एक दिन में 20 करोड़ की रिकॉर्डतोड़ शॉपिंग, कोरोना के खिलाफ कुछ यूं फूटा गुस्सा

एक दिन में 20 करोड़ की रिकॉर्डतोड़ शॉपिंग, कोरोना के खिलाफ कुछ यूं फूटा गुस्स

अशोक कुमार शर्मा। ऐशोआराम की जिंदगी जीने वालों के लिए कोरोना एक क्रूर खलनायक बन गया है। दुनिया में ऐसे लोगों की कमी नहीं है जिनके पास बेशुमार दौलत है। ऐसे लोग मौज-मस्ती के लिए पैसा पानी की तरह बहाते हैं। लेकिन जानलेवा कोरोना ने इन्हें घरों में कैद कर दिया है। कोरोना मोगांबो की तरह खुश है कि उसने फिजुलखर्ची और गुलछर्रे उड़ाने वाले लोगों पर नकेल कस दी है। दूसरी तरफ घरों में कैद धन के मतवाले दिनरात कोरोना को कोस रहे हैं। इन्होंने कोरोना खिलाफ गुस्सा उतारने के लिए एक नया रास्ता खोजा है और वह है अंधाधुंध शॉपिंग।

 बिन लग्जरी सब बेकार

बिन लग्जरी सब बेकार

कोरोना ने सुविधोभोगियों की जिंदगी को नर्क बना दिया है। पार्टी, पीना-पिलाना, शॉपिंग, घूमना-फिरना सब बंद है। कई दिनों से घरों में बंद जिंदगी बेमजा हो गयी है। जाहिर है ऐसे लोगों के मन में कोरोना के खिलाफ गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। चीन के ग्वांगझू शहर में दो महीने के बाद जैसे ही लॉकडाउन खत्म हुआ लोग खरीदारी करने के लिए टूट पड़े। कोरोना पर गुस्सा उतारने के लिए ऐसी रिवेंज मार्केटिंग हुई कि एक नया रिकॉर्ड बन गया। ग्वांगझू शहर के हर्मीज बुटिक में एक ही दिन लोगों ने 20 करोड़ रुपये से अधिक के लाइफस्टाइल प्रोडक्ट खरीद डाले। चीन के किसी एक बुटिक में, एक ही दिन में, आज तक इतनी बिक्री नहीं हुई थी। यह चीन में एक दिन की सर्वाधिक बिक्री का नया रिकॉरेड है। लॉकडाउन के बाद इस खरीदारी को रिवेंज शॉपिंग कहा जा रहा है।

चीन में रिवेंज शॉपिंग

चीन में रिवेंज शॉपिंग

हर्मीज फ्रांस का मशहूर फैशन ब्रांड है। हर्मीज फैशन हाउस की स्थापना फ्रांस के थियरी हर्मीज ने 1837 में की थी। शुरू में यह कंपनी घोड़े का साजोसामान बनाती थी लेकिन बाद में यह दुनिया का मशहूर फैशन ब्रांड बन गयी । यह कंपनी चमड़े का बैग, बेल्ट, रेडी टू वियर, परफ्यूम, ज्वैलरी जैसे लाइफ स्टाइल प्रोडक्ट के लिए विख्यात है। चीन में लॉकडाउन खत्म होने के बाद शनिवार 11 अप्रैल को ग्वांगझू शहर (ग्वांगडोंग प्रांत की राजधानी) के हर्मीज स्टोर के बाहर लोगों की लंबी कतार लग गयी। कपड़े, परफ्यूम, बैग. ज्वेलरी खरीदने के लिए लोग घंटों कतार में खड़े रहे । उस दिन इस स्टोर से 2.7 मिलियन डॉलर यानी करीब 20 करोड़ रुपये की खरीदारी की गयी। चीन में कम्युनिस्ट शासन के बावजूद पिछले कुछ साल में लक्जरी मार्केट का विस्तार हुआ है। डिजिटल क्रांति के इस दौर में चीन में सुविधाभोगी लोगों की संख्या तेजी से बढ़ी है। ग्वांगझू शहर को चीन में धनिकों का शहर माना जाता है। 2003 में सार्स वायरस के फैलाव के बाद भी चीन में बंदिशें लागू की गयीं थी। उस समय भी जब प्रतिबंध हटाये गये तो लोगों ने जम कर खरीदारी की थी। ग्वांगझू शहर में अफरात पैसे के कारण बुराइयां भी पैदा हुई हैं। 1949 में कम्युनिस्ट शासन की स्थापना के बाद चीन में जुआ और वेश्यावृत्ति गैरकानूनी है। इसके बावजूद इस शहर में चोरी छिपे कई जुआघर चलते हैं। सेक्सवर्करों की भी बड़ी संख्या है। छह साल पहले चीन की सरकार ने इस शहर में एक लंबा अभियान चलाया था जिसमें करीब 30 हजार लोगों को जुआ और वेश्यावृत्ति के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। ग्वांगझू के लोग सुख, ऐश्वर्य और आनंद के लिए पैसा खर्च करने में बिल्कुल गुरेज नहीं करते। ऐसे लोग जब घरों की कैद से निकले तो पिछले शनिवार को रिकॉर्डतोड़ खरीदारी कर डाली।

 ये दूरी है जरूरी

ये दूरी है जरूरी

असीम सुख की लालस इंसान को कितनी परेशानी में डाल देती है, इसका जीता जागता उदाहरण है स्वीडन। जब फरवरी-मार्च में सारा यूरोप कोरोना के कहर से बेहाल था उस समय स्वीडन में लोग मौज मस्ती कर रहे थे। 30 मार्च तक स्वीडन में कोरोना से 110 लोग मारे जा चुके थे फिर भी वहां रेस्तरां, बार ,पब, क्लब, सैलून खुले हुए थे। उस समय तक वहां लॉकडाउन लागू नहीं किया गया था। सिर्फ इतना ही प्रतिबंध था कि एक जगह 50 से अधिक लोग जमा नहीं हो सकते। इसका फायदा उठा कर लोग झुंड के झुंड शराब पीने के लिए पब और बार में जाते रहे। हद तो ये थी कि लोग मौसम का आनंद उठाने के लिए घरों से बाहर निकलते रहे। सर्दियों के बाद जब यहां गर्मी का मौसम शुरू हुआ तो लोग कोरोना के खौफ के बीच भी तफरीह करने लगे। 50 लोगों से अधिक के जमा होने पर रोक क्या कोई रोक थी ? बेइंतहां मौज की तमन्ना आखिरकार स्वीडन पर भारी पड़ गयी। 18 दिन बाद ही अब इस देश की तस्वीर बदल चुकी है। 19 अप्रैल तक स्वीडन में कोरोना से मरने वालों की संख्या 1511 पहुंच गयी जब कि संक्रमितों की आंकड़ा तेरह हजार के पार चला गया है।

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