Science News: आपकी लाइफ से जुड़े हैं ये 9 रिसर्च
बेंगलुरु। दुनिया भर के वैज्ञानिक हर रोज कोई न कोई खोज करते हैं। खोज छोटी हो या बड़ी। वह महज अध्ययन हो या फिर नई खोज, विज्ञान तो विज्ञान ही है। खैर हम यहां आपको बतायेंगे 2015 में हुए बड़े रिसर्च से जुड़ी खबरें।
1. ज्यादा सैलरी यानी नो सिगरेट
आम इसे मजाक समझ रहे होंगे, लेकिन पेरेलमैन स्कूल ऑफ मेडिसिन, यूनिवर्सिटी ऑफ पेनीसिल्वेनिया में हाल ही में हुए एक अध्ययन से पता चला है कि सैलरी बढ़ाने और कंपनी द्वारा आकर्षक भत्ते दिये जाने से लोगों ने सिगरेट छोड़ दी। इसके पीछे सिर्फ एक फंडा था। कंपनियों ने उन मुलाजिमों को ज्यादा हाइक दिया, जो स्मोकिंग नहीं करते हैं। और तो और स्मोकिंग नहीं करने वालों को ज्यादा इनसेंटिव भी।
ऐसी ही 25 कंपनियों पर अध्ययन करने के बाद पता चला कि ज्यादा अच्छे हाइक के चक्कर में ज्यादातर लोगों ने सिगरेट छोड़ दी।
2. मोटापे की वजह से कम होता है लव हार्मोन
हाल ही में लंदन के एक रिसर्च इंस्टीट्यूट में हुए अध्ययन के अनुसार मोटापे का असर लव हार्मोन पर भी पड़ता है। लव हार्मोन यानी ऑक्सीटोसिन, जिसका रिसाव किस या यौन क्रिया के दौरान होता है। जो लोग मोटे होते हैं उनके अंदर इस हार्मोन की कमी हो जाती है।
और भी हैं रोचक रिसर्च पढ़ें स्लाइडर में-

व्यायाम से कम होता है मौत का जोखिम
'ब्रिटिश जर्नल ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन' में प्रकाशित- 15 हजार लोगों पर किए गए इस अध्ययन में पता चला कि रोजाना आधा घंटा से कम समय तक थोड़ा सा भी व्यायाम करने वाले लोगों के स्वास्थ्य में कोई भी ऐसे लक्षण नहीं मिले, जो मौत का कारण बन सकते हैं। वहीं व्यायाम की अवधि रोजाना एक घंटा से अधिक होने पर जोखिम में 32 से 56 फीसदी की कमी दर्ज की गई।

स्मार्टफोन के कैमरे से आंख के कैंसर की पहचान
ब्रिटेन के चाइल्डहुड आई कैंसर ट्रस्ट के मुताबिक, स्मार्टफोन के कैमरे के फ्लैश आसानी से रेटिनाब्लास्टोमा की पहचान कर सकते हैं। रेटिनाब्लास्टोमा एक तरह का नेत्र कैंसर है, जो आमतौर पर बच्चों में होता है। इस बीमारी से आंखों के रेटिना में ट्यूमर की समस्या उत्पन्न हो जाती है। जब किसी बच्चे की आंख के भीतर ट्यूमर बढ़ता है तो फ्लैश फोटो में सफेद छाया के रूप में उसका प्रतिबिंब दिखाई देता है। इसकी जल्द पहचान कर बच्चे की दृष्टि, उसकी आंख और जिंदगी बचाई जा सकती है।

केवल कैंसर कोशिकाओं को मारना हुआ संभव
युनिवर्सिटी ऑफ वाटरलू के शोधकर्ताओं ने नये कणों की खोज की है, जो कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने के दौरान स्वस्थ कोशिकाओं को कोई नुकसान नहीं पहुंचाते।

कैंसर रोधी गुणों वाला पौधा
भारतीय वैज्ञानिकों के दल ने पश्चिमी घाट में एक दुर्लभ प्रजाति के पौधे की खोज की, जो कैंसर जैसी घातक बीमारी के इलाज में मददगार साबित हो सकता है। इस पौधे का वानस्पतिक नाम 'मिक्वेलिए डेंटते बड्ड' है, जो एक छोटी लता झाड़ी है और कैंसर रोधी एल्केलॉइड 'कैंपटोथेसिन' (सीपीटी) उत्पन्न करता है। यह कोदागु (कर्नाटक) में मेदिकेरी जंगल में कहीं-कहीं पाया जाता है।

पता चलेगा चिकनगुनिया है या नहीं
अमेरिका के 'वेक्टर टेस्ट सिस्टम्स इंक' ने ऐसा उपकरण बनाया है जो मरीज में चिकनगुनिया संक्रमण का घंटे भर के अंदर पता लगा सकता है। वर्तमान में चिकनगुनिया की रिपोर्ट आने में एक हफ्ता लगता है। चिकनगुनिया संक्रमित मादा एडीज मच्छर के काटने से होता है तथा संक्रमित व्यक्ति को बुखार, दर्द और मांसपेशियों तथा जोड़ों में सूजन की समस्या होती है। इसके अलावा सिर में दर्द और खराश की शिकायत भी हो सकती है।

बच्चों के लिये खतरनाक है एंटीब्योटिक
यूनिवर्सिटी ऑफ मिनेसोटा में हाल ही में किये गये अध्ययन में पता चला कि नवजात शिशुओं को एंटीब्योटिक देने से आगे चलकर उन्हें एलर्जी, मोटापा, आदि बीमारियां हो जाती हैं। आगे चलकर उनकी प्रतिरक्षण प्रणाली भी कमजोर पड़ जाती है।

फिंगर प्रिंट से ड्रग्स का पता चलेगा
यूनिवर्सिटी ऑफ सर्रे में हुए एक नई तकनीक इजाद की है, जिसमें महज फिंगर प्रिंट से पता चल जायेगा कि व्यक्ति ने ड्रग्स का सेवन करता है या नहीं। इसमें पता चल जायेगा कि व्यक्ति ने कोकीन ली है या नहीं।












Click it and Unblock the Notifications