यूक्रेन युद्ध ने गिरा दी नीदरलैंड में सरकार, शरणार्थियों के मुद्दे पर गठबंधन में नहीं बन पाई सहमति
नीदरलैंड के प्रधानमंत्री मार्क रट के नेतृत्व वाली सरकार गिर गई है। साल 2010 से नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रहे मार्क रट को इस्तीफा देना पड़ा है। इमीग्रेशन पॉलिसी पर विवाद बढ़ने के कारण ही पीएम रट को अपना पद को कुर्सी छोड़नी पड़ी।
रट की सरकार में शामिल गठबंधन दल इमीग्रेशन पॉलिसी पर एक समझौते पर पहुंचने में विफल रहे। इस वजह से गठबंधन सरकार में मतभेदों की बात सामने आने लगी। बात इतनी बढ़ी कि मार्क रुट सरकार की बलि चढ़ गई।

देश में सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहे मार्क रट के इस्तीफा देने के बाद इस साल आम चुनाव की घोषणा कर दी गई है। हालांकि आम चुनाव होने तक रट और उनके नेतृत्व वाली सरकार नई सरकार बनने तक कामकाज संभालेगी।
इस्तीफा देने के बाद पीएम रट ने राजधानी हेग में कहा, 'इमीग्रेशन की नीति पर गठबंधन में मतभेद की बात अब छिपी नहीं है। दुर्भाग्य से हम इसी नतीजे पर पहुंचे कि ये मतभेद परस्पर विरोधी हैं। इसलिए मैंने तुरंत किंग को पत्र लिखकर पूरी कैबिनेट के इस्तीफे की पेशकश की है।'
इसके बाद विपक्षी दलों के सांसदों ने भी बिना समय गंवाए नए चुनावों की मांग कर दी। आव्रजन विरोधी 'पार्टी फॉर फ्रीडम' के नेता गीर्ट विल्डर्स ने भी ट्वीट कर जल्द चुनाव की मांग कर डाली।
बता दें कि बाकी यूरोपीय देशों की तरह नीदरलैंड में भी शरणार्थियों को लेकर विवाद है। यूक्रेन युद्ध के बाद यूक्रेनी शरणार्थियों की बड़ी संख्या नीदरलैंड में रह रही हैं। देश की विपक्षी पार्टियां नहीं चाहतीं कि शरणार्थियों या आव्रजकों की संख्या और बढे़।
पीएम रट की पार्टी पीपुल्स पार्टी फॉर फ्रीडम एंड डेमोक्रेसी के घनघोर दक्षिणपंथी वाले सदस्यों का मानना है कि देश पर शरणार्थियों की संख्या का बोझ बढ़ रहा है और शरणार्थियों की संख्या को कम करने के लिए कार्रवाई करना आवश्यक है।
लेकिन गठबंधन में लिबरल पार्टियों के रूप में देखी जाने वाली D66 पार्टी और ईसाई संघ ने पीएम रट को चेतावनी दे डाली कि वे ऐसे किसी भी उपाय का समर्थन नहीं करेंगे जिससे शरणार्थियों के लिए नीदरलैंड आना और अधिक कठिन हो जाएगा।
नीदरलैंड में 18 महीने पहले ही रट के नेतृत्व में सरकार बनी थी। मार्क दक्षिणपंथी विचारधारा वाले दल के नेता हैं। वे अप्रवासियों की संख्या को कम कराने की कोशिश में थे ताकि शरणार्थी के मुद्दे पर अपनी ही पार्टी में हो रहे विरोध को कम कर सकें। लेकिन सरकार में गठबंधन में शामिल लिबरल नहीं माने।
सरकार गिरने के बाद चुनाव आयोग ने कहा कि देश में नवंबर के मध्य में नए चुनाव कराये जा सकते हैं। पीएम रट ने कहा कि वह नवंबर के मध्य में नए चुनाव होने तक कार्यवाहक सरकार का नेतृत्व करेंगे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि सरकार यूक्रेन के लिए समर्थन सहित कार्यों पर ध्यान केंद्रित करेगी।












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