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द गॉस्पेल और लैवेंडर.. इजराइल के बनाए इन 'भस्मासुरों' ने भारतीय कर्नल को मारा? भारतीय एक्सपर्ट ने दी चेतावनी

Indian Colonel Killed In Gaza: गाजा में तैनात भारतीय सेना के पूर्व कर्नल वैभव अनिल काले इजराइली हमले में मारे गये हैं। जिस वक्त उनके ऊपर हमला हुआ, वो संयुक्त राष्ट्र का झंडा लेकर एक गाड़ी से जा रहे थे। उन्हें यूनाइटेड नेशंस की तरफ से यूरोपियन हॉस्पिटल में सिक्योरिटी के लिए तैनात किया गया था।

लेकिन, सवाल ये उठ रहे हैं, कि क्या इजराइल ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करते हुए कर्नल वैभव अनिल काले पर हमला किया था। इजराइल और हमास के बीच चल रहे गाजा संघर्ष ने आधुनिक युद्ध में AI की महत्वपूर्ण भूमिका को सामने ला दिया है।

Indian Colonel Killed In Gaza

'द गॉस्पेल सिस्टम' का इस्तेमाल कर रहा इजराइल

इजराइल डिफेंस फोर्स (IDF) ने गाजा में अपने टारगेट की पहचान करने और बमबारी करने के लिए हैब्सोरा यानि 'द गॉस्पेल सिस्टम' नामक एआई-ऑपरेटेट सिस्टम का इस्तेमाल करने की बात को कबूल किया है।

यह पहली बार है, जब इजराइली सेना ने AI आधारित टारगेट एक्विजीशन सिस्टम के इस्तेमाल की बात कबूल की है। जबकि, हालिया खोजी रिपोर्टों से पता चलता है, कि द गॉस्पेल के साथ एक और एआई सिस्टम का भी इस्तेमाल इजराइल कर रहा है, जिसे 'द लैवेंडर' के नाम से जाना जाता है।

डिफेंस एक्सपर्ट्स का कहना है, कि कई फायदों के बावजूद, एआई कुछ स्थितियों में बहुत खतरनाक साबित हो सकता है। रफा में बड़े पैमाने पर नागरिकों के हताहत होने की ख़बरें हैं। जिससे गुस्साए अमेरिका ने यह भी धमकी दी है, कि अगर यह सिलसिला जारी रहा, तो वह इजराइल को सैन्य आपूर्ति रोक देगा।

क्या इजराइली सिस्टम कर्नल की गाड़ी को नहीं पहचान पाया?

यूरेशनयन टाइम्स की एक रिपोर्ट में भारत के पूर्व वायुसेना पायलट, ग्रुप कैप्टन टीपी श्रीवास्तव का कहना है, कि अगर एआई को अनियंत्रित रूप से बढ़ने दिया गया, तो एआई का तेजी से विकास मानवता के अस्तित्व के लिए खतरा पैदा कर सकता है।

उन्होंने कहा, कि घातक हथियारों और एआई के ज्ञान तक पहुंच रखने वाला एक 'पागल/अस्थिर दिमाग' अकल्पनीय आपदा ला सकता है। कोई खतरनाक संस्था अगर इन हथियारों तक पहुंच बना ले, तो अकल्पनीय तबाही मचा सकता है। लिहाजा, मानवता की खातिर, हथियारों, विशेषकर परमाणु हथियारों को एआई सिस्टम के दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए।

Indian Colonel Killed In Gaza

लैवेंडर: AI स्ट्रीमलाइनिंग टारगेट सलेक्शन

लैवेंडर सिस्टम को हमास और फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद (PIJ) से संबद्ध होने के संदेह वाले व्यक्तियों की पहचान करने के लिए डिजाइन किया गया है, जिनमें निचले रैंक वाले लोग भी शामिल हैं, जो संभावित रूप से उन पर हवाई बमबारी कर सकते हैं।

लैवेंडर को इजराइल डिफेंस फोर्स के विशिष्ट खुफिया विभाग यूनिट 8200 ने बनाया है, जो संयुक्त राज्य अमेरिका में राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनएसए) या यूनाइटेड किंगडम में जीसीएचक्यू की तरह ही है।

