Modi govt 3.0: विदेश नीति के नायक रहे एस जयशंकर या कोई और..? अगला विदेश मंत्री कौन, चौकाएंगे नरेन्द्र मोदी?
Who will be Foreign Minister of India: राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले मोदी सरकार 3.0 के शपथ ग्रहण समारोह से पहले एनडीए के सहयोगी दलों के बीच मंत्री पद के बंटवारे को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।
अमित शाह और राजनाथ सिंह जैसे नेताओं को कैबिनेट में शीर्ष मंत्री पद के लिए संभावित उम्मीदवार के तौर पर देखा जा रहा है, वहीं एनडीए खेमे के कई अन्य नेताओं के नाम भी चर्चा में हैं। सूत्रों के मुताबिक, नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जनता दल (यूनाइटेड) और चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली तेलुगु देशम पार्टी के कई नेताओं को मंत्री पद के लिए फोन किया गया है।

सूत्रों ने बताया है, कि अब तक जेडी (यू) सांसद रामनाथ ठाकुर, जेडीएस सांसद एचडी कुमारस्वामी और टीडीपी सांसद डॉ. पी चंद्रशेखर और राम मोहन नायडू को मंत्री पद के लिए फोन किया गया है। इसके अलावा, सूत्रों ने बताया है, कि लोजपा (रामविलास) प्रमुख चिराग पासवान, HAM सुप्रीमो जीतन राम मांझी, अपना दल (एस) अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल और रालोद के जयन चौधरी को भी मोदी 3.0 सरकार में मंत्री पद की शपथ दिलाए जाने की संभावना है।
लेकिन, सबसे बड़ा सवाल ये है, कि मोदी सरकार 3.0 में भारतीय विदेश मंत्रालय की कमान किसके हाथों में सौपी जाएगी?
विदेश मामलों के जानकारों का कहना है, कि एस. जयशंकर ने मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में विदेश मंत्रालय का काम काफी बेहतरीन अंदाज में संभाला है, क्योंकि एस जयशंकर के कार्यकाल के दौरान कई वैश्विक मामलों पर दुनिया ने ना सिर्फ भारत की तरफ देखा, बल्कि कई बार ऐसे पल आए, जब भारत के सामने किस रास्ते पर चलें, इस बात की दुविधा पैदा हो गई थी।
यूक्रेन युद्ध में रूस के साथ खड़ा होना है या अमेरिका के साथ, इजराइल-फिलीस्तीन युद्ध में भारत का पक्ष कैसा हो, कोविड-19 संकट के दौरान भारत दुनिया के साथ कैसे कॉर्डिनेट करे, रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत कैसे पश्चिमी देशों के विरोध का सामना करे... ये कई ऐसे अहम मुद्दे रहे हैं, जिनको लेकर एस. जयशंकर ने बेहतरीन अंदाज में भारत का पक्ष रखा। लिहाजा, विदेश मंत्री के तौर पर एस. जयशंकर का कार्यकाल शानदार रहा है।
खासकर, जयशंकर के कार्यकाल के दौरान अमेरिका और भारत के संबंधों में काफी तेजी देखने को मिली है, जबकि एस. जयशंकर ने भारत की मिडिल ईस्ट नीति को काफी बखुबी आगे बढ़ाया है। ईरान और इजराइस के बीच संतुलन बनाने के साथ ही यूरोप के साथ संबंधों को भी विस्तार दिया है।
एस. जयशंकर को भारत में हुए जी-20 शिखर सम्मेलन के सफल आयोजन का श्रेय दिया जाता है और ये जयशंकर की सफल विदेश नीति का ही नतीजा था, कि जी-20 शिखर सम्मेलन के पहले ही दिन भारत ने प्रस्ताव पास करा लिया। जो एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
ऐसा देखने को मिला है, कि प्रधाननमंत्री ने विदेश विभाग की सारी जिम्मेदारी एस. जयशंकर के कांधे पर डालकर निश्चिंत हो गये और जयशंकर ने एक भी मौके पर देश को निराश नहीं किया। लिहाजा, पूरी संभावना इसी बात को लेकर है, कि विदेश विभाग की जिम्मेदारी एक बार फिर से एस. जयशंकर को ही दी जाए।
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