किम जोंग गिराने वाले हैं विनाशक मिसाइल, जापान ने गलती से जारी किया अलर्ट..होक्काइडो द्वीप पर मचा रहा हड़कंप
उत्तर कोरिया ने पिछले साल भी बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया था, जिसके बाद जापान ने अलर्ट जारी किया था। रिपोर्ट के मुताबिक, वो अलर्ट भी गलती से जारी कर दी गई थी।

North Korean missile Test: उत्तर कोरिया के तानाशाह नेता किम जोंग उन के नाम का दहशत पूरी दुनिया में फैला हुआ है और आज जापान के होक्काइडो द्वीप के लोगों ने उस दहशत को महसूस किया है।
उत्तर कोरिया के बैलिस्टिक मिसाइल टेस्ट के बाद जापान की तरफ से एक इमरजेंसी चेतावनी जारी की गई, जिसमें कहा गया है, कि उत्तर कोरियाई मिसाइल जापान के उत्तर में स्थित होक्काइडो द्वीप पर गिर सकता है, जिसके बाद कई घंटे तक इस द्वीप के लोगों में डर फैला रहा।
रिपोर्ट के मुताबिक, सुबह 8 बजे के आसपास द्वीप के लोगों के लिए अलर्ट जारी किया गया था, जिसमें लोगों से सुरक्षित स्थानों में छिप जाने के लिए कहा गया। ये अलर्ट लाखों लोगों के लिए जारी किया गया, जिसमें उनसे किसी सुरक्षित स्थान पर शरण लेने का आग्रह किया गया।
जापानी अलर्ट में लिखा गया था, कि उत्तर कोरिया का बैलिस्टिक मिसाइल होक्काइडो द्वीप पर गिर सकता है।
घंटों तक परेशान रहे द्वीप के लोग
कुछ देर के बाज जापान सरकार ने इस अलर्ट को वापस ले लिया, लेकिन फिर भी कई घंटे तक होक्काइडो द्वीप के लोगों में भ्रम और गुस्से की स्थिति बनी रही। बाद में पता चला, कि स्थानीय अधिकारियों ने गलती से अलर्ट जारी कर दिया गया था।
बाद में जापान सरकार की तरफ से सफाई जारी करते हुए कहा गया, कि उत्तर कोरिया के मिसाइल की द्वीप से टकराने की कोई संभावना नहीं है। वहीं, टोक्यो ने बाद में पुष्टि की, कि उत्तर कोरिया का मिसाइल जापानी क्षेत्र के बाहर कोरियाई प्रायद्वीप के पूर्वी तट के पानी में गिरा है।
लेकिन, इस दौरान होक्काइडो द्वीप के लोगों में अफरातफरी मची रही। वहीं, अब स्थानीय लोगों में भारी गुस्सा और प्रशासन की काफी आलोचना की जा रही है।
लोगों का कहना है, कि "जे-अलर्ट का क्या मतलब है? ये मिसाइल के गिरने की उस वक्त चेतावनी देता है, जब आप नहीं जानते कि यह कहाँ गिरेगा?" एक ट्विटर उपयोगकर्ता से पूछा, कि "अंत में, यह जापानी लोगों में डर फैलान की भावना पैदा करने के अलावा और कोई उद्देश्य नहीं रखता है, कि जापान को निशाना बनाया जा रहा है।"
वहीं, एक अन्य यूजर ने लिखा है, कि 'अलर्ट अगर सही भी होता, तो लोगों के पास इतना समय नहीं था, कि कोई सुरक्षित स्थान खोज लिया जाए।"
वहीं, जापान के मुख्य कैबिनेट सचिव हिरोकाज़ू मात्सुनो ने गुरुवार को टोक्यो में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान जापान सरकार की प्रतिक्रिया का बचाव किया। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया, कि 'J-अलर्ट को लेकर सूचना देने में गलती की गई।'
हालांकि, उन्होंने ये भी कहा, कि सीमित जानकारी होने की वजह से जे-अलर्ट जारी करने का फैसला सही था। और सरकार ने यही किया गया। वहीं, बाद में सरकार ने ये भी जारी कर दिया, कि मिसाइल होक्काइडो के पास नहीं गिरेगी।
यह पहली बार नहीं है, जब जे-अलर्ट में समस्या आई है। पिछले अक्टूबर में भी, जापान ने शुरुआती चेतावनी प्रणाली की खराबी के लिए माफी मांगी थी, जब टोक्यो के नौ द्वीप कस्बों और गांवों के निवासियों को गलती से अलर्ट भेज दिया गया था। उस मौके पर उत्तर कोरिया ने एक बैलिस्टिक मिसाइल दागी थी, लेकिन यह अलर्ट प्राप्त करने वाले समुदायों के ऊपर से नहीं गुजरी थी।
बैलिस्टिक मिसाइल पर क्या बोला दक्षिण कोरिया
दक्षिण कोरिया के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के मुताबिक, उत्तर कोरिया ने प्योंगयांग के पास के एक क्षेत्र से स्थानीय समयानुसार गुरुवार सुबह लगभग 7:23 बजे मध्य या लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल दागी थी, जिसके बाद अलर्ट जारी किया गया।
दक्षिण कोरिया के एक सैन्य अधिकारी के मुताबिक, दक्षिण कोरियाई सेना का मानना है कि प्योंगयांग एक नई बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण कर रहा था, जिसे उसने एक सैन्य परेड में प्रदर्शित किया था।
दक्षिण कोरिया के अधिकारी का कहना है, कि वह मिसाइल ठोस-ईंधन वाली हो सकती है, जिसे तरल-ईंधन वाली मिसाइलों की तुलना में जल्दी लॉन्च की जा सकती है और आसानी से इधर-उधर ले जाया जा सकता है।
अधिकारी ने कहा, कि ऐसी संभावना है कि उत्तर कोरिया एक टोही उपग्रह के एक हिस्से का परीक्षण कर रहा था, जैसे कि एक सेंसर।
उत्तर कोरिया ने पिछले साल कहा था, कि वह इस महीने तक एक सैन्य टोही उपग्रह लॉन्च करने की तैयारी पूरी कर लेगा।
वहीं, दक्षिण कोरिया के संयुक्त चीफ ऑफ स्टाफ ने कहा, कि मिसाइल को लगभग 1,000 किलोमीटर (621 मील) की उड़ान भरते हुए एक ऊंचे प्रक्षेपवक्र पर लॉन्च किया गया था।
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इस बीच, जापानी रक्षा मंत्री यासुकाज़ू हमादा ने कहा, कि मिसाइल एक प्रकार की अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) हो सकती है, जो उत्तर कोरिया की बैलिस्टिक मिसाइलों की सबसे लंबी रेंज है। हालांकि, पूरी जानकारी को लेकर अभी भी संदेह बरकरार है।












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