जापान में आसानी से छूट जाते थे बलात्कारी... अब मिलेगी सख्त सजा, 116 साल बाद बना कठोर कानून
जापान में पुराने कानून के मुताबिक ‘बलपूर्वक' और ‘हमला या धमका कर' या ‘बेहोशी या विरोध न करने की हालत' में किए गए सेक्स को बलात्कार माना जाता था। लेकिन इसमें दिक्कत ये थी कि कई बार ये ब्लात्कार बलपूर्वक हुआ है, इसे साबित
जापान में बलात्कार से जुड़ा एक कानून पारित किया है। इस नए कानून में ब्लात्कार को फिर से पारिभाषित किया है। इसके अलावा इसमें सेक्स को लेकर सहमति की उम्र भी बढ़ाई गई है। जापान में इससे जुड़ा बदलाव 116 साल बाद हुआ है।
जापान में इस नए एतिहासिक विधेयक पर लंबे समय से बहस चल रही थी। इसे लैंडमार्क कानून बताया जा रहा है। अब नए कानून बन जाने से जापान में 'सहमति को लेकर' लोगों की धारणा साफ हो सकेगी।

ब्लात्कार को लेकर जापान के कानून दुनिया के विकसित देशों में सबसे लचर माने जाते थे। ब्लात्कार की कोई स्पष्ट परिभाषा न होने की वजह से कई दोषी बिना किसी सजा के ही छूट जाते थे।
जापान में कंसेट यानी कि सहमति का मतलब क्या होता है इसे लेकर लोगों की समझ भी कम थी। देश के कानून में भी इससे पहले कंसेट यानी कि सहमति क्या है इसकी ठीक से व्याख्या नहीं की गई थी। इसकी वजह से कई अपराधी इसका नाजायज फायदा उठाते थे।
जापान में पुराने कानून के मुताबिक 'बलपूर्वक' और 'हमला या धमका कर' या 'बेहोशी या विरोध न करने की हालत' में किए गए सेक्स को बलात्कार माना जाता था। लेकिन इसमें दिक्कत ये थी कि कई बार ये ब्लात्कार बलपूर्वक हुआ है, इसे साबित करना मुश्किल हो जाता था।
कई बार शराब के नशे में भी महिलाओं संग ब्लात्कार की घटनाएं हुईं लेकिन उसमें भी दोषी को सजा नहीं मिल सकी क्योंकि उसने पीड़ित संग बलपूर्वक ब्लात्कार नहीं किया था।
अगर भारत सहित बाकी देशों की बात करें तो वहां पर बलात्कार की परिभाषा अधिक व्यापक है जिसमें बिना सहमति के सेक्स को भी बलात्कार के रूप में परिभाषित किया जाता है।
इससे पहले जापान में सहमति की कानूनी उम्र, जो पहले केवल 13 वर्ष थी को बढ़ाकर 16 वर्ष कर दिया गया है। यानी कि अगर 16 साल से कम उम्र की लड़की संग सहमित से यौन संबंध बनाना अपराध होगा।
जापान में यौन सहमति की उम्र 1907 से अपरिवर्तित थी। हालांकि, 13 से 15 साल की उम्र की नाबालिग के साथ यौन संबंध बनाने वाले व्यक्ति को सजा तभी मिलेगी जब वह व्यक्ति नाबालिग से पांच या उससे अधिक साल बड़ा हो।
जापान में फोटो वॉयरिज्म का चलन तेजी से बढ़ा है, जिसमें लड़की के छोटे कपड़े पहनने का वीडियो या फिर चेंजिंग रूम में सीक्रेट कैमरा लगाकर उसकी वीडियो फिल्माकर सोशल मीडिया और पोर्न साइट्स पर अपलोड कर दिया जाता था।
नए कानून के मुताबिक ऐसी तस्वीरें या वीडियो शेयर करने पर भी दंडित करने का प्रावधान होगा। इसमें अपराधी को 3 साल तक की जेल की सजा हो सकती है। नए कानून में ये भी कहा गया है कि ज्यादा लोगों तक अश्लील वीडियो फैलाने वालों को 5 साल तक की जेल की सजा दी जाएगी।
रिकॉर्ड के मुताबिक जापान में रेप के मामले बीते कुछ सालों में काफी बढ़े हैं। साल 2021 में जहां 1.39 हजार रेप के मामले दर्ज हुए थे, वहीं साल 2022 में ये संख्या 1.66 हजार हो गई। वहीं जबरन अश्लीलता के मामले की संख्या भी जहां 2021 में 4.28 हजार थी जो 2022 में बढ़कर करीब 4.7 हजार हो गई।
जापान में, यौन हिंसा से बचे लोग अक्सर कलंक और शर्म के कारण सामने आने से हिचकते हैं। सरकार द्वारा 2021 के एक सर्वेक्षण से पता चला है कि केवल 6 प्रतिशत महिलाओं और पुरुषों ने हमले की सूचना दी है, सर्वेक्षण में शामिल 50 फीसदी महिलाओं ने महसूस किया कि वे "शर्मिंदगी" के कारण ऐसा नहीं कर सकती हैं।
जापान में ब्लात्कार से जुड़े कानून में बदलाव की मांग ने साल 2019 में जोर पकड़ लिया। दरअसल तब एक ही महीने के भीतर यौन उत्पीड़न के चार मामले सामने आए थे। हैरानी की बात ये थी कि इनमें सभी को बरी कर दिया गया। इसके बाद जापान की जनता सड़कों उतर आई।












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