अब जाकर झुके पीएम ट्रूडो, संसद में नाजी लड़ाके को सम्मानित करने के लिए मांगी माफी
कनाडा की संसद में एक नाजी वेटरन को सम्मानित करने के बाद घिरे पीएम ट्रूडो ने इसके लिए औपचारिक रूप से माफी मांगी है। उन्होंने कहा कि इस भयानक गलती ने उन सभी लोगों की स्मृति को नुकसान पहुंचाया है जो नरसंहार के दौरान पीड़ित थे।
ट्रूडो ने बुधवार दोपहर हाउस ऑफ कॉमन्स में फ्रेंच भाषा में कहा, "इस चैंबर में मौजूद सभी लोगों की ओर से, मैं शुक्रवार को जो कुछ हुआ उसके लिए ईमानदारी से माफी मांगना चाहता हूं।"

ट्रूडो ने आगे कहा, "इस व्यक्ति को श्रद्धांजलि देना, यह जाने बिना कि वह कौन था, एक भयानक गलती थी और उन लोगों की स्मृति का उल्लंघन था, जिन्हें नाजी शासन के हाथों क्रूरतापूर्वक पीड़ित होना पड़ा था।"
हालांकि उन्होंने निजी तौर पर इस आरोप को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। ट्रूडो ने कहा कि स्पीकर ने किसे आमंत्रित किया है, इसकी जांच करने की लिबरल सरकार की कोई जिम्मेदारी नहीं है।
ट्रूडो ने यह भी कहा कि ओटावा माफी मांगने के लिए राजनयिक चैनलों के माध्यम से पहले ही कीव और ज़ेलेंस्की तक पहुंच चुका है।
ट्रूडो ने बुधवार को संसदीय सत्र में हिस्सा लेने के लिए कनाडा गए जेलेंस्की और यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडल से माफी भी मांगी और कहा कि इस घटना ने रूसी "प्रचार" को बढ़ावा दिया है।
क्रेमलिन ने पहले दिन में कहा था कि पूरी कनाडाई संसद को सार्वजनिक रूप से नाज़ीवाद की निंदा करनी चाहिए।
ट्रूडो ने पत्रकारों से पहले की टिप्पणी में कहा, "यह सोचना बेहद परेशान करने वाला है कि यूक्रेन किस चीज के लिए लड़ रहा है, इसके बारे में गलत प्रचार करने के लिए रूस और उसके समर्थकों द्वारा इस गंभीर गलती का राजनीतिकरण किया जा रहा है।"
आधिकारिक विपक्षी रूढ़िवादियों का कहना है कि जो कुछ हुआ उसके लिए अंततः ट्रूडो जिम्मेदार थे, क्योंकि उन्होंने ज़ेलेंस्की को कनाडाई संसद को संबोधित करने के लिए आमंत्रित किया था और उन पर लापरवाही का आरोप लगाया था।
दरअसल बीते 22 सितंबर को यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कनाडा की संसद में भाषण दिया था। इसके तुरंत बाद दूसरे विश्व युद्ध में रूस के खिलाफ लड़ने वाले 98 साल के यारोस्लाव हुंका का सम्मान किया गया।
संसद में स्पीकर एंथोनी रोटा ने सार्वजनिक रूप से नाजी यूनिट में काम कर चुके पूर्व सैनिक यारोस्लाव हुंका को युद्ध का हीरो बताते हुए उसकी तारीफों के पुल बांधे थे। इस घटना के कुछ ही देर बार हुंका के बारे में खुलासा हुआ कि वे हिटलर की सेना में थे और नाजियों की तरफ से दूसरे विश्व युद्ध में लड़े थे।
इस खुलासे के बाद पूरी दुनिया में ट्रूडो सरकार की आलोचना शुरू होने लग गई और एक बार फिर से कनाडा को अंतरराष्ट्रीय शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा। लिहाजा स्पीकर को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था।












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