मॉस्को से प्रधानमंत्री मोदी का मैसेज: युद्ध के मैदान से नहीं निकलते नतीजे, भारत-रूस में क्या-क्या बात होगी?
Modi in Russia: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने रूस दौरे में राष्ट्रपति पुतिन के साथ आज होने वाली औपचारिक बैठक के दौरान को साफ शब्दों में संदेश देने वाले हैं, कि युद्ध के मैदान से कोई नतीजे नहीं निकलते हैं। अपने तीसरे कार्यकाल की पहली द्विपक्षीय यात्रा और फरवरी 2022 में यूक्रेन पर आक्रमण के बाद रूस की पहली यात्रा में पीएम मोदी कल मॉस्को पहुंचे हैं।
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को एक स्पष्ट संदेश के साथ मास्को पहुंचे हैं, कि नई दिल्ली "एक शांतिपूर्ण और स्थिर क्षेत्र के लिए एक सहायक भूमिका निभाने" की इच्छा रखती है और दोनों पक्ष सहयोग के "भविष्य के क्षेत्रों" में अपनी "विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी" को गहरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

पीएम मोदी और पुतिन की बैठक
इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सोमवार रात मॉस्को के उपनगरीय इलाके नोवो-ओगारियोवो में पुतिन के घर डाचा में मुलाकात की और आज होने वाले 22वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन से पहले अपनी दोस्ती दुनिया को दिखाई।
सूत्रों ने कहा है, कि आज होने वाली बैठक में भारतीय पक्ष रूसियों को यह बताएगा, कि "युद्ध के मैदान में समाधान नहीं खोजा जा सकता" और इस बार प्रधानमंत्री मोदी रूसी राष्ट्रपति से युद्ध को लेकर जो कने वाले हैं, वो उज्बेकिस्तान के समरकंद एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान द्विपक्षीय बैठक के दौरान कहे गये 'युद्ध का युग नहीं है' से कहीं आगे है।
सितंबर 2022 में SCO शिखर सम्मेलन के दौरान उज्बेकिस्तान के समरकंद में मोदी ने पुतिन से कहा था, कि "यह युद्ध का युग नहीं है", और पीएम मोदी के इन शब्दों ने इंटरनेशल मीडिया में सुर्खियां बटोरी थी और इसे बाद में नवंबर में जी20 के बाली घोषणापत्र में शामिल किया गया था, और पश्चिमी नेताओं और वार्ताकारों ने रूस पर युद्ध समाप्त करने के लिए दबाव डाला था।
पुतिन ने मोदी से क्या कहा?
सोमवार को पुतिन के घर में अनौपचारिक बैठक के दौरान बैठक की प्रस्तावना के रूप में, दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से बातचीत की। दुभाषिए के जरिए हुई बातचीत के दौरान पुतिन ने मोदी से कहा, कि "परम मित्र, आपके पास बहुत सारे विचार हैं। आप बहुत ऊर्जावान हैं, और आप जानते हैं, कि भारत और भारतीय लोगों के लाभ के लिए परिणाम कैसे प्राप्त किए जाएं।"
पुतिन ने मोदी से आगे कहा, कि "और नतीजे इस बात के सबूत हैं, कि भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और जनसंख्या के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा देश है। भारत में हर साल 23 मिलियन बच्चे पैदा होते हैं, इसका मतलब है, कि लोग परिवार नियोजन कर रहे हैं और उनके पास नियोजन का एक व्यापक दायरा है। और विस्तार का मतलब है, कि लोग आत्मविश्वास महसूस कर रहे हैं और उन्हें स्थिरता का भरोसा है। इसलिए मैं आपको बधाई देता हूं और...मैं आपको फिर से देखकर बहुत खुश हूं।"
मोदी ने पुतिन से क्या कहा?
पुतिन के गर्मजोशी से भरे शब्दों के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने जवाब दिया, कि "यह बहुत खुशी का मौका है, कि आपने मुझे अपने घर आमंत्रित किया...मैं इसके लिए बहुत आभारी हूं। भारत लोकतंत्र की जननी है, इस चुनाव में लगभग 650 मिलियन लोगों ने मतदान किया...यह भारत में पिछले 60 वर्षों में पहली बार है, जब सरकार तीसरी बार फिर से चुनी गई है। पहली बार ऐसा प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के समय हुआ था। और अब, 60 साल बाद, मुझे यह मौका मिला है, कि भारत के लोगों ने मुझे भारत की सेवा करने का यह अवसर दिया है।"
पीएम मोदी ने कहा, कि "मैं सरकार में 10 साल से काम कर रहा हूं और मेरा सिद्धांत है सुधार, प्रदर्शन और बदलाव। लोगों ने इन्हीं सिद्धांतों के लिए वोट दिया है और मुझे पूरा भरोसा है, कि अपने तीसरे कार्यकाल में मैं तीन गुना ज्यादा काम करूंगा।"

