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PM Modi In Israel: कौन हैं भारत में रहने वाले यहूदी Bnei Menashe? पीएम मोदी के भाषण से आए चर्चा में

Modi In Israel: PM Modi ने इजरायली संसद में अपने भाषण में भारत में रहने वाले बेनी मेनशे यहूदियों का जिक्र किया। ये यहूदी भारत के नॉर्थ-ईस्ट में रहते हैं, जिनके बारे में बहुत कम भारतीय लोग जानते हैं। हालांकि अब बेंजामिन नेतन्याहू ने 2030 तक लगभग 5,800 बेनी मेनशे (Bnei Menashe ) समुदाय के यहूदी लोगों को देश में बसाने की योजना को हरी झंडी दे दी है। इस संबंध में सरकारी घोषणा भी हो चुकी है। यह समुदाय भारत के पूर्वोत्तर राज्यों मिजोरम और मणिपुर से आता है। जानते हैं, कौन हैं बेनी मेनशे जिन्हें इजरायल में बसाने की तैयारी हो रही है।

नॉर्थ गैलिली जाएंगे बेनी मेनशे

बेनी मेनशे समुदाय के लोगों को उत्तरी इज़रायल के गैलिली क्षेत्र में बसाया जाएगा। यह क्षेत्र लेबनान के हिजबुल्लाह आतंकवादी समूह के साथ संघर्ष से प्रभावित रहा है। हाल के सालों में कई स्थानीय निवासी इस क्षेत्र को छोड़ चुके हैं।

Modi In Israel

नेतन्याहू ने कहा- यह ज़ायोनी और महत्वपूर्ण

प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस योजना को "महत्वपूर्ण और ज़ायोनी" बताया। उन्होंने कहा कि यह कदम इज़रायल के उत्तर को मजबूत करेगा और वहां की डेमोग्राफी के संतुलन में योगदान देगा।

पहली बार में 1,200 लोग आएंगे

योजना के मुताबिक, पहले समूह में 1,200 लोग अगले साल इज़रायल आने वाले हैं। उनके पुनर्वास के लिए जिम्मेदार मंत्रालय उन्हें प्रारंभिक वित्तीय सहायता, हिब्रू भाषा शिक्षा, नौकरी, अस्थायी आवास और सामाजिक कार्यक्रम का इतंजाम करेगा, ताकि नए लोग आसानी से बस सकें।

पहली खेप के लिए 23.8 मिलियन यूरो का बजट

सरकार ने इस पहली बार में पुनर्वास के लिए लाए जा रहे लोगों पर लगभग 23.8 मिलियन यूरो (लगभग 244 करोड़) का बजट तय किया है। पिछले दो दशकों में लगभग 4,000 बेनी मेनशे पहले ही इज़रायल आ चुके हैं। यह योजना भारत सरकार के साथ मिलकर बनाई गई है।

इज़रायली जनसंख्या और रणनीति

इज़रायल की नीति में डिमोग्राफिक स्थिति को खासी तवज्जो दी जाती है। खासकर इज़रायली-फिलिस्तीनी संघर्ष के संदर्भ में। इज़रायल की कुल आबादी लगभग 10.1 मिलियन है, जिसमें 73% यहूदी हैं। वहीं फिलिस्तीनी क्षेत्रों में लगभग 5.5 मिलियन लोग रहते हैं।

भारत के बेनी मेनशे कौन हैं?

बेनी मेनशे खुद को बाइबिल की मेनशे जनजाति के वंशज मानते हैं, जिन्हें इज़रायल की "खोई हुई जनजातियों" में शामिल किया गया है। कई लोग पहले ईसाई धर्म का पालन करते थे और बाद में यहूदी धर्म में परिवर्तित हुए, और इज़रायल के मुख्य रब्बीनेट से मान्यता प्राप्त की।

समुदाय की परंपराएं और त्योहार

बेनी मेनशे पारंपरिक यहूदी प्रथाओं का पालन करते हैं। वे सुकोट जैसे यहूदी त्योहार मनाते हैं और अपने समुदायों में आराधनालय स्थापित करते हैं। इज़रायल ने 2005 तक बेनी मेनशे के आव्रजन को औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं किया था। तब तत्कालीन सेफ़र्डी मुख्य रब्बी ने उन्हें इज़रायल की खोई हुई जनजाति के वंशज के रूप में आधिकारिक मान्यता दी।

गैलिली क्षेत्र का महत्व

गैलिली, जहां बेनी मेनशे बसेंगे, एक ऐतिहासिक पहाड़ी क्षेत्र है। इसमें नाज़रेथ, तिबेरियास और सफ़ेद जैसे प्रमुख शहर शामिल हैं। यह क्षेत्र उत्तर में लेबनान और पूर्व में जॉर्डन घाटी तथा गैलिली सागर से सटा हुआ है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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