इसका कंट्रोल इजराइल डिफेंस फोर्स के हाथों मे हैं, जो आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का इस्तेमाल अपना टारगेट चुनने और उनपर बमबारी करने के लिए करता है। जबकि, अभी तक किसी लक्ष्य की पहचान करने के लिए मैनुअल रूप से काम किया जाता रहा है, लेकिन इजराइल की +972 पत्रिका की एक रिपोर्ट के मुताबिक, लैवेंडर एआई का उपयोग करके संभावित लक्ष्यों की पहचान करता है।

हालांकि, लैवेंडर खुद हमला करने के बारे में फैसला नहीं लेता है और सेना के अधिकारी ही तय करते हैं, कि हमला करना है या नहीं, लेकिन अधिकारियों का फैसला आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सूचना के आधार पर ही होता है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, गाजा संघर्ष के शुरुआती हफ्तों के दौरान, लैवेंडर ने संभावित लक्ष्य के रूप में 37,000 फिलिस्तीनियों की पहचान की, इस प्रणाली का उपयोग करके 7 अक्टूबर से 24 नवंबर के बीच गाजा में कम से कम 15,000 हवाई हमले किए गए हैं। जबकि, एक हकीकत ये भी है, कि ये सिस्टम जिन लक्ष्यों की पहचान करता है, उनमें 10 प्रतिशत गलत पहचान होने की संभावना होती है। यानि, इस बात की पूरी संभावना है, कि अगर इजराइल ने इस टेक्नोलॉजी के आधार पर 100 हमले किए होंगे, तो उनमें से कम से कम 10 हमले गलत टारगेट पर किए गये होंगे।

द गॉस्पेल: पहला 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वार'

गॉस्पेल का मतलब होता है 'अच्छी खबर।'

इजराइल डिफेंस फोर्स (IDF) ने दावा किया है, कि उन्होंने हमास के खिलाफ दुनिया का पहला 'कृत्रिम खुफिया युद्ध' छेड़ा है और वो हमास के खिलाफ हब्सोरा सिस्टम, जिसे गॉस्पेल सिस्टम के रूप में भी जाना जाता है, उसका इस्तेमाल कर रहा है।

यह IDF की एआई-आधारित लक्ष्य प्राप्ति प्रणाली की पहली आधिकारिक स्वीकृति है।

IDF हब्सोरा को एक 'रक्षात्मक' हथियार प्रणाली बताता है, जो दुश्मन के लड़ाकों और उपकरणों का तेजी से पता लगाने में सहायता करता है। इसका मकसद विभिन्न स्रोतों से डेटा एकत्र करके और मानव ऑपरेटरों को लक्ष्यीकरण सिफारिशें प्रदान करके 'नागरिक हताहतों की संख्या को कम करना' है।

'गॉस्पेल' और 'लैवेंडर' के बीच क्या अंतर है?

गॉस्पेल और लैवेंडर प्रणालियों के बीच मूलभूत अंतर लक्ष्य की परिभाषा में है। रिपोर्टों के मुताबिक, गॉस्पेल उन इमारतों और संरचनाओं की पहचान करता है, जिनके बारे में सेना दावा करती है, कि वहां से आतंकवादी ऑपरेट हो रहे हैं, जबकि लैवेंडर व्यक्तियों को चिह्नित करता है, और उन्हें संभावित 'किल लिस्ट' में डालता है।

लक्ष्य की पहचान के अलावा, इजराइल, हमास द्वारा बनाए गये सुरंगों के नेटवर्क का नक्शा तैयार करने, उनकी निगरानी करने के लिए एआई का भी लाभ उठा रहा है। एआई-संचालित सेंसर से लैस मानव रहित हवाई वाहन (यूएवी) का उपयोग भूमिगत बुनियादी ढांचे का सर्वेक्षण करने के लिए किया जा रहा है, जो गाजा में आईडीएफ के सैन्य अभियानों का समर्थन करने के लिए महत्वपूर्ण खुफिया जानकारी प्रदान करता है।

'लैवेंडर' और 'गॉस्पेल' जैसे एआई सिस्टम की तैनाती ने नागरिक हताहतों के बारे में चिंता पैदा कर दी है, जिसे इजराइली सेना 'कॉलेक्ट्रल डैमेज' कहती है। लिहाजा, आशंका जताई जा रही है, कि हो सकता है लैवेंडर ने भारतीय कर्नल की गलत पहचान की हो और उसी पहचान के आधार पर इजराइल ने हमला किया हो।

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