जियांग जेमिनः मार्क्सवादी सिद्धातों से गद्दारी करने वाले कम्युनिस्ट नेता, चीन को बनाया दुनिया का सुपरपावर
जियांग जेमिन का सबसे महत्वपूर्ण फैसला था 'पूंजीपतियों' को सीसीपी में शामिल होने की अनुमति देना। समाजवाद से परहेज करने वाले पूंजीपति जियांग के कार्यकाल में ही कम्युनिस्ट पार्टी के सच्चे सेवक बने।
चीन के पूर्व राष्ट्रपति जियांग जेमिन का बुधवार को 96 साल की आयु में निधन हो गया। वे ल्यूकेमिया बीमारी से पीड़ित थे। इस वजह से उनके शरीर के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। आधिकारिक शिन्हुआ समाचार एजेंसी के मुताबिक शंघाई में दोपहर 12 बजकर 13 मिनट पर जियांग की मौत हो गई। जियांग जेमिन ने चीन में वर्ष 1989 में तियानमेन स्क्वायर में हुए भीषण जनसंहार के बाद देश 1993 में देश का नेतृत्व संभाला था।

1995 में बने शंघाई के मेयर
जियांग जेमिन का जन्म 1926 में हुआ था। वह पेशे से एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर थे। अपने कॉलेज के दिनों में ही वह कम्युनिस्ट पार्टी में शामिल हुए। अपने करिश्माई नेतृत्व और अपार आत्मविश्वास के बूते जियांग जेमिन पार्टी में आगे बढ़ते चले गए। साल 1985 में जेमिन शंघाई के मेयर बने और बाद में शहर के सीसीपी सचिव भी बने। जेमिन के मेयर बनने के बाद शंघाई, चीन का नया आर्थिक केंद्र बन गया था। जेमिन के नेतृत्व में शंघाई चीन के लिए विकास का एक ऐसा प्रतीक बना, जिसकी कल्पना माओ के बाद सीसीपी ने की थी।

समाजवादी बाजार अर्थव्यवस्था लाने वाले जेमिन
चीन में 1989 में तियानमेन स्क्वायर घटना हुई थी जिसने पूरी दुनिया में चर्चा बटोरी थी। इस नरसंहार के बाद सीसीपी में काफी मंथन हुआ था। जेमिन असहमति के प्रति बेहद सख्त थे और समाजवादी बाजार अर्थव्यवस्था बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध थे। 1993 में पीआरसी के अध्यक्ष बनने के बाद, जियांग ने प्रचार और राजनीतिक चिंतन पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित किया। उनका ध्यान स्थिर अर्थव्यवस्था बनाने और बेरोजगारी को दूर करने पर था। जियांग के दस साल के कार्यकाल में यह नजर भी आया। चीन में बड़े पैमाने पर बेरोजगारी दूर करने में सफलता हासिल हुई। जियांग ही वह शख्स थे जिन्होंने चीन को पूरी तरह से दुनिया के लिए खोल दिया। उनकी ही अध्यक्षता में चीनी विनिर्माण क्षेत्र वैश्विक बना। हम जो आज जैसा चीन देखते हैं उसकी नींव जियांग जेमिन ने ही रखी थी।

जेमिन ने समाजवाद को सुधारवादी बनाया
जेमिन कम्युनिस्ट नेताओं की उस नई नस्ल से थे, जिन्होंने माओवादी नीतियों के विनाशकारी प्रभावों को प्रत्यक्ष रूप से अनुभव किया था। ऐसे में पुरानी गलतियों से सबक लेते हुए जेमिन ने समाजवाद के कहीं अधिक सुधारवादी और आगे की सोच में ढ़ाला। इस नए समाजवाद में एक मजबूत बाजार अर्थव्यवस्था बनाने पर जोर था। जियांज जेमिन ने ये महसूस किया कि व्यापार और वाणिज्य के वैश्विक नेटवर्क में चीन के एकीकरण के माध्यम से ही देश की घरेलू अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दिया जा सकता है। उनके द्वारा किए गए सुधार गी चीन को आर्थिक महाशक्ति बनने की राह पर ले गए। उन्होंने वर्षों की बातचीत के बाद 2001 में चीन को विश्व व्यापार संगठन में शामिल किया।
कम्युनिस्ट पार्टी में उद्योगपतियों को जोड़ा
शीर्ष पद पर रहने के दौरान जियांग जेमिन ने कुछ अनोखे फैसले किए। जेमिन ने पार्टी और कम्युनिस्ट आंदोलन का आधुनिकीकरण किया। वह पार्टी को श्रमिकों और किसानों के एक राजनीतिक आधार से आगे ले गए और बुद्धिजीवियों और नए उभरते हुए व्यापारी वर्ग को लुभाया। उनके सिद्धांत ने पार्टी और लोगों के बीच संबंधों के लिए एक दृष्टि प्रदान की। जियांग जेमिन का सबसे महत्वपूर्ण फैसला था 'पूंजीपतियों' को सीसीपी में शामिल होने की अनुमति देना। समाजवाद से परहेज करने वाले पूंजीपति जियांग के कार्यकाल में ही कम्युनिस्ट पार्टी के सच्चे सेवक बने। हालांकि इन्हीं नीतियों के कारण जियांग जेमिन को मार्क्सवीदी सिंद्धातों के साथ विश्वासघात करने वाला बताया जाता है।
असहमित रखने वाले के बेहद सख्त थे जियांग जेमिन
जियांग जेमिन आर्थिक मामलों में जितने लचीले थे, प्रशासक के रूप में वह उतने ही कठोर माने जाते थे। खुद से असहमति रखने वाले लोगों के प्रति वह अत्यंत क्रूर थे। 1990 के दशक में चीन और विदेशों में अपार लोकप्रियता हासिल करने वाले एक नए आध्यात्मिक आंदोलन फालुन गोंग पर उनकी क्रूर कार्रवाई को अक्सर उनकी असहिष्णुता के उदाहरण के रूप में उद्धृत किया जाता है। 1993 से 2003 तक उनके कार्यकाल के दौरान, विशेष रूप से तिब्बत में उनके खिलाफ मानवाधिकारों के उल्लंघन के कई अन्य आरोप थे। तभी तो जियांग के शासनकाल में तियानमेन स्क्वायर विरोध के बाद चीन में कोई बड़ा प्रदर्शन नहीं हुआ।

1997 में हांगकांग के शांतिपूर्ण हस्तांतरण कराया
जियांग जेमिन जैसे शक्तिशाली नेता ने चीनी इतिहास पर गहरा प्रभाव छोड़ा है। एक तरफ तो जेमिन अब्राह्म लिंकन को कोट करते हुए प्रगतिवाद और उदारवाद की भाषा बोलते थे दूसरी ओर, वह देश में अपनी और अपनी पार्टी की सत्ता को बनाए रखने के लिए निर्ममता से कुछ भी कर जाते थे। जियांग जेमिन को परम व्यावहारिक नेताओं की श्रेणी में रखा जा सकता है। उनमें अपनी व्यावहारिकता को वैचारिक दृष्टि से ढालने की महान क्षमता थी। उन्होंने चीन में सत्ता को केंद्रीकृत किया। जियांग ने ही 1997 में हांगकांग के शांतिपूर्ण हस्तांतरण कराया।
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