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सियालकोट में श्रीलंकाई नागरिक को बचाने के लिए भीड़ से भिड़ गए थे मलिक अदनान, इमरान ख़ान ने तमग़ा-ए-शुजात देने का किया एलान

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने सियालकोट के उस फ़ैक्ट्री कर्मचारी को तमग़ा-ए-शुजात सम्मान देने का एलान किया है जिसने शुक्रवार को श्रीलंकाई नागरिक प्रियांथा दियावदाना को गुस्साई भीड़ से बचाने की को कोशिश की थी.

हालांकि उनकी तमाम कोशिशों के बावजूद उग्र भीड़ प्रियांथा को खींच कर ले गई और उन्हें पीट-पीट कर मार डाला, इसके बाद उनके शव को आग लगा दी.

रविवार को प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने मलिक अदनान नाम के इस शख़्स को पाकिस्तान का चौथा सबसे बड़ा बहादुरी पुरस्कार देने का एलान किया.

मलिक अदनान ने एक स्थानीय न्यूज़ चैनल से कहा कि वह मानवता को बचाने की कोशिश कर रहे थे.

राजको इंडस्ट्रीज़ में प्रोडक्शन मैनेजर मलिक अदनान का प्रियंथा दियावदाना को बचाने की कोशिश का एक वीडियो शनिवार को वायरल हो गया.

इस वीडियों में भीड़ फ़ैक्ट्री के मैनेजर प्रियांथा पर टूट पड़ी है, लेकिन लाल स्वेटर पहना अकेला एक शख़्स उन्हें बचाने की कोशिश करता नज़र आ रहा है.

वीडियो में अदनान भीड़ से विनती करते हुए दिख रहे हैं और प्रियांथा को हमलों से अपने सिर और शरीर के ऊपरी हिस्से से बचा रहे हैं, श्रीलंकाई नागरिक अदनान के पैरों से चिपके हुए हैं और भीड़ से बचने की कोशिश कर रहे हैं.

वीडियों में थोड़ी देर बाद अदनान प्रियांथा के ऊपर पूरी तरह झुक कर उन्हें कवर देने की कोशिश करते हैं, लेकिन भीड़ श्रीलंकाई नागरिक को छत से नीचे फेंकने के लिए अदनान से छीनने की कोशिश करती है. वीडियो में भीड़ को ये कहते हुए सुना जाता है कि "वह (प्रियांथा) आज नहीं बचेगा."

इस घटना का एक और वीडियो सामने आया है जिसे फैक्ट्री के अंदर रिकॉर्ड किया गया है, वीडियो में अदनान फैक्ट्री के कर्मचारियों को मनाने की कोशिश कर रहे हैं. ये वीडियो गुस्साई भीड़ के छत पर पहुंचने से पहले रिकॉर्ड किया गया.

सोशल मीडिया पर कुछ यूज़र्स का दावा है कि अदनान ने भीड़ को लगभग 45 मिनट तक रोके रखा.

इमरान ख़ान ने किया सलाम

पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने रविवार को अदनान के "नैतिक साहस और बहादुरी" को सलाम किया और कहा कि उन्होंने अपना जीवन दांव पर लगा कर प्रियांथा को बचाने की कोशिश की.

प्रधानमंत्री ने मलिक अदनान के लिए देश के चौथे सबसे बड़े बहादुरी पुरस्कार तमग़ा-ए-शुजात की घोषणा की.

प्रधानमंत्री ने एक ट्वीट में कहा, "देश की ओर से मैं मलिक अदनान के नैतिक साहस और बहादुरी को सलाम करना चाहता हूं, जिन्होंने सियालकोट में गुस्साई भीड़ से प्रियांथा दियावदाना को बचाने की पूरी कोशिश की, उन्होंने पीड़ित को बचाने के लिए शारीरिक रूप से अपनी जान को ख़तरे में डाला. हम उन्हें तमग़ा-ए-शुजात पुरस्कार देंगे."

https://twitter.com/ImranKhanPTI/status/1467484145530011648

सियालकोट पुलिस के एक प्रवक्ता ने भी मलिक अदनान की बहादुरी की प्रशंसा की और कहा कि वह जांच में सहायता कर रहे हैं और उन्हें सुरक्षा दी जा रही है.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने इससे पहले इस घटना को पाकिस्तान के लिए एक शर्मनाक दिन बताते हुए कहा था कि वो इसकी जांच को ख़ुद देख रहे हैं और दोषियों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई होगी.

इमरान ख़ान ने ट्विटर पर लिखा, "सियालकोट की फ़ैक्ट्री में हुआ हमला और श्रीलंकाई मैनेजर को ज़िंदा जला दिया जाना पाकिस्तान के लिए एक शर्मनाक दिन है. मैं ख़ुद इसकी जांच को देख रहा हूं. जो भी इसके लिए ज़िम्मेदार हैं, उन्हें सज़ा दी जाएगी. गिरफ़्तारियां की जा रही हैं."

मानवता के लिए प्रियांथा की ढाल बने

श्रीलंकाई नागरिक प्रियांथा दियावदाना साल 2012 से सियालकोट कारखाने में निर्यात प्रबंधक के रूप में काम कर रहे थे.

पंजाब पुलिस की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के अनुसार, विवाद तब शुरू हुआ जब अनुशासन के सख्त फैक्ट्री प्रबंधक प्रियांथा ने फ़ैक्ट्री से कुछ धार्मिक स्टिकर हटाने की मांग की जिससे कर्मचारी नाराज़ हो गए.

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जब भीड़ भड़क गई तो श्रीलंकाई मैनेजर को फैक्ट्री के अंदर प्रताड़ित किया गया. प्रोडक्शन मैनेजर मलिक अदनान समेत कुछ लोगों ने गुस्साए लोगों को मनाने की कोशिश की ताकि किसी तरह इस मसले को सुलझाया जा सके.

श्रीलंकाई नागरिक
Getty Images
श्रीलंकाई नागरिक

स्थानीय मीडिया से बात करते हुए, मलिक अदनान ने कहा कि वह इस सम्मान के लिए इमरान खान के आभारी हैं.

उन्होंने कहा कि वह मानवता की ख़ातिर अपने सहयोगी को बचाना चाहते थे और इसीलिए जब भीड़ उन्हें मारने आई तो श्रीलंकाई नागरिक के सामने दीवार बन कर खड़े हो गए. लेकिन उन्हें बचा नहीं सके.

मलिक अदनान ने कहा कि घटना के दौरान वह भी घायल हो गए.

उन्होंने बताया कि ''प्रियांथा अपने काम को लेकर ईमानदार और सख्त थे.''

'' जब मैंने शोर सुना, देखा कि चालीस-पचास लोग प्रियंथा की ओर आ रहे थे. मैं छत की सीढ़ियों की ओर दौड़ा, जब छत पह पहुंचा तो देख कि मेरे आने से पहले ही प्रियंथा के सिर और चेहरे पर चोट के निशान थे.''

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