मरियम नवाज ने की इमरान सरकार गिरने की तैयारी, अविश्वास प्रस्ताव पर 3 अप्रैल को मतदान
इस्लामाबाद, 29 मार्च: इमरान खान 2018 में पद संभालने के बाद से अपनी सबसे कठिन राजनीतिक परीक्षा का सामना कर रहे हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान तीन अप्रैल को होगा। गृह मंत्री शेख राशिद ने कहा कि, 31 मार्च को अविश्वास प्रस्ताव पर बहस होगी, उसके बाद तीन अप्रैल को मतदान होगा।

पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम), पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज (पीएमएल-एन) और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम फजल (जेयूआई-आई) ने सोमवार रात को इस्लामाबाद में श्रीनगर राजमार्ग पर एक बड़ी रैली का आयोजन किया। पाकिस्तान मुस्लिम लीग (एन) की उपाध्यक्ष मरियम नवाज और पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता हमजा शहबाज ने 26 मार्च को लाहौर से रैली शुरू की थी। दो दिन बाद जमीयत उलेमा और अन्य पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (PDM) दलों के समर्थक इस रैली में में शामिल होने के लिए इस्लामाबाद पहुंचे।
तीन बार प्रधानमंत्री रहे नवाज शरीफ की बेटी मरियम ने अपनी डगमगाती गद्दी को बचाने के लिए धार्मिक कार्ड का इस्तेमाल करने को लेकर मौजूदा प्रधानमंत्री खान की आलोचना की। प्रधानमंत्री खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी द्वारा उनके समर्थन में यहां एक विशाल रैली आयोजित करने के एक दिन बाद आयोजित एक रैली में मरियम ने कहा, मैं आपको चुनौती देती हूं कि आप अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान के दिन अपने साथ 172 सांसद लेकर आएं।
उन्होंने सरकार द्वारा पाकिस्तान मुस्लिम लीग-कायद पार्टी का समर्थन हासिल करने के लिए पंजाब के मुख्यमंत्री उस्मान बुजदार की जगह चौधरी परवेज इलाही को पद सौंपने का फैसला किए जाने के बाद खान पर अपनी सीट बचाने के लिए अपने सबसे भरोसेमंद बुजदार को दरकिनार करने का आरोप लगाया। मरियम ने कहा, ''आपने अपनी सत्ता बचाने के लिए अपने सबसे भरोसेमंद आदमी (बुजदार) को कुएं में धकेल दिया। हमने अपने पूरे जीवन में ऐसा एहसान फरामोश शख्स नहीं देखा।''
उन्होंने यह भी कहा कि खान ने उन्हें सत्ता से हटाने के लिए विदेशी साजिश का दावा किया है। मरियम ने एक दिन पहले रैली में एक फर्जी चिट्ठी दिखाने के लिए खान को दोषी ठहराया। उन्होंने कहा कि खान ने लोगों का विश्वास खो दिया है, जो हाल के महीनों में 16 में से 15 उपचुनावों में सत्ताधारी पार्टी की हार से साबित होता है। कई अन्य पीडीएम नेताओं ने भी सभा को संबोधित किया और उन्होंने अपनी रैली को धरने में बदलने की भी घोषणा की और कहा कि अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान होने तक उनके कार्यकर्ता डेरा डाले रहेंगे।
विपक्ष ने आठ मार्च को नेशनल असेंबली को अविश्वास प्रस्ताव सौंपा था। इस प्रस्ताव के मद्देनजर रैली का आयोजन किया गया था। खान 2018 में 'नया पाकिस्तान' बनाने के वादे के साथ सत्ता में आए थे, लेकिन वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रण में रखने की बुनियादी समस्या को दूर करने में बुरी तरह विफल रहे, जिससे विपक्ष को उनकी सरकार पर हमला करने का मौका मिल गया।












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