इजरायली प्रधानमंत्री का पहली बार UAE दौरा, क्या मुस्लिम देशों के लिए 'अछूत' नहीं रहा इजरायल?
अगस्त 2020 में हुए 'अब्राहम समझौते' के बाद से बहरीन, सूडान और मोरक्को के बाद संयुक्त अरब अमीरात भी इजरायल के साथ अपने संबंधों को सामान्य कर चुका है और अब सऊदी अरब के भी इजरायल के साथ संबंध बहाल करने की खबरें हैं।
अबूधाबी, दिसंबर 13: इजरायल और खाड़ी देशों के बीच संबंध अब उसी तरह से हो रहे हैं, जिस तरह के संबंध भारत-अमेरिका के हैं, जापान-फ्रांस के हैं, जर्मनी-ब्रिटेन के हैं और पाकिस्तान-चीन के हैं। और इतिहास में यह पहली बार होने जा रहा है, जब एक इजरायली प्रधानमंत्री खाड़ी देशों की यात्रा पर निकला है। इजरायली प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट ने रविवार को संयुक्त अरब अमीरात में एक इजरायली प्रधानमंत्री के तौर पर पहली आधिकारिक यात्रा शुरू की है, जो कि क्षेत्रीय तनाव के समय खाड़ी संबंधों को मजबूत करने की मांग कर रही है और इसी के साथ अब पूरी तरह से तय हो गया है, कि खाड़ी देशों के लिए इजरायल 'अछूत' नहीं रहा। वहीं, जब वैश्विक शक्तियां ईरान के साथ परमाणु समझौते को पुनर्जीवित करने की कोशिश में हैं, उस वक्त इजरायली प्रधानमंत्री का दौरा और भी अहम हो जाता है।

खाड़ी देशों के दौरे पर इजरायली पीएम
इसी साल जून में इजरायल के प्रधानमंत्री बने नेफ्ताली बेनेट के लिए ये एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, क्योंकि मुस्लिम देशों के लिए परिष्कृति रहा इजरायल आज अरब देशों की मीडिया में सुर्खियां बटोर रहा है। नेफ्ताली बेनेट जब संयुक्त अरब अमीरात पहुंचे, तो एयरपोर्ट पर उनका भव्य स्वागत किया गया और यूएई के विदेश मंत्री खुद वहां उन्हें स्वागत करने पहुंचे थे, जबकि, राजधानी में उनका स्वागत खुद यूएई के प्रधानमंत्री ने किया। वहीं, सोमवार को प्रधानमंत्री नेफ्ताली बेनेट की मुलाकात संयुक्त अरब अमीरात के वास्तविक नेता, अबू धाबी क्राउन प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जायद अल-नाहयान के साथ होगी।

खाड़ी देशों से दोस्ती की शुरूआत
2015 में वैश्विक शक्तियों के ईरान के साथ परमाणु समझौता करने का सबसे बड़ा विरोध इजरायल ने ही किया था और ऐसा कहा जाता है कि, इजरायल के कहने पर ही साल 2018 में डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ परमाणु समझौता खारिज कर दिया था। लिहाजा, एक बार फिर से अमेरिका और कई वैश्विक शक्तियां ईरान के साथ परमाणु समझौते को पुनर्जीवित करना चाह रही हैं, ऐसे में इजरायली पीएम का यूएई दौरा और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है। अगस्त 2020 में हुए 'अब्राहम समझौते' के बाद से बहरीन, सूडान और मोरक्को के बाद संयुक्त अरब अमीरात भी इजरायल के साथ अपने संबंधों को सामान्य कर चुका है। अब्राहम समझौते के बाद से किसी इजरायली प्रधानमंत्री की पहली यूएई यात्रा है।
यूएएई में जोरदार स्वागत
तेल अवीव से उड़ान के बाद अबू धाबी पहुंचने पर नेफ्ताली बेनेट का जोरदार स्वागत किया गया और संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद ने उनका एयरपोर्ट पर स्वागत किया। जिसपर प्रतिक्रिया देते हुए इजरायली पीएम ने कहा कि, "क्या शानदार स्वागत है। मैं यहां अपने लोगों की ओर से यहां एक इजरायली नेता की पहली आधिकारिक यात्रा पर आने के लिए बहुत उत्साहित हूं," उन्होंने कहा कि, 'हम संबंध मजबूत करने की उम्मीद कर रहे हैं।' इजराइल ने खाड़ी अरब राज्यों के साथ संयुक्त रक्षा स्थापित करने की बात कही है जो ईरानी गतिविधियों पर अपनी चिंता साझा करते हैं। अपने नए सहयोगी के साथ आर्थिक, स्वास्थ्य और ऊर्जा संबंधों को आगे बढ़ाते हुए, यूएई ने अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद से इजरायल के साथ दर्जनों समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं।

