसे सितंबर 2022 में कमीशन किया गया था।
वहीं, स्कॉर्पीन पनडुब्बी, नौसेना के लिए काफी महत्वपूर्ण जरूरत है, क्योंकि फिलहाल भारतीय नौसेना अपने एक पुराने बेड़े से जूझ रही है और प्रोजेक्ट-75I के तहत छह एडवांस पनडुब्बियों की खरीद में काफी ज्यादा देरी होने की संभावना है, जो अब जर्मनी और स्पेन के बीच सौदे किए फाइनल बातचीत के इंतजार में है। रिपोर्ट के मुताबिक, तीन स्कॉर्पीन पनडुब्बियों में से पहली 2031 में वितरित होने की संभावना है।
पिछले महीने, रक्षा मंत्रालय ने मौजूदा स्कॉर्पीन-क्लास की पनडुब्बियों से संबंधित ₹2,867 करोड़ के दो अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए थे। एक, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन द्वारा विकसित वायु स्वतंत्र प्रणोदन मॉड्यूल के निर्माण और ऑनबोर्ड एकीकरण के लिए है, जबकि दूसरा, डीआरडीओ द्वारा विकसित किए जा रहे इलेक्ट्रॉनिक हेवीवेट टारपीडो के एकीकरण के लिए है।












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