83 हाथी, 30 दरियाई घोड़े, 300 जेबरा; नामीबिया में सैकड़ों जंगली जानवरों को मारकर खाने का फैसला क्यों लिया गया?
Namibia plans to culls hundreds of wild animals: नामीबिया ने अपने सैकड़ों जंगली जानवरों को मारने का प्लान तैयार किया है, जिसमें हाथी और दरियाई घोड़े भी शामिल हैं। नामीबिया सरकार के इस फैसले का विरोध शुरू हो गया है, लेकिन सरकार का कहना है, कि उसे ये फैसला लेने पर मजबूर होना पड़ा है।
नाइजीरिया का कहना है, कि उसने ये फैसला लिया है, ताकि सदी के सबसे भयंकर सूखे से जूझ रही अपनी 14 लाख की आबादी में से लगभग आधी आबादी को मांस उपलब्ध कराया जा सके। प्लान के मुताबिक, सैकड़ों सबसे राजसी जंगली जानवरों, जिनमें दर्जनों हाथी और दरियाई घोड़े शामिल हैं, उन्हें मारने की योजना तैयार की गई है।

इस योजना में 723 जानवरों को मारने का प्लान तैयार किया गया है, जिनमें 30 दरियाई घोड़े, 60 भैंसे, 50 इम्पाला, 100 ब्लू वाइल्डबीस्ट, 300 जेबरा, 83 हाथी और 100 एलैंड शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 150 से ज्यादा जंगली जानवरों को पहले ही मारा जा चुका है, जिससे लगभग 63 टन मांस प्राप्त हुआ है।
नामीबिया के पर्यावरण, वानिकी और पर्यटन मंत्रालय ने 26 अगस्त को कहा है, कि "ऐसा करना आवश्यक है और हमारे संवैधानिक जनादेश के मुताबिक है, जहां हमारे प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग नामीबियाई नागरिकों के लाभ के लिए किया जाता है।"
नामीबिया पर सूखे का प्रभाव
चल रहे सूखे ने नामीबिया की खाद्य उपलब्धता को बुरी तरह प्रभावित किया है। जुलाई से सितंबर तक मक्का जैसी मुख्य फसलें सूख गई हैं, पशुधन की मृत्यु दर में भारी इजाफा हुआ है, और देश के लगभग 84% खाद्य भंडार खत्म हो गए हैं। संयुक्त राष्ट्र के एक प्रवक्ता ने 23 अगस्त को इस स्थिति को भयावह बताया है।
अप्रैल और जून 2024 के बीच तक, नामीबिया में अनुमानित 12 लाख लोगों को गंभीर खाद्य संकट का सामना करना पड़ा है और खाद्य अंतर को कम करने और आजीविका की रक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत थी। यह जानकारी जुलाई में एकीकृत खाद्य सुरक्षा चरण वर्गीकरण (आईपीसी) की तरफ से दी गई है।
नामीबिया भीषण सूखे की चपेट में कैसे फंसा?
दक्षिणी अफ्रीका में स्थित होने के कारण नामीबिया में अक्सर सूखे की स्थिति बनी रहती है। 2013, 2016 और 2019 में भीषण सूखे के कारण राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया गया था। हालांकि, मौजूदा सूखा विशेष रूप से विनाशकारी हो चुकी है। नामीबिया में वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड की जूलियन जेडलर ने द न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया है, कि स्थिति ऑउट ऑफ कंट्रोल हो चुका है।
अक्टूबर 2023 में बोत्सवाना में सूखा शुरू हुआ था और अंगोला, जाम्बिया, जिम्बाब्वे और नामीबिया तक फैल गया। यूरोपीय आयोग ने बताया है, कि अल नीनो ने अत्यधिक गर्मी और सूखे की स्थिति पैदा करके इस स्थिति में विकराल बना दिया है।
अल नीनो, दुनिया के कई हिस्सों और महासागरों में अत्यधिक गर्मी और सूखे से जुड़ा एक मौसम पैटर्न है। 2023 में सात साल बाद अल नीनो की घटना फिर से लौटी, जिससे पूरे क्षेत्र में औसत से ज्यादा तापमान और न्यूनतम वर्षा हुई है। इसकी वजह से मिट्टी की नमी पूरी पूरी तरह से सूख गई और वनस्पति सूख गये। देश अकाल में फंस गया है।

अकाल का वन्यजीवों पर भी खतरनाक असर
सरकार को डर है, कि सूखे के कारण जंगली जानवर भोजन और पानी की तलाश में जंगल से पलायन करने को मजबूर होंगे, जिससे संभावित रूप से मानव आबादी के साथ संघर्ष हो सकता है। नामीबिया में जंगली जानवरों की संख्या काफी है, जिसमें दुनिया की सबसे बड़ी हाथियों की आबादी भी शामिल है, जिनकी संख्या करीब 24,000 है।
पर्यावरण, वानिकी और पर्यटन मंत्रालय ने बयान में कहा है, कि उसे यह भी उम्मीद है कि कुछ जानवरों को मारने से वन्यजीवों पर सूखे का असर कम होगा। मंत्रालय ने कहा, कि इससे "वर्तमान चरागाह दबाव और पानी की उपलब्धता को प्रबंधित करने में मदद मिलेगी...।"
मांस के लिए जंगली जानवरों को मारना दुनिया भर में असामान्य नहीं है। जेबरा, ब्लू वाइल्डबीस्ट और इम्पाला जैसी प्रजातियों का शिकार आमतौर पर दक्षिणी अफ्रीका में भोजन के लिए किया जाता है। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के अफ्रीका कार्यालय की रोज म्वेबाजा ने इस बात पर जोर दिया, कि इन जानवरों को पकड़ने के लिए टिकाऊ तरीकों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
उन्होंने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया, "बशर्ते इन जानवरों की कटाई वैज्ञानिक रूप से सिद्ध, टिकाऊ तरीकों का उपयोग करके की जाए, जो पशु कल्याण पर विचार करते हों और घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं और कानून के मुताबिक हों।"
नामीबिया में सूखे के कारण पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में गंभीर कुपोषण की समस्या बढ़ गई है। मानवीय मामलों के समन्वय के लिए संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (OCHA) के मुताबिक, कुछ क्षेत्रों में बच्चों की मौतें भी हुई हैं। OCHA ने यह भी कहा है, कि भोजन और पानी इकट्ठा करने के लिए लंबी दूरी तय करने के कारण महिलाओं को अधिक असुरक्षित स्थिति का सामना करना पड़ता है।
कई अध्ययनों से पता चलता है कि जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते तापमान ने सूखे जैसी चरम मौसम की घटनाओं को अधिक लगातार और तीव्र बना दिया है। इससे प्रभावित क्षेत्रों में मिट्टी की नमी की कमी और वनस्पति तनाव बढ़ जाता है।
स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है, क्योंकि नामीबिया जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न सूखे से उत्पन्न चुनौतियों के बीच अपने प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन के लिए प्रयास जारी रखे हुए है।
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