‘टाइम बम की तरह हो चुकी है चीन की इकॉनमी, कभी भी फट जाएगी...’, जो बाइडेन ने क्यों दी ये चेतावनी?
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने गुरुवार को चीन की आर्थिक चुनौतियों को लेकर भविष्यवाणी की है। बाइडेन ने चीनी अर्थव्यवस्था की तुलना बम से की है और उसकी आर्थिक चुनौतियों के कारण "कई मामलों में टिक-टिक करता टाइम बम" कहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि चीनी अर्थव्यवस्था कभी भी फट सकती है। चीन की में भारी बेरोजगारी और बूढ़ी हो रही आबादी की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि चीन संकट में है।

जो बाइडेन ने यूटा में एक पॉलिटिकल मनी फंडिग प्रोग्राम में कहा कि चीन के साथ कुछ समस्याएं हैं। उन्होंने कहा, यह अच्छा नहीं है, क्योंकि जब बुरे लोगों को समस्या होती है, तो वे बुरे काम करते हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि वह चीन को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते हैं और दुनिया के दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए तर्कसंगत संबंध चाहते हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने जून में भी एक मनी फंडिग प्रोग्राम में चीन के बारे में इससे मिलती जुलती टिप्पणी की थीं। उन्होंने राष्ट्रपति शी जिनपिंग को तानाशाह बताया था। जिसके बाद चीन ने इसे उकसावे वाली कार्रवाई बताया था। बाइडेन की ये टिप्पणी तब आयी थी, जब अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन चीन दौरे से लौटे थे।
फिलहाल अगर चीनी अर्थव्यवस्था की बात की जाए तो कोविड के बाद से ही ये बेपटरी हो चुकी है। देश में बहुत धीमी आर्थिक विकास दर देखने को मिल रही है। जहां बाकी देश मुद्रास्फिती का सामना कर रहे हैं चीनी अर्थव्यवस्था अब अपस्फिती से गुजर रही है।
चीन के राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो के अनुसार, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) जुलाई में एक साल पहले की तुलना में 0.3 प्रतिशत गिर गया है। विशेष रूप से, फरवरी 2021 के बाद यह पहली बार है कि सूचकांक में गिरावट आई है। भोजन, परिवहन और घरेलू सामान सभी की लागत में जुलाई में गिरावट देखी गई है।
अपस्फीति, मुद्रास्फीति के बिल्कुल विपरीत है। यह तब होता है, जब संपूर्ण अर्थव्यवस्था में परिसंपत्तियों और वस्तुओं की कीमतें कम हो जाती हैं। अपस्फीति को आम तौर पर अर्थशास्त्रियों द्वारा नकारात्मक रूप से देखा जाता है।
क्योंकि वस्तुओं की कीमतें कम होते देख लोग खर्च करने में देरी करने लगते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि कीमतों में और कमी हो सकती है। इसके परिणामस्वरूप उत्पादन कम हो जाता है, जिसके परिणामस्वरूप छंटनी और वेतन में कटौती होती है। इससे देश में मंदी की स्थिति पैदा हो सकती है।
सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, विशेष रूप से, पोर्क की कीमतों में 26 फीसदी की गिरावट आई है और सब्जियों की कीमतों में 1.5 फीसदी की गिरावट आई है। उत्पादक मूल्य सूचकांक (पीपीआई), एक अन्य पैरामीटर जो फैक्ट्री गेट पर माल की कीमतों को मापता है, जुलाई में एक साल पहले की तुलना में 4.4 प्रतिशत कम हो चुका है।
एनएन के अनुसार, पीपीआई में यह लगातार 10वीं गिरावट थी और नवंबर 2020 के बाद पहली बार उपभोक्ता और उत्पादक कीमतों में एक ही महीने में गिरावट आई है। इस बीच, हाल के महीनों में दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में अपस्फीति के संकेत अधिक प्रचलित हो गए हैं, जिससे चिंता बढ़ गई है कि चीन लंबे समय तक स्थिरता के दौर में प्रवेश कर सकता है।
इसके अलावा बीजिंग अपने रियल एस्टेट क्षेत्र में लंबे समय से मंदी और कमजोर व्यापार से भी जूझ रहा है। वहीं, चीन में युवाओं में रिकॉर्ड बेरोजगारी बढ़ी है। चीन में युवाओं को आसानी से नौकरी नहीं मिल रही है। चीन में 16 से 24 वर्ष की आयु के युवाओं को नौकरी ढूंढ़ने में बेहद दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
चीन में युवाओं में बेरोजगारी दर जून महीने में 21.3 प्रतिशत के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गई थी। यह लगातार तीसरा महीना है जब चीन में युवाओं का बेरोजगारी दर अपने रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा है।












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