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Israel Iran War: क्यों बार-बार कैंसिल हो रहा Ali Khamenei का जनाजा? क्या डिकम्पोज होने लगी है बॉडी?

Israel Iran War: ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की हत्या हुए 6 दिन पूरे हो चुके हैं। बावजूद इसके Ali Khamenei की अंतिम यात्रा और सुपुर्द-ए-खाक नहीं हो पा रहा है। शुरुआत में जो कार्यक्रम तय किए गए थे, वे कुछ ही दिनों में बदलते गए। इन बदलावों के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं।

पत्नी की मौत और दोबारा बना प्लान

1 मार्च को जैसे ही खामेनेई की मौत की पुष्टि हुई, अधिकारियों ने तुरंत एक बड़े और अंतिम संस्कार की योजना बनाई। शुरुआती योजना के मुताबिक उनकी अंतिम यात्रा तीन शहरों-तेहरान, कोम और मशहद से होकर गुजरने वाली थी। इस अंतिम यात्रा के बाद उन्हें उनके गृह नगर में दफनाने का कार्यक्रम तय किया गया था। सरकार चाहती थी कि इस अंतिम यात्रा के जरिए पूरे देश में एक बड़ा शोक और समर्थन का माहौल दिखाया जाए।

Israel Iran War

लेकिन इस योजना में बहुत जल्दी बदलाव करना पड़ा। खामेनेई की मौत के एक दिन बाद उनकी पत्नी मंसुरेह खोजास्तेह बाघेरजादेह के निधन की भी घोषणा कर दी गई। इसके बाद अधिकारियों ने फैसला लिया कि दोनों का जनाजा एक साथ मशहद के इमाम रज़ा श्राइन में दफनाया जाएगा। यह जगह शिया मुस्लिमों के लिए बेहद पवित्र मानी जाती है।

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कांच के पीछे ताबूत का प्लान भी टला

बुधवार सुबह सरकारी टीवी ने एक नई जानकारी दी। रिपोर्ट में कहा गया कि खामेनेई का ताबूत तेहरान के मोसल्ला प्रार्थना स्थल में शोकसभा के लिए रखा जाएगा। लेकिन कुछ ही घंटों बाद इस कार्यक्रम को शाम तक के लिए टाल दिया गया। फिर उसी दिन दोपहर के बाद खबर आई कि कार्यक्रम को अगले आदेश तक के लिए टाल दिया गया है। इस तरह लगातार कार्यक्रम बदलने से पूरे देश में यह चर्चा शुरू हो गई कि आखिर अंदरखाने क्या चल रहा है। बाद में सरकारी टेलीविजन ने कुछ वीडियो फुटेज दिखाए। इनमें कार्यकर्ता एक खास मंच तैयार करते हुए दिखाई दिए, जहां खामेनेई का ताबूत रखा जाना था। लेकिन ये योजना भी टाल दी गई

बमबारी के बीच सुपुर्द-ए-खाक

इन देरी के पीछे सबसे बड़ा कारण सुरक्षा चिंताएं बताई जा रही हैं। ईरान इस समय एक युद्ध के माहौल में है। इसी बीच इजरायली अधिकारियों ने यह बयान भी दिया कि वे अगले सुप्रीम लीडर को भी निशाना बना सकते हैं। ऐसे माहौल में राजकीय जनाजा कराना सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

विदेशी मेहमानों का आना भी मुश्किल

एक और बड़ी समस्या विदेशी मेहमानों की उपस्थिति को लेकर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक हिजबुल्लाह और यमन के हूती आंदोलन से जुड़े नेता तेहरान आने को लेकर झिझक रहे हैं। इसका कारण हाल ही की एक घटना है- जब पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी के जनाजे और नए राष्ट्रपति मसूद पेेजेशेकियान की शपथ के दौरान तेहरान में हमास नेता इस्माइल हानिया की हत्या हो गई थी। उस घटना के बाद से कई विदेशी नेता ऐसे कार्यक्रमों में शामिल होने को लेकर सतर्क हो गए हैं।

रूस और चीन के नेताओं के पहुंचने की उम्मीद

सुरक्षा जोखिम के कारण कई ईरानी अधिकारी भी इस कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर सावधानी बरत रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक अभी केवल चीन और रूस के छोटे प्रतिनिधिमंडलों के आने की उम्मीद जताई जा रही है। इसका मतलब है कि वह बड़ा अंतरराष्ट्रीय जमावड़ा शायद देखने को न मिले जिसकी शुरुआत में उम्मीद की जा रही थी।

भीड़ जुटाने को लेकर भी चिंता

अधिकारियों की एक और चिंता है- क्या जनाजे में बड़ी भीड़ आएगी? सरकारी टीवी ने स्वीकार किया कि सरकार अन्य शहरों से समर्थकों को बसों के जरिए लाने की कोशिश कर रही है, ताकि जनाजे में लाखों की भीड़ दिखाई दे।

1989 का रिकॉर्ड दोहराने की कोशिश

ईरानी नेतृत्व चाहता है कि यह जनाजा 1989 में अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी के जनाजे जैसा ऐतिहासिक उदाहरण बने। उस समय सरकार ने दावा किया था कि करीब 10 मिलियन (एक करोड़) लोग जनाजे में शामिल हुए थे। हालांकि विदेशी पत्रकारों ने उस समय भीड़ का अनुमान 2 से 4 मिलियन (20 लाख से 40 लाख) के बीच लगाया था।

हालांकि, आज का माहौल 1989 से काफी अलग है। इस समय पूरे ईरान में बमबारी हो रही है। ऐसे में बड़ा अंतिम संस्कार तो छोड़िए, छोटा वलीमा कराना मुश्किल काम है। इसलिए कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि इतनी बड़ी भीड़ जुटाना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में अंतिम यात्रा के तेहरान, कोम और मशहद जैसे कई शहरों से गुजरने की संभावना भी न के बराबर लग रही है।

क्या Khamenei की बॉडी होने लगी है डिकम्पोज?

खामेनेई को मरे 6 दिन हो चुके हैं। ऐसे में 3 से 5 दिन के बाद बॉडी में लिक्विड जमा होने लगता है और बॉडी डिकम्पोज होने लगती है। अगर उसे बिना किसी केमिकल के रखा जाए तो उसमें कीड़े भी लग सकते हैं। लेकिन जब तक बॉडी देखरेख में रहती है उसे फ्रीजर में रखकर सुुरक्षित रखने की कोशिश की जा सकती है।

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इसके अलावा Embalming (डेडबॉडी सुरक्षित रखने की प्रक्रिया) भी जा सकती है। इस प्रक्रिया में डेड बॉडी में एक प्रिजर्वेटिव केमिकल भरा जाता है, जिससे डेड बॉडी 4-6 हफ्तों तक सुरक्षित रह सकती है। डेड बॉडी को सुरक्षित रखा जा सकता है। इसके साथ ही फॉर्मेल्डिहाइड या फॉर्मेलीन का इस्तेमाल कर डेड बॉडी को 15 दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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