कुवैत अग्निकांड: 40 से ज्यादा भारतीय की मौत, बिल्डिंग में रखे गए थे क्षमता से ज्यादा लोग, छत पर भी जड़ा था ताला
Kuwait Building Fire: कुवैत की एक बिल्डिंग बुधवार की सुबह भीषण आग की चपेट में आ गई। इस हादसे 50 से अधिक लोगों के मरने की खबर है। जानकारी के अनुसार इस भीषण हादसे में जान गंवाने वालों में 40 से अधिक भारतीय नागरिक हैं। ज्यादातर लोग दक्षिणी भारत के रहने वाले बताए जा रहे हैं।
इस हादसे में मरने वालों में केरल के कोल्लम जिले के सोरानाड गांव के रहने वाले 30 वर्षीय शमीर की पहचान की गई थी। मरने वाले दो अन्य भारतीयों की पहचान भी अब की गई है। मृतकों की पहचान लुकोस (48) और साजन जॉर्ज (29) के रूप में की गई है। दोनों केरल के कोल्लम शहर के मूल निवासी थे।

मिली जानकारी के अनुसार ल्यूकोस 18 साल से कुवैत में एनबीटीसी कंपनी में सुपरवाइजर के तौर पर काम कर रहे थे। ल्यूकोस अपने पीछे पत्नी शाइनी और दो बच्चे लिडिया और लोइस को छोड़ गए हैं। उसके रिश्तेदारों का कहना है कि ल्यूकोस ने उन्हें बताया था कि वह अगले सप्ताह घर आएगा।
एक अन्य मृतक, साजन जॉर्ज जो एम.टेक ग्रेजुएट थे, कोल्लम के पुनालुर के रहने वाले थे। एक महिने पहले ही वह नौकरी मिलने के बाद कुवैत गया था। उन्होंने वहां जूनियर मैकेनिकल इंजीनियर के रूप में काम करना शुरू किया लेकिन इस दु:खद हादसे में उनकी मौत हो गई।
कुवैत आग हादसा कब और कैसे हुआ?
कुवैत में विदेशी कामगारों को रखने वाली एक इमारत में बुधवार तड़के आग लग गई। इस आग की चपेट में आने से कम से कम 50 लोगों की मौत हो गई, जिनमें ज्यादातर 20 से 50 साल की उम्र के भारतीय नागरिक थे।
रिपोर्टस के अनुसार इस बिल्डिंग में कुल 196 लोग रह रहे थे। यह बिल्डिंग की क्षमता से बहुत अधिक था। कई रिपोर्ट्स में बताया गया है कि इन मजदूरों को ठूंस-ठूंसकर इस बिल्डिंग में रहने को मजबूर किया गया था।
भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि आग में 50 से अधिक अन्य लोग घायल भी हुए हैं। एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीय अधिकारियों ने कहा कि आग कोड उल्लंघन से जुड़ी हुई प्रतीत होती है।
छत पर जड़ा था ताला, बंद कमरे में घुटा दम
कुवैती अधिकारियों द्वारा की गई प्रारंभिक जांच से चौंकाने वाले विवरण सामने आए हैं। जांच में पता चला है कि इमारत के कमरों और अपार्टमेंट के बीच विभाजन के रूप में किसी प्रकार की ज्वलनशील सामग्री का उपयोग किया गया था। इससे इमारत से धुएं के बड़े बादल निकलने लगे और कई पीड़ितों की दम घुटने से मौत हो गई। कुवैत अग्निशमन विभाग के कर्नल सैयद अल-मौसावी ने कहा कि जांच से यह भी पता चला कि पीड़ित छत पर नहीं जा सके क्योंकि वहां ताला लगा हुआ था।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार रात अपने कुवैती समकक्ष अब्दुल्ला अली अल-याह्या से बात की और उनसे दक्षिणी कुवैत के मंगफ क्षेत्र में विनाशकारी आग में मारे गए लोगों के शवों की शीघ्र स्वदेश वापसी सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जिन्होंने घटना को "दुखद" बताया, ने एस जयशंकर, एनएसए अजीत डोभाल, विदेश सचिव विनय क्वात्रा और प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा सहित अन्य लोगों के साथ बैठक में स्थिति की समीक्षा की। बैठक के बाद, प्रधानमंत्री ने मृत भारतीय नागरिकों के परिवारों को प्रधानमंत्री राहत कोष से 2 लाख रुपये की अनुग्रह राहत की घोषणा की और निर्देश दिया कि सरकार को हर संभव सहायता प्रदान करनी चाहिए।
आग सुबह 6 बजे (स्थानीय समय) से पहले लगी। यह बिल्डिंग एनबीटीसी समूह द्वारा किराए पर लिया गया है। समाचार एजेंसी पीटीआई को सूत्रों ने बताया कि बचाव अभियान के दौरान पांच अग्निशमनकर्मी घायल हो गए।
अधिकारियों ने पीटीआई को बताया कि आग कुवैत के दक्षिणी अहमदी प्रांत के मंगफ़ क्षेत्र में इमारत की एक रसोई में लगी। उन्होंने बताया कि इमारत में कथित तौर पर 195 लोग रहते थे, जो एक ही कंपनी के कर्मचारी हैं। आग में मारे गए भारतीयों के अलावा पाकिस्तानी, फिलिपिनो, मिस्र और नेपाली नागरिक शामिल थे।
स्थानीय लोगों ने बताया कि इमारत के अंदर जमीनी मार्गों के बंद होने की वजह से निवासियों के आवाजाही में बाधा पैदा हुई और इमारत को तेजी से खाली करने की चुनौती और बढ़ गई। एक प्रत्यक्षदर्शी ने दिल दहलाने वाली घटना का जिक्र करते हुए बताया कि एक निवासी कर्मचारी ने पांचवीं मंजिल से छलांग लगा दी थी और बालकनी के किनारे से टकराकर उसकी मौत हो गई।
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