लैंसेट स्टडी का दावा- कोविड की गंभीरता से सुरक्षित रख रही है ये चीज
नई दिल्ली, 08 फरवरी। दुनिया भर के कई देश कोरोना महामारी की तीसरी लहर की चपेट में हैं। वहीं शुरूआत से कहा जा रहा है कोरोना से बचाव के लिए एकमात्र उपाय वैक्सीनेशन है। इतना ही नहीं अगर कोरोना की चपेट में आ भी जाते हैं तो कोरोना वैक्सीन अगर लगी है तो कोरोना को ये वैक्सीन गंभीर नहीं होने देगी। ये बात हाल ही में वैज्ञानिकों द्वाार की गई स्टडी में प्रूफ हो चुकी है।

हाल ही में हुआ है ये शोध
द लैंसेट जर्नल में पब्लिश रिसर्च के अनुसार, वैक्सीनेशन, कोरोना की गंभीर बीमारी से बचाव का सबसे कारगर उपाय हो सकता है। कोविड 19 संक्रमण के खिलाफ वैक्सीन से डेवलेप हुई इम्युनिटी कुछ महीनों के भीतर खत्म हो जाती है, लेकिन गंभीर COVID-19 मामलों में बचाने में ये सबसे बेहतर बनी रहती है। इसके साथ ही रिसर्च में बताया गया कि इस्तेमाल किए गए टीके के प्रकार के आधार पर सुरक्षा अलग-अलग गति से कम हो जाती है।
गंभीर बीमारियों से बचा करा रखती है वैक्सीन
शोधकर्ताओं ने कहा कि इस्तेमाल किए गए टीके के प्रकार के आधार पर प्रतिरक्षा अलग-अलग तो हो सकती है लेकिन वैक्सीन को कोरोना के गंभीर रोग से बचाव के लिए बहुत प्रभावी साबित हुई है। स्वीडन के उमिया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर पीटर नॉर्डस्ट्रॉम ने कहा "बुरी खबर यह है कि वैक्सीन की दूसरी खुराक के सात महीने बाद एंटीबॉडीज कम तो होती है और संक्रणम होने के चांस बढ़ जाते है। हालांकि, अच्छी खबर यह है कि अस्पताल में भर्ती होने या मृत्यु की ओर ले जाने वाली गंभीर बीमारियों से वैक्सीन उस स्थिति में सुरक्षा दे सकती है। इसलिए टीकाकरण बहुत महत्वपूर्ण है।"
17 लाख व्यक्तियों पर हुआ ये अध्यन
अध्ययन स्वीडन की पब्लिक हेल्थ एजेंसी, राष्ट्रीय स्वास्थ्य और कल्याण बोर्ड और सांख्यिकी स्वीडन के रजिस्ट्री-डेटा पर आधारित एक राष्ट्रव्यापी पर नजर डालने संबंधी अध्ययन है। मुख्य विश्लेषण में लगभग 17 लाख व्यक्ति शामिल हुए, और परिणाम लगभग 4 मिलियन व्यक्तियों की एक बड़ी आबादी में भी पुष्टि की गई थी।
कोरोना गंभीर तो हुआ लेकिन सही हो गया
परिणामों से पता चला कि किसी भी गंभीर संक्रमण के खिलाफ सुरक्षा दूसरी खुराक के एक महीने बाद हुई और कोरोना से होने वाली गंभीर बीमारी से बचा रहा। फाइजर और मॉडर्ना की दोनों डोज वैक्सीनेशन के छह महीने बाद, संक्रमण के खिलाफ प्रतिरक्षा 59 प्रतिशत और फाइजर वैक्सीन लगवाने वालों में 29 प्रतिशत प्रतिरक्षा बनी रही। शोधकर्ताओं ने कहा कि एस्ट्राजेनेका के लिए एक महीने और उसके बाद से कोई सुरक्षा नहीं बची है। वो मरीज जो अस्पताल में भर्ती थे और थोड़े गंभीर थे, या जिन मरीजों को संक्रमण के 30 दिन हो गए, उनमें वैक्सीन सुरक्षा बेहतर बनाए रखी गई थी।
परिणाम वैक्सीन की तीसरी डोज लेने का संकेत दे रहे
उमिया विश्वविद्यालय में डॉक्टरेट के छात्र और अध्ययन के को-राइटर मार्सेल बॉलिन ने कहा, "परिणाम वैक्सीन की तीसरी डोज लेने का संकेत दे रहे हैं और समर्थन करते हैं। विशेष रूप से, परिणाम बताते हैं कि सबसे पुराने और सबसे कमजोर व्यक्तियों को प्राथमिकता देना सही था।












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