Maldives: विपक्ष के महाभियोग से डरे राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू, पहुंचे सुप्रीम कोर्ट, भारत से उलझने का अंजाम?

Maldives Opposition impeach president: मालदीव के चीन परस्त राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की कुर्सी डोल रही है और ऐसा लग रहा है, कि महाभियोग के जरिए उन्हें सत्ता से हटाया जा सकता है। वहीं, कई एक्सपर्ट्स का कहना है, कि भारत जैसे पड़ोसी देश से सीधे तौर पर उलझने का ऐसा अंजाम होगा, शायद मोहम्मद मुइज्जू ने सोचा नहीं था।

मंगलवार को मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, मुख्य विपक्ष पार्टी ने मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू पर महाभियोग चलाने की अपनी योजना की घोषणा कर दी है, लेकिन सरकार ने संसद के स्थायी आदेशों में हालिया संशोधन को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जो महाभियोग की प्रक्रिया को आसान बनाता है।

Maldives Opposition impeach president

सुप्रीम कोर्ट पहुंचे राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू

अटॉर्नी जनरल के कार्यालय ने रविवार को मामला दर्ज कर लिया है, और ये वही दिन था, जब राष्ट्रपति के मंत्रिमंडल के चार सदस्यों की मंजूरी पर मतभेद के बाद सरकार समर्थक सांसदों और विपक्षी सांसदों के बीच सदन में मारपीट हुई थी।

मालदीव की संसद में बहुमत रखने वाली मुख्य विपक्षी मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी (एमडीपी) ने सोमवार को राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के मंत्रिमंडल के तीन सदस्यों की मंजूरी रोक दी थी।

आपको बता दें, कि मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी (एमडीपी) भारत समर्थक पार्टी है, जिसके मोदी सरकार से काफी मजबूत संबंध रहे हैं। मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी की जब मालदीव में सरकार थी, तो मोदी सरकार ने मालदीव में करोड़ों डॉलर के विकास कार्यों की नींव रखी थी।

लिहाजा, संसद में मारपीट होने के फौरन बाद, एमडीपी ने घोषणा की थी, कि उसने राष्ट्रपति मुइज्जू पर महाभियोग चलाने के लिए एक प्रस्ताव प्रस्तुत करने की योजना बनाई है और उसने पहले ही इसके लिए हस्ताक्षर एकत्र करना शुरू कर दिया है।

हालांकि, सोमवार शाम तक तीनों मंत्रियों को फिर से नियुक्त कर दिया गया।

दरअसल, मुइज्जू के प्रशासन में शीर्ष पद संभालने के लिए तीन कैबिनेट मंत्रियों को अनुमति देने या न देने को लेकर पूरा विवाद नवंबर में सात सांसदों के संसद से इस्तीफा देने के बाद शुरू हुआ था।

Maldives Opposition impeach president

ऑनलाइन समाचार पोर्टल Sun.mv ने मंगलवार को बताया, कि "चुनाव आयोग ने उपचुनाव न कराने का फैसला किया है, क्योंकि इस साली साल मार्च महीने में ही संसदीय चुनाव होने हैं।"

स्थिति का लाभ उठाते हुए, मुख्य विपक्षी एमडीपी ने संसद के स्थायी आदेशों में संशोधन किया, ताकि सांसदों की कुल संख्या निर्धारित करते समय खाली सीटों की गणना न की जाए। यानि, अगर संसद में वोटिंग होती है, तो जो सात संसदीय सीट खाली हैं, उनके वोट गिनती नहीं किए जाएंगे।

इसलिए, संसद को वर्तमान में राष्ट्रपति मुइज्जू पर महाभियोग चलाने के लिए पिछले 58 के बजाय 54 वोटों की ही जरूरत है, क्योंकि स्थायी आदेशों में संशोधन के मुताबिक, सांसदों की कुल संख्या अब 87 के बजाय 80 हो चुकी है।

पिछले हफ्ते, मुख्य विपक्षी पार्टी एमडीपी और उसकी सहयोगी डेमोक्रेट्स पार्टी ने "सरकार को जवाबदेह बनाए रखने के लिए" संसद में एक साथ काम करने के लिए गठबंधन की घोषणा की थी।

ऑनलाइन समाचार पोर्टल Sun.mv ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, कि "MDP और डेमोक्रेट्स के पास संसद में 56 सांसद हैं, एमडीपी के 43 सांसद और डेमोक्रेट के 13 सांसद। इसलिए, अगर वे चाहें तो उनके पास राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाने की शक्ति है।" यानि, ये दोनों मिलकर राष्ट्रपति को उनके पद से हटा सकते हैं।

अटॉर्नी जनरल अहमद उशाम ने मंगलवार दोपहर सन.कॉम को बताया, कि उनके कार्यालय ने "रविवार को सुप्रीम कोर्ट में मामला दायर किया है, लेकिन अदालत ने अभी तक मामला दर्ज नहीं किया है।" सोमवार को, एमडीपी के एक सांसद ने पुष्टि की है, कि पार्टी ने महाभियोग प्रस्ताव दायर करने के लिए पर्याप्त हस्ताक्षर एकत्र कर लिए हैं। लेकिन पार्टी ने अभी तक इसे संसद में जमा नहीं किया है।

चीन समर्थक 45 साल के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने पिछले साल सितंबर में हुए राष्ट्रपति पद के चुनाव में भारत समर्थक उम्मीदवार और तत्कालीन राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह को हरा दिया था। और उसके बाद से ही मोहम्मद मुइज्जू ने कई ऐसे फैसले किए हैं, जिनसे भारत और मालदीव के संबंध तनावपूर्ण हो गये हैं।

24 जनवरी को, भारत को "सबसे पुराना सहयोगी" बताते हुए, एमडीपी और डेमोक्रेट्स ने मुइज्जू सरकार के "भारत विरोधी रुख" के बारे में चिंता जताई है।

मालदीव की भारत से नजदीकी, लक्षद्वीप में मिनिकॉय द्वीप से बमुश्किल 70 समुद्री मील और मुख्य भूमि के पश्चिमी तट से 300 समुद्री मील की दूरी, और हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर) के माध्यम से चलने वाले वाणिज्यिक समुद्री मार्गों के केंद्र पर इसका स्थान इसे महत्वपूर्ण बनाता है, लिहाजा मालदीव का सामरिक महत्व भारत के लिए काफी बढ़ जाता है।

मालदीव IOR में भारत का प्रमुख समुद्री पड़ोसी है और नरेंद्र मोदी सरकार की SAGAR (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) और पड़ोसी प्रथम नीति जैसी पहलों में एक विशेष स्थान रखता है।

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