अल-अक़्सा में फ़लस्तीनियों पर काबू पाने के लिए इसराइल ने अपनाया ये तरीक़ा
यरुशलम में शुक्रवार को अल-अक़्सा मस्जिद के परिसर में इसराइली पुलिस के साथ संघर्ष में कम से कम 57 फ़लस्तीनी घायल हो गए.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने ये जानकारी एक स्वास्थ्यकर्मी हवाले से दी है. रमज़ान के पवित्र महीने के दौरान अल-अक़्सा मस्जिद में हिंसा जारी है. अल-अक़्सा को यहूदी भी अपना धार्मिक स्थल मानते हैं.
इसराइली पुलिस ने कहा कि जब सैकड़ों लोगों ने पत्थरबाज़ी करना और पटाख़े फेंकने शुरू कर दिए और पश्चिमी दीवार के करीब आ गए, जहां यहूदियों की पूजा चल रही थी तब जाकर पुलिस ने हस्तक्षेप किया. पुलिस ने बताया कि पत्थर लगने से एक पुलिसकर्मी घायल हो गया और पटाख़े फेंकने से एक पेड़ जल गया.
ड्रोन से छोड़ी गई आंसू गैस
समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने चश्मीदों के हवाले से बताया कि पुलिस सुबह नमाज़ के बाद परिसर में दाख़िल हुई और भीड़ पर रबर की गोलियां और स्टन ग्रेनेड दागे. इनमें कुछ लोग पुलिस पर पत्थर फेंक रहे थे.
पुलिस ने लोगों पर आंसू गैस छोड़ने के लिए ड्रोन का भी इस्तेमाल किया. इससे नमाज़ के लिए आए दर्जनों श्रद्धालुओं का दम घुटने लगा.
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यरुशलम इस्लामिक वक़्फ़ के अनुसार, मस्जिद के परिसर में नमाज़ अदा करने के लिए करीब 150,000 फ़लस्तीनी शुक्रवार को नमाज़ के लिए मौजूद थे जब उन पर आंसू गैस छोड़े गए.
सऊदी की सरकारी मीडिया अल-अरबिया ने ड्रोन से आंसू गैस छोड़े जाने का एक वीडियो भी शेयर किया है.
दोबारा युद्ध होने का डर
इसराइल का कहना है कि गुरुवार को ग़ज़ा की ओर से दो रॉकेट दागे गए. एक रॉकेट तो थोड़ी दूरी पर ही गिर गया लेकिन दूसरा रॉकेट सीमा पार कर इसराइल के हिस्से में आया लेकिन जान-माल का कोई नुकसान नहीं हुआ. इसे ही विवाद के बढ़ने का कारण माना जा रहा है. इस सप्ताह यह तीसरी ऐसी घटना थी, जिसने ग़ज़ा में महीनों से चल रहे शांत माहौल को अशांति में बदल दिया है.
अल-अक़्सा पूर्वी यरुशलम के पुराने शहर में स्थित है. इस पर इसराइल ने 1967 के युद्ध में कब्ज़ा कर लिया था लेकिन इस कब्ज़े को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता नहीं मिली है. फ़लस्तीनी चाहते हैं कि पूर्वी यरुशलम उनके भावी राज्य की राजधानी बने.
फ़लस्तीनी इसराइल पर अल-अक़्सा में मुस्लिमों की नमाज़ पर प्रतिबंधित करने का आरोप लगाते हैं. अल-अक़्सा इस्लाम में तीसरा सबसे पवित्र स्थल माना जाता है. फ़लस्तीनियों के इन आरोपों से इसराइल इनकार करता है.
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यरुशलम में इस क़दर बढ़ती हिंसा के बीच बीते साल इसराइल और हमास के बीच ग़ज़ा में हुए युद्ध के दोहराए जाने की आशंकाएं बढ़ गई हैं.
हमास लीडर मुशीर अल-मसरी ने हाल ही में उत्तरी ग़ज़ा में एक रैली में कहा, "हमास के लड़ाकों की उंगलियां राइफ़ल के ट्रिगर पर हैं, और हम अपनी पूरी ताकत से अल-अक़्सा मस्जिद की रक्षा करेंगे."
किसी भी फ़लस्तीनी गुट ने शुक्रवार को हुए रॉकेट हमलों की अब तक ज़िम्मेदारी नहीं ली है.
एक स्वास्थ्यकर्मी ने रॉयटर्स को बताया कि 22 मार्च के बाद से अब तक अरब हमलावरों ने इसराइल में तीन पुलिस अधिकारियों सहित 14 लोगों की हत्या की है. वहीं इसराइली सुरक्षा बलों ने कब्जे वाले वेस्ट बैंक में कम से कम 14 फ़लस्तीनियों को मार डाला, जिनमें बंदूकधारी और आम नागरिक भी शामिल थे.
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इस साल रमज़ान और यहूदी त्यौहार पासओवर एक ही वक़्त पड़े हैं. जिससे अल-अक़्सा में अधिक संख्या में मुस्लिम और यहूदी आगंतुक आ रहे हैं.
शुक्रवार को एक इसराइली अधिकारी ने बताया कि बीते साल रमज़ान के आख़िर दिनों में यहूदियों को अल-अक़्सा जाने से रोक दिया गया था.
यरुशलम क्यों है दुनिया का सबसे विवादित स्थल?
यरुशलम इसराइल-अरब तनाव में सबसे विवादित मुद्दा भी है. ये शहर इस्लाम, यहूदी और ईसाई धर्मों में बेहद अहम स्थान रखता है.
पैग़ंबर इब्राहीम को अपने इतिहास से जोड़ने वाले ये तीनों ही धर्म यरुशलम को अपना पवित्र स्थान मानते हैं.
यही वजह है कि सदियों से मुसलमानों, यहूदियों और ईसाइयों के दिल में इस शहर का नाम बसता रहा है. हिब्रू भाषा में यरुशलम और अरबी में अल-क़ुद्स के नाम से जाना जाने वाला ये शहर दुनिया के सबसे प्राचीन शहरों में से एक है.
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शहर के केंद्र में एक प्राचीन शहर है जिसे ओल्ड सिटी कहा जाता है. संकरी गलियों और ऐतिहासिक वास्तुकला की भूलभुलैया वाले इसके चार इलाक़े- ईसाई, इस्लामी, यहूदी और आर्मिनियाई- को परिभाषित करते हैं.
इसके चारों ओर एक किलेनुमा सुरक्षा दीवार है जिसके आसपास दुनिया के सबसे पवित्र स्थान स्थित हैं. हर इलाक़े की अपनी आबादी है.
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