क्या यूक्रेन युद्ध के चलते जा सकती है रूसी राष्ट्रपति पुतिन की कुर्सी ?
नई दिल्ली, 28 मार्च: अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने हाल ही में रूस में अपने समकक्ष व्लादिमीर पुतिन को सत्ता से बेदखल करने की ओर इशारा करके यूक्रेन में जारी रूसी हमले के बीच माहौल को और गर्म कर दिया था। बाइडेन की ओर से कही गई बातों से अमेरिका ने पलटने में भी देरी नहीं की थी, लेकिन उससे रूस को मौका मिला और उसने बता दिया कि उसे इराक, अफगानिस्तान या सीरिया समझ लेने की भूल ना करे। हालांकि, बाद में बाइडेन भी अपनी बातों से पलटते नजर आए। ऐसे में आइए जानते हैं कि क्या यूक्रेन संकट की वजह से ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है कि पुतिन को अपनी कुर्सी से हाथ धोना पड़ जाए?

जेलेंस्की की तंज पर बहके जो बाइडेन
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की समय-समय पर रूस के खिलाफ जंग में नाटो से उम्मीदों के मुताबिक सहयोग नहीं मिल पाने को लेकर अपनी भड़ास सार्वजनिक करते रहे हैं। हाल ही में उन्होंने फिर से अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगियों पर यह कहकर तंज कसा था कि वे मान लें कि वे 'रूस से डर गए हैं।' उनका तीर सीधे निशाने पर लगा और अमेरिकी राष्ट्रपति ने तपाक से रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को उनके पद से हटाने का शिगूफा छोड़ दिया। लेकिन, अमेरिका की सरकार ने बाइडेन से हुई कूटनीतिक चूक को समझने में देर नहीं की और फौरन ही अपने सुर को नरम कर लिया। अमेरिका ने इस बात से इनकार किया कि राष्ट्रपति बाइडेन रूस में सत्ता परिवर्तन की योजना पर काम कर रहे हैं।

रूस को अफगानिस्तान या इराक समझ रहे थे बाइडेन ?
लेकिन, रूस ने पलटवार करने में देरी नहीं की और कहा कि 'इसपर फैसला बाइडेन को नहीं करना है, रूसी राष्ट्रपति को रूस की जनता ने चुना है।' बाइडेन का भाषण नाटो में उसके सहयोगी फ्रांस को भी नागवार गुजरा। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने चेतावनी देते हुए कहा कि इस तरह की बयानबाजी से रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध विराम की कोशिशों को झटका लग सकता है। दरअसल, दूसरे देशों में दखल देकर सत्ता परिवर्तन कराने का अमेरिका का एक इतिहास रहा है। वह इराक और अफगानिस्तान में ऐसा कर चुका है। हाल के समय में वह सीरिया में भी सैन्य कार्रवाई के जरिए ऐसी ही कोशिश कर चुका है, जहां राष्ट्रपति बशर अल-असाद की सत्ता की हिफाजत के लिए रूस कूद पड़ा था। बाइडेन के दिमाग में शायद रूस के लिए भी वही सब चल रहा था।

जो बाइडेन ने कहा क्या था?
अमेरिकी राष्ट्रपति ने पोलैंड के वार्सा से रूस के लोगों से मुखातिब होकर कहा था, 'आप रूस के लोग हमारे दुश्मन नहीं हैं। ईश्वर के लिए ये शख्स (पुतिन) सत्ता में नहीं बने रह सकता है।' लेकिन, उनके इस बयान के बाद वॉशिंगटन डीसी में उनके दफ्तर व्हाइट हाउस ने तत्काल जवाब दिया कि 'राष्ट्रपति का कहना ये था कि पुतिन को उनके पड़ोसियों या क्षेत्र में अधिकारों के इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी जा सकती है। वे रूस में पुतिन की शक्ति या सत्ता परिवर्तन की चर्चा नहीं कर रहे थे।' अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने भी बात को संभालने की कोशिश की और कहा, 'मैं सोचता हूं कि राष्ट्रपति, व्हाइट हाउस ने पिछली रात अपनी बात रख दी है, बहुत ही सामान्य तरीके से कि राष्ट्रपति पुतिन को युद्ध छेड़ने या यूक्रेन के खिलाफ हमला करने या किसी दूसरे के खिलाफ हमला करने का अधिकार नहीं दिया जा सकता।' जब बाइडेन से बाद में पत्रकारों ने पूछा कि क्या वह रूस में सत्ता परिवर्तन की बात कह रहे थे तो उन्होंने कहा कि 'नहीं'।

क्या जा सकती है रूसी राष्ट्रपति पुतिन की कुर्सी ?
व्लादिमीर पुतिन किसी न किसी रूप में पिछले 23 वर्षों से रूस पर शासन कर रहे हैं। वह सोवियत रूस के जमाने में वहां कुख्यात जासूसी एजेंसी केजीबी के लिए काम कर चुके हैं और सोवियत संघ के विघटन के बाद एफएसबी से भी जुड़े रहे हैं। ठेठ शब्दों में कहें तो रूस में पुतिन की इजाजत के बिना पत्ता डोलने की स्थिति भी नहीं है। कुल मिलाकर पुतिन के सत्ता से बेदखल होने की संभावना फिलहाल तो लगभग असंभव ही लगती है। उनके राष्ट्रपति पद पर उसी स्थिति में संकट पैदा हो सकता है, जब यदि रूसी सेना यूक्रेन में बुरी तरह हार जाए या फिर पश्चिमी देशों की आर्थिक पाबंदियों के चलते रूस में आम जन-जीवन पूरी तरह तबाह होने लगे। रूसी सेना हारती है तो उनकी सशक्त छवि पर बट्टा लगेगा और आर्थिक तंगी से उनकी अलोकप्रियता का ग्राफ अप्रत्याशित रूप से बढ़ेगा। इन परिस्थितियों के अलावा व्लादिमीर पुतिन को रूस के राष्ट्रपति पद से हटाना मुश्किल नहीं बल्कि, नामुमकिन ही लगता है।












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