पीएम मोदी का रूस दौरा क्यों है महत्वपूर्ण?
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह पिछले महीने इटली में जी-7 शिखर सम्मेलन के बाद हो रही है, जहां उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, इतालवी प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की से मुलाकात की थी। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन अपने समकक्ष अजीत डोभाल और प्रधानमंत्री मोदी से मिलने के लिए नई दिल्ली आए थे।
वहीं, अब, जब रूस के पास युद्ध में भारी बढ़त हासिल है, और इस साल के अंत में डोनाल्ड ट्रम्प के अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में फिर से आने की संभावना है, तो मोदी की यात्रा को दिल्ली की तरफ से छह महीने बाद होने वाली वैश्विक घटनाओं के लिए खुद को तैयार करने के रूप में देखा जा रहा है।
यूक्रेन युद्ध ने भारत को अपने पश्चिमी सहयोगियों के साथ एक नाजुक कूटनीतिक स्थिति में डाल रखा है। नई दिल्ली ने रूस के आक्रमण की अभी तक स्पष्ट रूप से निंदा नहीं की है, लेकिन युद्ध के शुरुआती हफ्तों में बुचा नरसंहार की अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की थी और रूसी नेताओं की तरफ से दी गई परमाणु युद्ध की धमकियों पर चिंता जताई थी।
लेकिन भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कई प्रस्तावों में रूस के खिलाफ मतदान से परहेज किया है और वोट करने की जगह गैरहाजिर रहने का विकल्प चुना है।
दिल्ली ने लगातार कहा है, कि वह "शांति, अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रति सम्मान और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के समर्थन" के पक्ष में है, और "बातचीत और कूटनीति की ओर लौटने की पुरजोर वकालत करता है।" भारत ने दोहराया है, कि राज्यों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति सम्मान अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का एक अनिवार्य तत्व है, जो रूस के आचरण पर सवाल उठाने का एक नरम कूटनीतिक तरीका है।
जब मोदी मॉस्कों में हैं, तो दुनिया में क्या हो रहा है?
गौरतलब है, कि मोदी की रूस यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (NATO) के 32 देशों के नेता 9-11 जुलाई को वाशिंगटन डीसी में रूस विरोधी सैन्य गठबंधन के 75 साल पूरे होने का जश्न मनाने के लिए जमा हो रहे हैं। और माना जा रहा है, कि पीएम मोदी ने इसी समय को अपनी रूस यात्रा के लिए चुनकर अमेरिका को संदेश दिया है, जो खालिस्तान और मानवाधिकार को लेकर भारत के साथ डबल गेम खेल रहा है।
प्रधानमंत्री की अगवानी रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव ने एयरपोर्ट पर की, जो उसी कार में उनके साथ हवाई अड्डे से होटल तक आए।
सूत्रों ने बताया है, कि मंटुरोव रूस के उप प्रधानमंत्री से वरिष्ठ अधिकारी हैं, जिन्होंने रूस की यात्रा के दौरान चीनी राष्ट्रपति की अगवानी की थी, और नई दिल्ली इसे एक विशेष इशारे के रूप में देख रहा है।
यानि, रूस ने प्रधानमंत्री मोदी की अगवानी के लिए शी जिनपिंग के मुकाबले अपने ज्यादा सीनियर नेता को भेजा था, जिसे एक जियो-पॉलिटिकल खेल के तौर पर भी देखा जा रहा है, कि रूस ने चीन को भी संदेश देने की कोशिश की है, को भले ही वो कमजोर है, लेकिन वो उसकी कमजोरी का फायदा उठाने के बारे में ना सोचे।
हालांकि, इस साल मार्च में फिर से चुने जाने के बाद पुतिन ने अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए चीन को चुना था, जिसका मकसद पश्चिमी देशों को संदेश देना था और पुतिन ने पिछले सप्ताह अस्ताना में दूसरी बार चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की थी, जो चार महीनों में उनकी दूसरी मुलाकात।
विदेश नीति में संकेतों से संदेश दिया जाता है और हर देश संकेतों में एक दूसरे को आंख दिखा रहे हैं और भारत भी यही कर रहा है।
आज प्रधानमंत्री मोदी क्रेमलिन में अज्ञात सैनिकों की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित करेंगे और मास्को में प्रदर्शनी स्थल पर रोसाटॉम मंडप का दौरा करेंगे।
इन मुलाकातों के बाद मंगलवार को दोनों नेताओं के बीच सीमित स्तर की वार्ता होगी, जिसके बाद प्रधानमंत्री और रूसी राष्ट्रपति के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता होगी। सूत्रों ने बताया है, कि इस यात्रा का फोकस आर्थिक एजेंडा है - ऊर्जा, व्यापार, विनिर्माण, उर्वरक। जबकि रक्षा और ऊर्जा संबंधों के महत्वपूर्ण चालक हैं। दोनों देश द्विपक्षीय कारोबार को एक नये आयाम पर ले जाना चाहते हैं, जो अभी अपने उच्चतम स्तर पर करीब 65 अरब डॉलर पर है।












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