ईरान के साथ भी यूएई
एक तरफ यूएई इजरायली प्रधानमंत्री का अपने देश में स्वागत कर रहा है, तो दूसरी तरफ संयुक्त अरब अमीरात ईरान के साथ भी अपने संबंधों को खराब नहीं करना चाहता है। लिहाजा पिछले हफ्ते यूएई ने भी ईरान से संपर्क किया था और पिछले सोमवार को अपने वरिष्ठ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार को अपने ईरानी समकक्ष और राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी से मिलने के लिए वहां भेजा था।

सऊदी के साथ बनेंगे रिश्ते?
हालांकि, अभी तक सऊदी अरब ने इजरायल के साथ किसी भी तरह के रिश्तों की शुरूआत नहीं की है, लेकिन ऐसी खबरें आती रहती हैं कि, दोनों देशों के बीच पर्दे के पीछे से संबंधों को सुधारने की कोशिश तेजी से हो रही है। और इसका सबसे बड़ा उदाहरण तब देखने को मिला, जब फिलिस्तीन पर इजरायली हमले के वक्त भी सऊदी अरब खामोश रहा। वहीं, इस वक्त जब इजरायली प्रधानमंत्री ने यूएई का दौरा किया है, तब भी नेफ्ताली बेनेट के एयरलाइंस ने सऊदी अरब के एयरस्पेस से ही उड़ान भरी है और सऊदी अरब ने कोई ऐतराज नहीं जताया है, लिहाजा इस बात की पूरी संभावना है, कि आने वाले वक्त में सऊदी अरब और इजराय के बीच राजनीतिक संबंध स्थापित हो जाएंगे।

फिलिस्तीन ने की निंदा
एक तरफ खाड़ी के मुस्लिम देश इजरायल के साथ अपने संबंधों को विस्तार दे रहे हैं, तो दूसरी तरफ फिलिस्तीन की तरफ से इसकी निंदा की गई है। लेकिन, अब ऐसा बिल्कुल नहीं लगता है कि, अरब देशों को फिलिस्तीन के एतराज से कोई फर्क पड़ता है। वहीं, इजरायल के खिलाफ लंबी लंबी बातें करने वाला पाकिस्तान भी नेफ्ताली बेनेट के यूएई दौरे पर चुप्पी बनाए हुए है। विश्लेषकों का कहना है कि, पाकिस्तान इजरायली पीएम के दौरे पर टिप्पणी कर यूएई और सऊदी अरब से अपने संबंधों को फिर से खराब नहीं करना चाहता है। वहीं, पाकिस्तान के अंदर भी इजरायल के साथ संबंधों को स्थापित करने की मांग की जा रही है। इसी साल पाकिस्तानी मीडिया ने दावा किया था कि, प्रधानमंत्री इमरान खान के दो खास पत्रकारों ने इजरायल का दौरा किया था और अनुमान लगाया गया था कि, दोनों देशों के बीच पर्दे के पीछे से बात हो रही है, लेकिन पाकिस्तान में राजनीतिक घमासान के बाद इमरान सरकार ने चुप्पी साध ली थी।
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